‘शशि थरूर का फैन हूँ लेकिन 2024 में उन्हें तिरुवनंतपुरम से BJP के टिकट पर हरा दूँगा’

"अब मेरी जिंदगी में सब कुछ सही चल रहा है। कुछ फ़िल्मों की शूटिंग भी कर रहा हूँ। फिर से क्रिकेट के मैदान में भी उतरने को तैयार हूँ... और 2024 में शशि थरूर को भी हरा कर सासंद बनूँगा।"

क्रिकेटर एस श्रीसंत ने कहा है कि वह 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरेंगे और तिरुवनंतपुरम सीट से जीत की हैट्रिक लगा चुके शशि थरूर को हरा देंगे। कभी भारतीय टीम में तेज़ गेंदबाज के रूप में खेल चुके श्रीसंत ने बताया कि वह एक व्यक्ति के रूप में थरूर के बहुत बड़े प्रशंसक हैं और विषम परिस्थितियों में थरूर ने उनका साथ भी दिया है। लेकिन श्रीसंत ने कहा कि इन सबके बावजूद वह उन्हें अगले लोकसभा चुनाव में हरा देंगे, इसमें कोई शक की गुंजाईश नहीं है। श्रीसंत ने ये सारी बातें इंडियन एक्सप्रेस को दिए इंटरव्यू में बताई।

श्रीसंत ने अपने भविष्य के बारे में बात करते हुए कहा कि सब कुछ सही चल रहा है। उनकी आत्मकथा बाजार में आने वाली है। उस पर वेब सीरीज बन रही है। वह कुछ फ़िल्मों की शूटिंग भी कर रहे हैं। अब वह क्रिकेट के क्षेत्र में फिर से उतरने को तैयार हैं और जब वह मैदान पर उतरेंगे तो उन्हें देखने के लिए उनका परिवार भी वहाँ पर मौजूद होगा। श्रीसंत ने कहा कि वह जब तक जेल में थे तब तक उनकी पत्नी किचन में ही सोती थीं क्योंकि वह वैसे ही रहना चाहती थी, जैसे श्रीसंत जेल में बिना सुविधाओं के रहते थे।

बता दें कि मैच फिक्सिंग में नाम आने के बाद बीसीसीआई ने श्रीसंत पर 7 सालों का प्रतिबन्ध लगाया था। उन्हें जुलाई 2015 में दिल्ली की एक अदालत ने दोष मुक्त करार दिया था। हालाँकि, यह पहली बार नहीं होगा जब वह चुनावी मैदान में उतरेंगे (अगर ऐसा होता है)। उन्होंने 2016 में तिरुवनंतपुरम विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था लेकिन वह दूसरे नंबर पर रहे थे। कॉन्ग्रेस के उम्मीदवार ने 36.82% मत प्राप्त कर उन्हें हरा दिया था। श्रीसंत को 27.54% वोट मिले थे।

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अगर पूर्व विदेश राज्यमंत्री शशि थरूर की बात करें तो वह तिरुवनंतपुरम सीट से कॉन्ग्रेस के टिकट पर 2009, 2014 और 2019 में जीत दर्ज कर चुके हैं। हालिया लोकसभा चुनावों में उन्होंने पिछले दोनों चुनावों से भी ज्यादा मत प्राप्त कर जीत दर्ज की थी। 63 वर्षीय थरूर को हराने के लिए इस बार केरल भाजपा के पूर्व अध्यक्ष के राजशेखरन उतरे थे लेकिन उन्हें क़रीब 1 लाख वोटों से हार का सामना करना पड़ा। चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने मिजोरम के राज्यपाल के पद से इस्तीफा दे दिया था।

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