मैं कश्मीर मुद्दे पर टीम इंडिया के साथ: US सांसद ने Pak के समर्थन में बोलने के लिए माँगी माफ़ी

"भारतीय-अमेरिकी मित्रों से मुलाकात के बाद मुझे यह अहसास हो गया है कि सचिव पोम्पिओ को वह पत्र लिखने के पहले भारतीय-अमेरिकियों से न मिल लेना एक गलती थी। मैं इसके लिए क्षमा चाहता हूँ। अगर मैं उनसे पत्र लिखने के पहले मिल लेता तो मैं अपनी चिंताओं को अलग तरीके से व्यक्त करता।"

कश्मीर मुद्दे पर अमेरिकी विदेश सचिव (भारतीय विदेश मंत्री के समकक्ष) माइक पोम्पिओ से हस्तक्षेप का अनुरोध करने के लिए पत्र लिखने के बाद अमेरिकी-भारतीय समुदाय के निशाने पर आए सांसद थॉमस ‘टॉम’ सुओज़्ज़ी ने माफ़ी माँगी है। उन्होंने कहा कि इस संवेदनशील मुद्दे पर विदेश मंत्रालय से पहले अपने भारतीय-अमेरिकी दोस्तों से सलाह-मशविरा न करना उनकी भूल थी।

9 अगस्त को लिखे अपने पत्र में अमेरिकी संसद के हाउस ऑफ़ रेप्रेज़ेंटेटिव्स के सदस्य सुओज़्ज़ी ने लिखा था कि भारतीय प्रधानमंत्री मोदी की कार्रवाई (राज्य को विशेष दर्जे का खात्मा, और पूर्ण राज्य से केंद्र-शासित प्रदेश में तब्दीली) ने कश्मीर में तनाव को और बढ़ा दिया है, जिससे वे (सुओज़्ज़ी) चिंतित हैं। उन्होंने अफ़ग़ानिस्तान मुद्दे के साथ भी कश्मीर का घाल-मेल करने की कोशिश की थी। “(पाकिस्तानी) प्रधानमंत्री इमरान खान के हालिया अमेरिकी दौरे ने दिखा दिया कि अफगानिस्तान-पाकिस्तान सरहद पर हमारे दोनों देश (अमेरिका-पाकिस्तान) आतंक-विरोध और अन्य सुरक्षा मुद्दों पर मिलकर काम कर रहे हैं। भारतीय सरकार की जम्मू-कश्मीर में की गई हालिया हरकतों के चलते हमें इन इलाकों पर भी ध्यान देने की ज़रूरत है।” और मज़े की बात यह है कि खुद तालिबान ने पाकिस्तान से दो-टूक कह दिया है कि कश्मीर मुद्दे को वह अफगानिस्तान से जोड़ कर नहीं देखता। लगभग यही बात अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई भी कह चुके थे।

सुओज़्ज़ी यहीं नहीं रुके थे। अपने पत्र में उन्होंने इमरान खान की तरह भारत को आतंकी हमलों की धमकी देने वाली भाषा का भी इस्तेमाल किया था। “राज्य की स्वायत्ता और कश्मीरियों के अधिकारों पर यह नई पाबंदियाँ उग्रवादियों और दहशतगर्दों को भी उकसा सकतीं हैं।”

भारतीय-अमेरिकी समुदाय ने लिया आड़े हाथों

- विज्ञापन - - लेख आगे पढ़ें -

न्यू यॉर्क के डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद सुओज़्ज़ी ने यह पत्र मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कुछ पाकिस्तानी-अमेरिकियों से मिलने के बाद लिखा था। लेकिन करीब 100 भारतीय-अमेरिकियों से मिलने के बाद उन्होंने 12 अगस्त (स्थानीय समय) को एक कथन प्रेस में जारी कर उस पत्र में लिखी लगभग सभी बातों को खुद ही ख़ारिज कर दिया।

“भारतीय-अमेरिकी मित्रों से मुलाकात के बाद मुझे यह अहसास हो गया है कि सचिव पोम्पिओ को वह पत्र लिखने के पहले भारतीय-अमेरिकियों से न मिल लेना एक गलती थी। मैं इसके लिए क्षमा चाहता हूँ। अगर मैं उनसे पत्र लिखने के पहले मिल लेता तो मैं अपनी चिंताओं को अलग तरीके से व्यक्त करता।”

सुओज़्ज़ी ने कहा कि वह हमेशा से भारत के समर्थक रहे हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत-अमेरिका साझेदारी को वह आने वाले कम-से-कम 50 साल तक अमेरिका की सबसे महत्वपूर्ण साझेदारियों में से एक मानते हैं, और इसे आगे बढ़ाने के लिए वह संसद में प्रयास करते रहेंगे।

शेयर करें, मदद करें:
Support OpIndia by paying for content

यू-ट्यूब से

बड़ी ख़बर

सांप्रदायिकता की लकीर खींचने के लिए अंग्रेज मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एप्लिकेशन एक्ट लेकर आए। आजादी के बाद कॉन्ग्रेस की तुष्टिकरण नीति की वजह से बाल विवाह के कानून बदले, लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ को छुआ भी नहीं गया।

ज़्यादा पढ़ी गईं ख़बरें

कॉन्ग्रेस नेता भ्रष्टाचार

हमाम में अकेले नंगे नहीं हैं चिदंबरम, सोनिया और राहुल गॉंधी सहित कई नेताओं पर लटक रही तलवार

कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी और उनके बेटे राहुल गाँधी नेशनल हेराल्ड केस में आरोपित हैं और फिलहाल जमानत पर बाहर हैं। दिसंबर 2015 में दिल्ली की एक अदालत ने दोनों को 50-50 हज़ार रुपए के पर्सनल बॉन्ड पर ज़मानत दी थी।
1984 सिख विरोधी दंगा जाँच

फिर से खुलेंगी 1984 सिख नरसंहार से जुड़ी फाइल्स, कई नेताओं की परेशानी बढ़ी: गृह मंत्रालय का अहम फैसला

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमिटी के प्रतिनिधियों की बातें सुनने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जाँच का दायरा बढ़ा दिया। गृह मंत्रालय ने कहा कि 1984 सिख विरोधी दंगे के वीभत्स रूप को देखते हुए इससे जुड़े सभी ऐसे गंभीर मामलों में जाँच फिर से शुरू की जाएगी, जिसे बंद कर दिया गया था या फिर जाँच पूरी कर ली गई थी।
रेप

जहाँगीर ने 45 लड़कियों से किया रेप, पत्नी किरण वीडियो बनाकर बेचती थी एडल्ट वेबसाइट्स को

जब कासिम जहाँगीर बन्दूक दिखाकर बलात्कार करता था, उसी वक़्त जहाँगीर की पत्नी किरण वीडियो बनाती रहती थी। इसके बाद पीड़िता को वीडियो और तस्वीरों के नाम पर ब्लैकमेल किया जाता था।
पी चिदंबरम, अमित शाह

चिदंबरम और अमित शाह का फर्क: एक 9 साल पहले डटा था, दूसरा आज भागा-भागा फिर रहा

सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले में जुलाई 22, 2010 को अमित शाह को सीबीआई ने 1 बजे पेश होने को कहा। समन सिर्फ़ 2 घंटे पहले यानी 11 बजे दिया गया था। फिर 23 जुलाई को पेश होने को कहा गया और उसी दिन शाम 4 बजे चार्जशीट दाखिल कर दी गई।
शेहला रशीद शोरा

डियर शेहला सबूत तो जरूरी है, वरना चर्चे तो आपके बैग में कंडोम मिलने के भी थे

हम आपकी आजादी का सम्मान करते हैं। लेकिन, नहीं चाहते कि य​ह आजादी उन टुच्चों को भी मिले जो आपके कंडोम प्रेम की अफवाहें फैलाते रहते हैं। बस यही हमारे और आपके बीच का फर्क है। और यही भक्त और लिबरल होने का भी फर्क है।
वीर सावरकर

वीर सावरकर की प्रतिमा पर पोती कालिख, पहनाया जूतों का हार: DU में कॉन्ग्रेसी छात्र संगठन की करतूत

सावरकर की प्रतिमा को एनएसयूआई दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष अक्षय ने जूते की माला पहनाई। उसने समर्थकों संग मिल कर प्रतिमा के चेहरे पर कालिख पोत दिया। इस दौरान एनएसयूआई के छात्रों की सुरक्षाकर्मियों से झड़प भी हुई।
2018 से अभी तक 20 लोगों को गौ तस्करों ने मार डाला है

गौतस्करों ने 19 हिन्दुओं की हत्या की, लेकिन गोपाल की हत्या उसे तबरेज़ या अखलाक नहीं बना पाती

सौ करोड़ की आबादी, NDA के 45% वोट शेयर में आखिर किसके वोटर कार्ड हैं? फिर सवाल कौन पूछेगा इन हुक्मरानों से? आलम यह है कि तीन चौथाई बहुमत वाले योगी जी के राज्य में, हिन्दुओं को अपने घरों पर लिखना पड़ रहा है कि यह मकान बिकाऊ है!
चापेकर बंधु

जिसके पिता ने लिखी सत्यनारायण कथा, उसके 3 बेटों ने ‘इज्जत लूटने वाले’ अंग्रेज को मारा और चढ़ गए फाँसी पर

अंग्रेज सिपाही प्लेग नियंत्रण के नाम पर औरतों-मर्दों को नंगा करके जाँचते थे। चापेकर बंधुओं ने इसका आदेश देने वाले अफसर वॉल्टर चार्ल्स रैंड का वध करने की ठानी। प्लान के मुताबिक जैसे ही वो आया, दामोदर ने चिल्लाकर अपने भाइयों से कहा "गुंडया आला रे" और...

मिस्टर चिदंबरम को, पूर्व गृह मंत्री, वित्त मंत्री को ऐसे उठाया CBI ने… तो? चावल के लोटे में पैर लगवाते?

अगर एनडीटीवी को सीबीआई के दीवार फाँदने पर मर्यादा और 'तेलगी को भी सम्मान से लाया गया था' याद आ रहा है तो उसे यह बात भी तो याद रखनी चाहिए पूर्व गृह मंत्री को कानून का सम्मान करते हुए, संविधान पर, कोर्ट पर, सरकारी संस्थाओं पर विश्वास दिखाते हुए, एक उदाहरण पेश करना चाहिए था।
शेहला रशीद

‘शेहला बिन बुलाए चली आई, अब उसे खदेड़ तो नहीं सकते… लेकिन हमने उसे बोलने नहीं दिया’

दिल्ली के जंतर-मंतर पर विपक्षी नेताओं का जमावड़ा लगा। मौक़ा था डीएमके द्वारा आयोजित विरोध प्रदर्शन का। शेहला रशीद के बारे में बात करते हुए डीएमके नेता ने कहा कि कुछ लोग बिना बुलाए आ गए हैं तो अब भगाया तो नहीं जा सकता न।

ताज़ा ख़बरें

हमसे जुड़ें

84,333फैंसलाइक करें
11,888फॉलोवर्सफॉलो करें
90,819सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

ज़रूर पढ़ें

शेयर करें, मदद करें: