‘मस्जिद बन्दर’ = बंदरों की मस्जिद: मोदी का मजाक उड़ाने वाली गालीबाज ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी की समझ

ऐसा जड़ दिमाग देखकर लगता है कि क्या ट्रोल स्वाति ने कभी भी महात्मा गाँधी के जन्म स्थान पोरबंदर के बारे में नहीं सुना। ट्रोल स्वाति के लिए मुंबई के ‘मस्जिद बन्दर’ का क्या मतलब हुआ? एक ऐसा मस्जिद जो बंदरों के लिए डेडिकेटेड है?

गालीबाज ट्रोल कहें या नौटंकीबाज पत्रकार, स्वाति चतुर्वेदी ने प्रधानमंत्री मोदी का एक एडिटेड वीडियो शेयर कर मजाक उड़ाने की कोशिश की। इस क्लिप में मोदी का गुजरात के द्वारका में बंदरगाहों के विकास पर दिया गया भाषण है।

हिंदी में दिए गए भाषण में, मोदी को कहते हुए सुना जा सकता है, “जब से भारत सरकार में हमें काम करने का अवसर मिला, हमने गुजरात के बंदरों के विकास पर भी इतना ही ध्यान दिया है… और जिसके कारण हम बंदरों का विकास करना चाहते हैं… लेकिन हम बन्दर आधारित विकास करना भी चाहते हैं… हम वो इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना चाहते हैं जो कि बंदरों को रोड से जोड़े, रेल से जोड़े, हवाई पट्टी से जोड़े।”

इस क्लिप में, इतना तो तय है कि मोदी ‘पोर्ट’ के विकास के बारे में बात कर रहे हैं। ‘पोर्ट’ जिसे हिंदी में ‘बंदरगाह’ और गुजराती में ‘बन्दर’ कहते हैं। वीडियो की सच्चाई यह है कि मोदी ने भले ही भाषण हिंदी में दिया पर पोर्ट के लिए उन्होंने स्थानीय गुजराती शब्द ‘बंदर’ का प्रयोग किया। वैसे बंदरगाह उर्दू शब्द है पर हिंदी में खूब प्रचलित है, यही स्थिति गुजरात में बन्दर की है। जानकारी के लिए बता दूँ, सबसे बड़े कोस्टलाइन एरिया वाले राज्य गुजरात में द्वारका को सबसे प्राचीन बंदरगाहों में से एक के रूप में जाना जाता है। चूँकि, मोदी गुजरात के द्वारका में बोल रहे हैं और यह शब्द वहाँ के लोगों अजूबा नहीं है। अपनी ट्रोलिंग क्षमता का परिचय देते हुए स्वाति चतुर्वेदी ने बिना समझे या यूँ कहिए दिमाग से पैदल होकर बिना सन्दर्भ जाने मोदी विरोध की पीड़ा में ‘बन्दर’ को ‘मंकी’ समझ ट्विटर पर ज्ञान देने लगी कि देखो कैसे मोदी ‘बंदरों’ (मंकी) के विकास की बात कर रहा है।

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चतुर्वेदी के इस कारनामे के गुज़राती लोग मजे ले रहे हैं, क्योंकि हम गुजराती चुटकलों से आहत नहीं होते। लेकिन चतुर्वेदी का इंटेंशन यहाँ जोक शेयर करने का नहीं है। इरादा साफ़ है, तो कई ट्विटर यूजर ने चतुर्वेदी का ‘ज्ञान-रंजन’ किया कि यहाँ बन्दर का मतलब पोर्ट है न कि मंकी लेकिन स्वाति तो ठहरीं ट्रोल।

और ट्रोल स्वाति अगर एक बार बकवास कर ले ‘तो फिर वो अपने आप की भी नहीं सुनतीं’, सुन लें तो कहीं लोग समझदार न समझ बैठें! तो गलत साबित होने के बाद भी अपने बकवास कमेंट को सही साबित करने में लगी रहीं।

यहाँ तक कि लोगों को ही मोदी की ‘गलती’ को डिफेंड करने से रोकती रहीं। जबकि मामला यहाँ उल्टा है।

ऐसा जड़ दिमाग देखकर लगता है कि क्या ट्रोल स्वाति ने कभी भी महात्मा गाँधी के जन्म स्थान पोरबंदर के बारे में नहीं सुना। ‘बांद्रा’ मुंबई जो ‘बन्दर’ अर्थात पोर्ट से ही बना है। तब तो ट्रोल स्वाति के लिए मुंबई के ‘मस्जिद बन्दर’ का क्या मतलब हुआ? एक ऐसा मस्जिद जो बंदरों के लिए डेडिकेटेड है?

कुल मिलाकर, गालीबाज ट्रोल ने इस एडिटेड वीडियो से एक बार फिर अपनी बकलोली का परिचय दिया है। और यह भी कि अभी फेक न्यूज़ का धंधा थोड़ा मंदा चल रहा है तो ऐसे एडिटेड वीडियो पर अपनी बकलोली को डिफेंड करके अपनी काल्पनिक ‘निष्पक्ष’ पत्रकारिता का परिचय दिया है। वैसे आज भी कई खोजी पत्रकार लगे हैं कि ट्रोल स्वाति चतुर्वेदी जैसी हाई लेवल की बकलोली की क्षमता आखिर आती कहाँ से है?

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