BJP की टोपी और मुस्लिम लड़की कॉलेज से सस्पेंड: टाइम्स ऑफ इंडिया ने चलाई फर्जी खबर, घटिया प्रोपेगेंडा

शिक़ायत करने वाली उमाम खानम को झूठे आरोप लगाने के लिए कॉलेज से निलंबित कर दिया गया। सभी सबूत उसके ख़िलाफ़ थे। हिंदुओं को निशाना बनाने की जल्दबाजी में, टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार ने ऐसे घटिया प्रोपेगेंडा का सहारा लिया।

Times Of India, देश के प्रमुख प्रकाशनों में से एक है, जिसे अक्सर फेक न्यूज़ फैलाते पाया गया है। एक बार फिर ऐसा ही कुछ हुआ जिसमें एक ख़बर को ग़लत तरीके से प्रचारित करने का प्रयास किया गया। मेरठ लॉ स्कूल की एक 22 वर्षीया छात्रा के संबंध में टाइम्स ने अपनी ख़बर में फिर से आधी-अधूरी जानकारी दी।

Times Of India के पत्रकार पीयूष राय ने मेरठ लॉ स्टूडेंट की एक ख़बर की जिसमें बताया गया कि बीजेपी की टोपी पहनने से मना करने के बाद एक छात्रा को कॉलेज से निलंबित कर दिया गया। अपनी इस झूठी ख़बर के ज़रिए पत्रकार ने भाजपा को निशाना बनाने को कोशिश की। उन्होंने आगे दावा किया कि जिन ‘कथित’ छात्रों ने उमाम खानम को कथित तौर पर ‘बीजेपी की टोपी पहनने से मना’ किया था, उन्हें भी निष्कासित कर दिया गया।

The Times Of India report

हालाँकि, Times Of India के पत्रकार द्वारा किए गए सभी दावे पूरी तरह से झूठे हैं। पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा ने इस बात की सच्चाई जानने के लिए कॉलेज का दौरा किया, जहाँ उन्होंने साथी सहपाठियों और कॉलेज के छात्रों से केवल यह जानने का प्रयास किया कि पत्रकार पीयूष राय द्वारा किए गए दावे जिनमें दोनों छात्रों के निष्कासन की बात कही गई थी वो कितने सच्चे और कितने झूठे हैं।

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अपनी ‘धर्मनिरपेक्ष’ पत्रकारिता को आगे बढ़ाने की कोशिश में, पत्रकार पीयूष ने आगे आरोप लगाया कि 22 वर्षीया उमाम खानम को कॉलेज द्वारा निलंबित कर दिया गया, क्योंकि उसने कॉलेज ट्रिप में भाजपा की टोपी पहनने से इनकार कर दिया था जिसके लिए उसे अन्य छात्रों द्वारा परेशान भी किया गया। पीयूष राय के झूठे आरोपों को उस समय मुँह की खानी पड़ी जब ट्रिप पर गए अन्य छात्रों के साथ-साथ टीचर्स ने पत्रकार के दावों का खंडन किया और यह स्पष्ट रूप से कहा कि न तो बस में मौजूद छात्र शराब के प्रभाव में थे और न ही कोई भाजपा की टोपी पहने हुए थे।

इसके अलावा, कॉलेज के अधिकारियों ने उमाम खानम द्वारा की गई शिकायतों को देखने के लिए एक समिति बनाई। कॉलेज ने उन दो छात्रों को भी तुरंत निलंबित कर दिया, जिन पर कथित उत्पीड़न करने का आरोप लगाया गया था। हालाँकि, घटना के एक सप्ताह बाद भी, समिति द्वारा एक भी बैठक नहीं की जा सकी क्योंकि न तो पीड़िता और न ही अभियुक्त या उनके माता-पिता अपना बयान देने के लिए समिति के सामने उपस्थित हुए। इसलिए, कॉलेज ने 22 वर्षीया छात्रा को अगली सुनवाई तक निलंबित कर दिया।

OpIndia.com ने कॉलेज की एक छात्रा से बात की गई उसके अनुसार, शिक़ायत करने वाली उमाम खानम को कथित रूप से झूठे आरोप लगाने के लिए निलंबित कर दिया गया। सभी सबूत उसके ख़िलाफ़ थे और उसके पास कोई सबूत नहीं था जिससे उसके द्वारा लगाए गए आरोप सही साबित हो सकें।

2 अप्रैल को, उमाम खानम ने एक विवाद शुरू कर दिया था जब उसने अपने साथी छात्रों और अपने फैकल्टी के सदस्यों के ख़िलाफ़ परेशान किए जाने संबंधी गंभीर आरोप लगाए थे। अपने ट्वीट्स में खानम ने दावा किया था कि परेशान करने वाले छात्र शराब के नशे में थे।

खानम ने आरोप लगाया कि छात्रों ने उसे बीजेपी की टोपी पहनने के लिए मजबूर किया। इसी के लिए उसे परेशान किया गया क्योंकि खानम ने वो टोपी पहनने से इनकार कर दिया था। खानम ने अपने ट्वीट में यह भी लिखा कि जब वो छात्र उसे टोपी पहनने के लिए मजबूर कर रहे थे और परेशान कर रहे थे तो वहाँ मौजूद पुरुष अध्यापकों ने इस तथ्य को नज़रअंदाज़ किया।

हालाँकि, छात्रों के साथ ट्रिप पर जाने वाले शिक्षकों ने सभी आरोपों का खंडन किया था और ट्रिप के दौरान ऐसी किसी भी घटना से इनकार किया, जिसके आरोप 22 वर्षीया लॉ स्टूडेंट उमाम खानम ने लगाए थे।

स्वराज्य की पत्रकार स्वाति गोयल शर्मा की एक ग्राउंड रिपोर्ट में इस घटना से संबंधित एक और रोचक जानकारी सामने आई है क्योंकि लगभग 35 छात्र, जो कथित पीड़िता खानम के सहपाठी भी थे, ने स्पष्ट तथ्यों द्वारा समर्थित कहानी यानी इस घटना पर अपना पक्ष साझा किया।

कई अन्य छात्र भी स्वराज्य के लिए अपनी गवाही देने के लिए आगे आए कि कैसे उमाम एक ‘धार्मिक कट्टरपंथी’ है जिसने ‘शेहला राशिद और अरफा ख़ानम की गुड बुक में शामिल होने के लिए’ ऐसा किया।

उमाम खानम की सहपाठी ने साझा किया था स्क्रीनशॉट

उमाम की सहपाठी ज्योति सिंह ने उमाम खानम के खिलाफ अपने दावों को मजबूत करने के लिए उमाम के सोशल मीडिया पोस्ट के कई स्क्रीनशॉट भी लिए। उमाम ने एक दिन में तीन सौ ट्वीट डिलीट किए। हम उनमें से कई के स्क्रीनशॉट लेने में कामयाब रहे। ज्योति ने होली से जुड़ी एक और घटना साझा की। “अमित और अंकुर ने उस पर रंग लगाया। जब तक रंग सफेद और हरा था, वह ठीक थी। जिस क्षण उन्होंने उस पर केसरिया रंग डाला, और उन्होंने अनजाने में ऐसा किया, उसने कहा कि यह ठीक नहीं किया गया और रोना शुरू कर दिया।

ज्योति ने कहा, “वह हमेशा अपने धर्म के बारे में बात करती रही है। एक बार हमारे एक सीनियर जो कि एक मुस्लिम हैं और बहुत धर्मनिरपेक्ष हैं, ने कहा कि वह किसी भी धर्म में विश्वास नहीं करते, उस दिन उमाम इतना पागल हो गई कि वह वहाँ से बाहर निकल गई और आज तक, वह उनसे बात नहीं करती है।”

स्वराज्य टीम ने घटना के उसके पक्ष को सुनने के लिए उमाम तक पहुँचने की कोशिश की, जिसने कहा कि वह केवल फोन पर बात कर सकती है क्योंकि वह कॉलेज नहीं जाएगी।

जब इस बारे में सवाल किया गया कि कोई चश्मदीद गवाह क्यों नहीं है, तो उमाम ने कहा कि वह अपनी शिकायत पर अडिग है। यह पूछने पर कि उसके सहपाठी उसके खिलाफ अभियान क्यों चला रहे हैं, उमाम ने कहा कि उसके खिलाफ एक साजिश चल रही है। रिपोर्टर ने उमाम के ट्वीट्स और लिखित कम्प्लेन में विसंगति पर सवाल उठाया और पूछा कि लिखित शिकायत कम्प्लेन में उसकी मुस्लिम पहचान का कोई उल्लेख नहीं था, उसने कहा कि वह ऐसा महसूस करती है और अपनी शिकायत पर अडिग है। हालाँकि, उमाम ने यह पता चलने के बाद कॉल काट दिया कि रिपोर्टर स्वराज्य के लिए काम करती है।

एक अन्य छात्र ने यह भी कहा कि उमाम एक धार्मिक कट्टरपंथी है। उन्होंने कहा है कि उमाम बहुत ही रूढ़िवादी है, उसने दाऊद इब्राहिम को भारत के ‘बाप’ के रूप में संदर्भित किया था और चाहती थी कि मोदी को भी लिंच किया जाए। उनके सहपाठियों में से एक ने यह भी कहा कि उमाम ने शरिया कानूनों का समर्थन किया था, गौ-मूत्र पर चुटकुलों का समर्थन किया था और हर किसी को अंध भक्त और हिंदुत्व टाइप कहा था जो उससे असहमत थे।

सत्तारूढ़ भाजपा और हिंदुओं को निशाना बनाने की जल्दबाजी में, टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार ने भाजपा को बदनाम करने के लिए ऐसी घटिया प्रोपेगेंडा का सहारा लिया है कि यात्रा के दौरान किसी तरह की उत्पीड़न की रिपोर्टिंग में बुनियादी पत्रकारिता की नैतिकता का पालन किए बिना या कम से कम दूसरे को सुने बिना ही ऐसी फर्ज़ी कहानी छाप दी।

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