Saturday, July 31, 2021
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भगवान शिव का ऐसा मंदिर जहाँ हर 12 साल में गिरती है आकाशीय बिजली, हिमाचल प्रदेश का बिजली महादेव

बिजली गिरने के बाद मंदिर का शिवलिंग कई टुकड़ों में विभाजित हो जाता है। मंदिर के पुजारी शिवलिंग के टुकड़ों को एकत्र करके मक्खन से उन्हें चिपकाते हैं। यह चमत्कार ही है कि कुछ दिनों के बाद शिवलिंग अपने मूल ठोस स्वरूप में लौट आता है।

ऑपइंडिया की मंदिरों की श्रृंखला में हम आपका परिचय कई ऐसे मंदिरों से कराते हैं जो दिव्य हैं, चमत्कारिक हैं लेकिन अनसुने हैं। हाल ही में हमने आपको मध्य प्रदेश के एक ऐसे शिव मंदिर के बारे में बताया था, जहाँ शिवलिंग पर मुस्लिम आक्रांता औरंगजेब ने तलवार से प्रहार किया था, लेकिन वहाँ से उसे अपनी सेना के साथ जान बचाकर भागना पड़ा था। आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताएँगे, जहाँ हर 12 साल में आकाशीय बिजली शिवलिंग पर ही गिरती है और शिवलिंग कई हिस्सों में टूट जाता है लेकिन यह टूटा हुआ शिवलिंग कुछ दिनों बाद पुनः अपनी मूल अवस्था में लौट आता है।

हिमालय की गोद में बसा हुआ यह बिजली महादेव का मंदिर हिमाचल प्रदेश की कुल्लू घाटी पर स्थित है। शिवलिंग पर बिजली गिरने के कारण ही इस मंदिर का नाम पड़ा बिजली महादेव पड़ा। यह मंदिर व्यास और पार्वती नदी के संगम पर स्थित एक पहाड़ पर बना हुआ है तथा समुद्र तल से 2450 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।

कुल्लू का पौराणिक इतिहास

इस क्षेत्र के निवासी यहाँ का इतिहास बताते हैं। उनके अनुसार इस क्षेत्र पर कभी कुलांतक नामक एक दैत्य ने कब्जा कर लिया था। विशाल अजगर के शरीर वाला यह दैत्य इस पूरे क्षेत्र को पानी में डुबा देना चाहता था। इस उद्देश्य से उसने व्यास नदी के पानी को रोक दिया था। इस पूरे क्षेत्र की रक्षा करने के लिए अंततः भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से कुलांतक का वध कर दिया। वध के पश्चात कुलांतक का विशाल शरीर एक पहाड़ में बदल गया और इस स्थान का नाम भी उसी दैत्य के नाम से अपभ्रंश के चलते कुल्लू हो गया।

भगवान शिव ने ही इन्द्र देव को आदेश दिया था कि वह इस दैत्य की देह पर हर बारह वर्ष में आकाशीय बिजली गिराएँ। तब से ही प्रत्येक 12 वर्षों में यहाँ आकाशीय बिजली गिरती है। लेकिन इस बिजली से किसी प्रकार का नुकसान न हो, इसलिए भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में यहाँ स्थापित हो गए और इन्द्र को अपने ऊपर ही बिजली गिराने के लिए आदेशित किया।

मक्खन से जुड़ जाता है शिवलिंग

बिजली गिरने के बाद मंदिर का शिवलिंग कई टुकड़ों में विभाजित हो जाता है। मंदिर के पुजारी शिवलिंग के टुकड़ों को एकत्र करके मक्खन से उन्हें चिपकाते हैं। यह चमत्कार ही है कि कुछ दिनों के बाद शिवलिंग अपने मूल ठोस स्वरूप में लौट आता है।

कैसे पहुँचें?

हिमाचल प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला से कुल्लू की दूरी लगभग 200 किमी है। शिमला में ही एक हवाई अड्डा भी है। शिमला से कुल्लू सड़क मार्ग से पहुँचा जा सकता है। हिमाचल प्रदेश की शीतकालीन राजधानी धर्मशाला से कुल्लू की दूरी लगभग 175 किमी है। बिजली महादेव जिस पहाड़ी पर स्थित हैं, उसकी कुल्लू से दूरी लगभग 25 किमी है। कुल्लू से बिजली महादेव तक पहुँचने के लिए बस या टैक्सी उपलब्ध रहती हैं। ये बस या टैक्सी चांसरी तक जाती हैं, जहाँ से 3 किमी की ऊँचाई तक सीढ़ी चढ़ने के बाद बिजली महादेव पहुँच सकते हैं।  

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ओम द्विवेदी
Writer. Part time poet and photographer.

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