Monday, April 6, 2020
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‘पिंचर’ बनाने वालों से डर नहीं लगता साहब, ‘IIT-IIM वालों से’ लगता है: एंटी CAA से जलता भारत

ज्यादातर रेडिकल इस्लामिक संगठनों के प्रमुख, मुस्लिम आतंकी सरगनाओं की पारिवारिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि किसी 'पिंचर' बनाने वाले की नहीं है, ये लगभग सब के सब अच्छे सम्पन्न परिवारों से आते हैं- चाहे वो ओसामा बिन लादेन हो, या अल जवाहिरी, द्वि राष्ट्र सिद्धांत का जनक दार्शनिक और शायर इक़बाल या बैरिस्टर जिन्ना।

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K Bhattacharjee
Black Coffee Enthusiast. Post Graduate in Psychology. Bengali.

बंबइया फिल्म्स के सफल डायरेक्टर करन जौहर की पीरियड फिल्म ‘तख़्त’ में काम कर रहा हुसैन हैदरी नामक यह कथित लेखक और कवि जो हिंसा को रोमांटिसाइज करने और हिन्दुओं के खिलाफ नफरत फैलाने का आदी है, सोशल मीडिया पर ‘हिन्दू आतंकवादी’ ट्वीट करने के कारण विवादों में हैं। यह दिमागी रूप से विक्षिप्त आदमी न सिर्फ हिन्दू आतंकवादी शब्द को एक बार नहीं दो बार नहीं बल्कि 11 बार लिखता है, जो अपर कास्ट हिन्दुओं को चप्पल से पीटने की बात भी कर चुका है, कहता है – ‘हिन्दू आतंकवादी’ ये दो शब्द काफी महत्त्वपूर्ण हैं, इसके बाद सोशल मीडिया में खुद के खिलाफ पैदा गुस्से के बाद फिलहाल ये अकाउंट डिलीटेड है।

नागरिकता कानून के पास होने के बाद जैसे अपना मानसिक संतुलन खो चुका यह व्यक्ति, लगातार अनर्गल ट्वीट करता दिखता है, जेएनयू के दो छात्र गुटों के बीच हुई हिंसा इसे ‘स्टेट स्पॉन्सर्ड-हिन्दू आतंकवाद’ और ‘हिन्दू स्पॉन्सर्ड-स्टेट आतंकवाद’ जान पड़ता है।

नागरिकता कानून के खिलाफ होते विरोध प्रदर्शनों और फैलाए गए दंगों के कारण सार्वजनिक सम्पत्ति को हुई क्षति और आम देशवासियों को हुई परेशानियों का जिस बेशर्मी के साथ बचाव पिछले दिनों किया गया है वो एक बार फिर उस तथ्य को स्पष्ट करने वाला है कि ज्यादातर रेडिकल इस्लामिक संगठनों के प्रमुख, मुस्लिम आतंकी सरगनाओं की पारिवारिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमि किसी ‘पिंचर’ बनाने वाले की नहीं है, ये लगभग सब के सब अच्छे सम्पन्न परिवारों से आते हैं- चाहे वो ओसामा बिन लादेन हो, या अल जवाहिरी, द्वि राष्ट्र सिद्धांत का जनक दार्शनिक और शायर इक़बाल या बैरिस्टर जिन्ना।

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वो IIM-इंदौर का हुसैन हैदरी हो या भारत की ‘चिकेन नेक’ काटने की धमकी देने वाला शरजील इमाम जो IIT से एमटेक और जेएनयू में इतिहास का शोधार्थी है या एएमआईएम का ओवैसी, ‘उम्मत’ के लिए जारी लड़ाई की बागडोर हमेशा पढ़े लिखे लोगों के पास ही रही है जिन्होंने अपने इस जहरीले एजेंडे के लिए पैदल सिपाहियों की भर्ती उसी तबके से की जिसे ‘पिंचर’ बनाने वाला कहा जाता है, जिसको इस्लामिक सुप्रीमेसी का घोल पिलाने के लिए ‘हमने 800 साल राज्य किया’ जैसे जुमले गढ़े गए, जिससे ‘पिंचर’ वालों की गरीबी को हिन्दू राज्य में हुई कथित नाइंसाफी के मत्थे मढ़ विक्टिमहुड का कार्ड खेला जा सके। हालाँकि ‘पिंचरवाला’ टर्म इस्लामिक सुप्रीमेसी का राग अलापने वालों का मुँह बंद करने के लिए अचूक बाण है जिससे उनको बताया जा सके कि तुमने किसी पर 800 साल राज्य नहीं किया था, बंद करो यह बकवास।

ओवैसी, शरजील इमाम, हुसैन हैदरी, इकबाल, जिन्ना, लादेन की फेहरिश्त में आप नाम जोड़ते जाइए उन सबका भी जो शायद आपके आसपास बैठा हो, जो आपके साथ काम करता हो, जिनका पेशा कुछ भी क्यों न हो लेकिन वो लगे हों उम्मत के लिए ही।

खतरा इन्हीं से है। खतरा एएमयू, जामिया में लगते “सब बुत उठवाए जाएँगे, बस नाम रहेगा अल्लाह का” से है।

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K Bhattacharjee
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