‘भगोड़ा ज़ाकिर नाइक को मालदीव आने की अनुमति नहीं, भारत अल्पसंख्यकों के लिए स्वर्ग’

मोहम्मद नशीद ने कहा, "हाल ही में मालदीव आने की इजाज़त नहीं दी गई, लिहाज़ा (मलेशिया और मालदीव के बीच) बातचीत हो रही है।" नाइक ने 2016 में, भारत छोड़कर मलेशिया भाग गया था, तब भारत उसके प्रत्यर्पण की माँग कर रहा है।

विवादित इस्लामी प्रचारक जाकिर नाइक ने हाल ही में मलेशिया से मालदीव जाने का प्रयास किया, लेकिन मालदीव ने इसे अनुमति नहीं दी। भारत आए मालदीव की संसद के स्पीकर मोहम्मद नशीद ने शुक्रवार (13 दिसंबर) को कहा, “वह (ज़ाकिर नाइक) मालदीव आने की कोशिश कर रहा था, लेकिन हमने उसे आने इजाज़त नहीं दी।”

नशीद से जब यह पूछा गया कि क्या मालदीव और मलेशिया के बीच ज़ाकिर नाइक के प्रत्यर्पण के लिए कोई बातचीत चल रही है, तो इस पर उन्होंने कहा, “हाल ही में मालदीव आने की इजाज़त नहीं दी गई, लिहाज़ा (मलेशिया और मालदीव के बीच) बातचीत हो रही है।” नाइक ने 2016 में, भारत छोड़कर मलेशिया भाग गया था, तब भारत उसके प्रत्यर्पण की माँग कर रहा है। 

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने ज़ाकिर के ख़िलाफ़ ग़ैर-क़ानूनी गतिविधियाँ रोकथाम अधिनियम के तहत FIR दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2016 में उसके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था। प्रवर्तन निदेशालय का कहना है कि नाइक और उसके ट्रस्टों ने अज्ञात लोगों और शुभचिंतकों से करोड़ों रुपए हासिल किए थे।

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भारत दौरे पर आए मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति और मौजूदा स्पीकर मोहम्मद नशीद नागरिकता संशोधन क़ानून पर अपनी राय देते हुए कहा कि उन्हें भारत के लोकतंत्र पर यक़ीन करते हैं और यह भारत का आंतरिक मामला है। उन्होंने कहा, “नागरिकता संशोधन बिल की पूरी प्रक्रिया को संसद के दोनों सदनों से मंज़ूरी मिली है और मैं उस दौरान ख़ुद भारत की संसद में मौजूद था।”

उन्होंने खुद का उदहारण देते हुए कहा, “भारत अल्पसंख़्यकों के लिए स्वर्ग है, जब मैं भी भारतीय हाई कमीशन गया तो वहाँ मुझे भी शरण मिली। यहाँ तक की भारत आने के लिए भी कहा गया।”

मोहम्मद नशीद ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है कि हिन्द महासागर में इस वक्त कोल्ड वार जैसे हालात हैं। चीन का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मालदीव में एमडीपी सरकार आने के बाद उनके देश में भारत का हित सुरक्षित है। उन्होंने कहा, “मालदीव में सरकार बदलने के साथ ही चीन की तुलना में भारत के हित वहाँ सुरक्षित हैं, ऐसा न कहना बहुत कठिन है कि हिन्द महासागर में एक शीत युद्ध की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन हम दो देशों के बीच सैंडविच जैसी स्थिति में फँसना नहीं चाहते हैं, लेकिन हाँ हमारी नीति भारत पहले की है।”

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