जीत का शंखनाद फूँका जा रहा है। देश को 'संघी-सांप्रदायिक' ताकतों से छुटकारा मिल गया है। समाजवाद-लालवाद-बेटावाद-दाढ़ीवाद से लेकर दीदी-बुआवाद सब मिलकर अब माल-वाद की मलाई खाएँगे

ताज़ा ख़बरें

संपादक की पसंद

आखिर क्या कारण है कि ‘लेफ़्ट’ इतना बलवान और ‘राइट’ इतना कमज़ोर?

लेफ़्ट इसलिए बलवान नहीं है कि उसके पास पैसा है। लेफ़्ट इसलिए भी बलवान नहीं है कि उसके पीछे विदेशी ताकते हैं। बल्कि लेफ़्ट इसलिए बलवान है क्योंकि उनमें एकता है

मुंबई से मेडिकल साइंस की एक ख़बर और महर्षि दधीचि के बलिदान की महान गाथा

आख़िर क्यों वाजपेयी ने अपनी कविता में दधीचि का जिक्र किया था? बांद्रा के शिक्षक स्वर्गीय राजेश की कहानी ले जाती है हमें हज़ारों साल पीछे। वृत्रासुर वध की महान गाथा फिर से...

सबरीमाला साइड इफ़ेक्ट: ‘अन्य मंदिरों पर भी थोपा जा सकता है संवैधानिक नैतिकता का तर्क’

"सबरीमाला मंदिर मार्ग पर एक हवाई अड्डा बनाने की योजना है, यह तभी लाभप्रद होगी जब मंदिर को 365 दिन खुला रखा जाए। इसीलिए मंदिर को एक तीर्थस्थल के बजाय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के प्रयास चल रहे हैं।"

कॉन्ग्रेस के 70 सालों का ‘क्रेडिट’ BJP को! केजरीवाल का मेमरी लॉस!

कोलकाता की 'ममता'मयी महफ़िल। बड़े-बड़े धुरंधर। जमावड़ा था एक गिरोह का, 'चौकीदार' को हटाना ही जिनका परम लक्ष्य। केजरीजी को आया जोश और महफ़िल को लूटने की जल्दी में...

कुंभ

प्रयागराज से ख़बरें

कुम्भ 2019: ख़ास आकर्षण, जो जीवन भर नहीं भूलेंगे आप!

'पेशवाई' प्रवेशाई का देशज़ शब्द है, जिसका अर्थ है शोभायात्रा, जो विश्व भर से आने वाले लोगों का स्वागत कर कुम्भ मेले के आयोजन को विश्व पटल पर सूचित करने के उद्देश्य से निकाली जाती है

विशेष

राय-विचार

बिहार में कॉन्ग्रेस का हाथ थाम राजनीति करने वाली मीसा रामकृपाल का हाथ क्यों काटना चाहती हैं?

मीसा को आज हम जिस रूप में देख रहे हैं, दरअसल वो लालू यादव की ही देन है। एक कहावत 'बापे पूत परापत घोड़ा, नै कुछ तो थोड़म थोड़ा' लालू जी के प्रदेश में खूब बोला जाता है। मतलब बच्चों पर कुछ न कुछ असर तो अपने पिता का पड़ता ही है

परमादरणीय रवीश कुमार! अपना ‘कारवाँ’ रोक दीजिए, आपको हिंदी पत्रकारिता का वास्ता

अपने पिछले तमाम एजेंडों में मोदी सरकार और उससे सम्बंधित पदाधिकारियों को नीचा दिखाने और अपमानित करने के तमाम नाकाम प्रयासों के बाद रवीश कुमार एक बार फिर से एक काल्पनिक वाकया लेकर जनता के सामने आए हैं।

प्रिय लम्पट बुद्धिजीवी गिरोह, भारत ने रोहिंग्या का ठेका नहीं ले रखा है

भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में रोहिंग्या मुसलमानों को अवैध अप्रवासी बताते हुए उन्हें देश की सुरक्षा के लिए ख़तरा बताया था। सरकार का तर्क था कि रोहिंग्या लोगों को रहने की अनुमति देने से हमारे अपने नागरिकों के हित काफी प्रभावित होंगे और देश में तनाव भी पैदा होगा।

हेलो Quint, शरीरिक बीमारी तो ठीक हो सकती है, मानसिक बीमारी का क्या करें?

लोकतंत्र और FOE का मतलब वो लिबरल क्या जाने जो दुनिया की सबसे बड़ी लोकतान्त्रिक पार्टी के मुखिया के लिए मौत माँगता हो। स्वाइन फ़्लू के सात हज़ार केस आ चुके हैं भारत में। क्या उन सबकी मृत्यु से स्तुति मिश्रा की क्षुधा शांत होगी?

फ़ैक्ट चेक : मीडिया या सोशल मीडिया में चल रही ख़बरों का पोस्टमार्टम

राजनीति

ऑपइंडिया के लिए लिखें

आप अपने आर्टिकल्स ऑपइंडिया पर प्रकाशित करना चाहते हैं? 'My Voice' वह मंच है, जहाँ यह संभव है। अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें।

ऑपइंडिया को है आप पर भरोसा

भारत का मीडिया तंत्र हमेशा से एक ख़ास विचारधारा को पसंद करता आया है। इस विचारधारा से जुड़े रहने वालों ने मीडिया के हर पहलू पर अपना दबदबा बना रखा है। वो मठाधीश बन बैठे हैं, और उनसे जो भी अलग राय रखता है, उन्हें 'ट्रोल' और असहिष्णु करार दिया जाता है। अलग राय रखने वालों का हुक्का-पानी भी बंद करवाने की कोशिश की जाती है। ऑपइंडिया इन मठाधीशों से अलग राय रखता है। और हमें विश्वास है कि हमारा हुक्का-पानी इन मठाधीशों के भरोसे नहीं, आपके भरोसे चलेगा। इस पोर्टल पे उपलब्ध 'डिजिटल सामग्री' के लिए आपको जो भी उचित लगे, उतना सहयोग करें...