क्या सही में ज़िम्मेदार सरकारी अफ़सरों पर इन बच्चों की हत्या का मुकदमा चलेगा? क्या विभाग के मंत्री पर ग़ैर-इरादतन हत्या का केस चलेगा? या फिर सिस्टम के सबसे निचले कर्मचारी को महीने भर के लिए निलंबित कर पल्ला झाड़ लिया जाएगा?

संपादक की पसंद

दुष्प्रचार से बाज नहीं आ रहा The Wire, मोदी-समर्थक मुसलमानों को समाज से अलग-थलग करने की कोशिश

नए भारत में नफरती चिंटुओं वाली पत्रकारिता नहीं चलेगी, फर्जी भय का नैरेटिव नहीं चलेगा-वायर सबक सीखने की जहमत उठाए, या दुकान समेटने की तैयारी करे।

AltNews वालो, ज़ाकिर मूसा ‘अलगाववादी’ नहीं, आतंकी था जो इस्लामी ख़िलाफ़त चाहता था

एक आतंकवादी संगठन के सरगना को अलगाववादी नेता कहना न केवल भ्रम फैलाने जैसा है, बल्कि आतंकवादियों द्वारा मानवता पर किए गए क्रूर अत्याचारों पर पर्दा डालने के भी समान है, जो किसी अपराध से कम नहीं।

साध्वी प्रज्ञा: जिसने टूटी रीढ़ के साथ हिन्दू टेरर के नैरेटिव को छिन्न-भिन्न कर दिया

"साध्वी प्रज्ञा की भाजपा से उम्मीदवारी ‘भगवा या हिन्दू आतंकवाद की अवधारणा' के खिलाफ भाजपा का सत्याग्रह है।" लोकसभा उम्मीदवार घोषित होने के पहले साध्वी प्रज्ञा ने भी एक सवाल के जवाब में कहा था, ‘‘मैं धर्मयुद्ध के लिए तैयार हूँ।''

भारत दुर्दशा से कॉन्ग्रेस दुर्दशा तक: नकली गाँधियों ने अपनी कब्र खोदी और दोष भाजपा पर डाला

भाजपा और प्रधानमंत्री मोदी पर बिना किसी पुख्ता सबूत या तथ्य के निराधार आरोप लगाए जाने पर औंधे मुँह गिरे राहुल गाँधी को जनता ने मुँहतोड़ जवाब दिया है। वैसे इसकी संभावना भी कम ही है कि इतना कुछ होने के बाद भी वो इससे कुछ सीख ले पाएँगे।

लोक सभा 2019: 23 मई, आएगा तो...

नेता के बोल: कंट्रोल नेता जी, कंट्रोल!

हलचल 2019: नेता जी, पार्टी में हैं?

विशेष

नकली गाँधी परिवार के चिराग की हार के वो कारण, जिसके बचाव में उतरा लिबरल मीडिया गिरोह

यह कहना ग़लत नहीं होगा कि राहुल गाँधी हमेशा इसी फ़िराक में रहे कि मोदी कब कोई चूक करें और फिर उन्हें मुद्दा बनाकर जनता के समक्ष उनकी छवि को धूमिल किया जा सके।

जनता समझदार है, राहुल गाँधी जी! उनको अपने जैसा मत समझिए…

कॉन्ग्रेस को अब राहुल गाँधी के आगे सोचना होगा, एक नेता और देश के नेतृत्त्व के लिए वे स्वयं को सर्वोत्तम प्रत्याशी साबित नहीं कर पाए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि वे स्वयं भी प्रधानमंत्री बनना नहीं चाहते हैं और उन्हें पार्टी जबरदस्ती नेता बना कर रखना चाहती है।

सिन्हा की हार का मुंबई कनेक्शन, समझिए कैसे अपने ही पैर पर कुल्हारी मार ख़ामोश हुए शत्रुघ्न

शत्रुघ्न सिन्हा की हार के पीछे जो भी फैक्टर हैं, उनका न तो कॉन्ग्रेस से कुछ लेना-देना है और न ही भाजपा से। यह उनकी व्यक्तिगत हानि है, उनकी विफलता है, जिसके ज़िम्मेदार वह ख़ुद हैं। क्या हैं सिन्हा कि हार के कारण, समझिए स्थानीय समीकरणों के साथ।

अपनों के ही जाल में फँसे दिग्गी राजा: जानिए कैसे कमलनाथ ने सुनिश्चित की उनकी बुरी हार

कमलनाथ एक ऐसा नाम है, जिसने उत्तर प्रदेश में सिंधिया को भिजवाकर उनका क़द घटा दिया क्योंकि वहाँ कॉन्ग्रेस की बुरी हार तय थी। दिग्विजय को 'सबसे बड़ा नेता' और 'सबसे कठिन सीट' के ऐसे जाल में फँसाया, जिससे वह मध्य प्रदेश में एकछत्र राज कर सकें।

लोकतंत्र में ‘खतम सिंह’ विपक्ष की वजह से सिर्फ व्यंग्य ही सच हो रहे हैं और दावे गलत

कॉन्ग्रेस जनादेश को EVM से छेड़छाड़ बताकर लगातार जनादेश का अपमान करती नजर आई। नतीजा ये रहा कि नालायक विपक्ष द्वारा तैयार किए गए फासिस्ट, भक्त, दलित पर अत्याचार, अल्पसंख्यकों में डर का माहौल, EVM हैक, बिकी हुई मीडिया, कट्टर हिन्दू जैसे नैरेटिव नरेंद्र मोदी की छवि ख़राब करने के बजाए उन्हें महामानव बनाते चले गए।

वास्कोडिगामा की वो गन जो विपक्ष ने अपना नाम लेकर फायर किया (भाग 3)

योजना ही नहीं, देश भी पहले से ही था, तो क्या काम ही न किया जाए? क्या योजना बना देने से ही काम हो जाता है? या फिर पुरानी योजना पर नए तरीके से काम करना और समाज को लाभ पहुँचाना कोई अपराध है? योजना का नाम ही नहीं, उसके क्रियान्वयन को भी मोदी सरकार ने पूरी तरह से बदला।

ज़मीर बेच कर कॉफ़ी पीने वाली मीडिया और लिबटार्डों का सामूहिक प्रलाप (भाग 2)

एंकर स्टूडियो के भीतर इस तरह का चेहरा लेकर आने लगा कि उसे स्टूडियो के बाहर कुछ हिंदुओं ने थप्पड़ मार कर चेहरा सुजा दिया है। एंकर इस तरह से मरा हुआ मुँह लेकर बैठने लगा, और भद्दे ग्राफ़िक्स की मदद से आपको बताने लगा कि हत्या तो बस मुसलमानों की ही हो रही है, और कैसे डर फैलाया जा रहा है।

फ़ैक्ट चेक : मीडिया या सोशल मीडिया में चल रही ख़बरों का पोस्टमार्टम

बड़बोलेपन पर मोदी का अपने ही सांसदों पर कटाक्ष, बोले ‘छपास’ और ‘दिखास’ से बचिए

मोदी ने कहा, "मेरे जीवन के कई पड़ाव रहे, इसलिए मैं इन चीजों को भली-भांति समझता हूँ, मैंने इतने चुनाव देखे, हार-जीत सब देखे, लेकिन मैं कह सकता हूँ कि मेरे जीवन में 2019 का चुनाव एक प्रकार की तीर्थयात्रा थी।"

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ट्रोल-ट्रोलाचार्य संवाद: स्वधन्य पत्रकारों की वैचारिक नग्नता Vs वामपंथी षड्यंत्रों का रहस्योद्घाटन

थ्रेड में ट्रोल करने वाले अधम प्रकार के विस्तारवादी ट्रोल होते हैं। मध्यम कोटि के ट्रोल एक ट्वीट में चेतना शून्य कर देते हैं। उत्तम कोटि के ट्रोल एक वाक्य में ही अचेत कर देते हैं और सर्वोत्तम ट्रोल एक शब्द लिखकर ही नासिका लाल कर कर्णछिद्रों से धूम्र-वाष्प निष्कासन की प्रक्रिया का सूत्रपात कर देते हैं।

ऑपइंडिया को है आप पर भरोसा

भारत का मीडिया तंत्र हमेशा से एक ख़ास विचारधारा को पसंद करता आया है। इस विचारधारा से जुड़े रहने वालों ने मीडिया के हर पहलू पर अपना दबदबा बना रखा है। वो मठाधीश बन बैठे हैं, और उनसे जो भी अलग राय रखता है, उन्हें 'ट्रोल' और असहिष्णु करार दिया जाता है। अलग राय रखने वालों का हुक्का-पानी भी बंद करवाने की कोशिश की जाती है। ऑपइंडिया इन मठाधीशों से अलग राय रखता है। और हमें विश्वास है कि हमारा हुक्का-पानी इन मठाधीशों के भरोसे नहीं, आपके भरोसे चलेगा। इस पोर्टल पे उपलब्ध 'डिजिटल सामग्री' के लिए आपको जो भी उचित लगे, उतना सहयोग करें...

विवेक ओबरॉय को मिली जान से मारने की धमकी, PM मोदी की बायोपिक में लीड रोल बना ‘कारण’

उनके स्थानीय आवास के बाहर सुरक्षा के लिए एक वाहन भी खड़ा किया गया है। विवेक को ये सुरक्षा मुंबई पुलिस की प्रोटेक्शन और सिक्योरिटी ब्रांच द्वारा उपलब्ध कराई गई है।

अक्षय कुमार की फिल्म ‘Laxmmi Bomb’ से डायरेक्टर हुए अलग, बोला – आत्मसम्मान के लिए!

राघव लॉरेंस ने ट्विटर लिखा, "जिस घर में सम्मान ना मिले, उस घर में नहीं जाना चाहिए। इस दुनिया में दौलत और शोहरत से अधिक आत्मसम्मान जरूरी है। इसलिए मैं फिल्म 'लक्ष्मी बम' छोड़ रहा हूँ।"

प्रचार के लिए ब्लाउज़ सिलवाई, 20 साड़ियाँ खरीदी, ताकि बड़े मुद्दों पर बात कर सकूँ: स्वरा भास्कर

स्वरा भास्कर ने स्वीकार करते हुए बताया कि उन्हें प्रचार के लिए बुलाया गया क्योंकि वो हीरोइन हैं और इस वजह से ही उन्हें एक इमेज बनाना आवश्यक था। इसी छवि को बनाने के लिए उन्होंने 20 साड़ियाँ खरीदीं और और कुछ जूलरी खरीदी ताकि ‘बड़े मुद्दों पर’ बात की जा सके।