देसी लिबरलों की भाषा बोलने लगे Pak PM, कहा- मोदी हिटलर है

कश्मीर को हिंदुस्तान का आंतरिक मसला बताने की वैश्विक प्रतिक्रिया की शिकायत करते हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने इसकी तुलना दूसरे विश्व युद्ध के पहले 1930 के दशक में नाज़ी जर्मनी के तुष्टिकरण से की।

अब तक देखा ये जाता था कि हिंदुस्तान के देसी लिबरल पाकिस्तान की भाषा बोलते थे, उसके सुर में सुर मिलाते थे। लेकिन 370 हटने के बाद से पाकिस्तान के तोते ऐसे उड़े हैं कि यह गंगा भी उलटी बहने लगी है। हिंदुस्तान में नरेंद्र मोदी को हिटलर बताने वाले लिबरलों के सुर-में-सुर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी मिला लिया है।

‘दुनिया नाज़ियों की तरह झुक रही एंडिया के आगे’

कश्मीर को हिंदुस्तान का आंतरिक मसला बताने की वैश्विक प्रतिक्रिया की शिकायत करते हुए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने इसकी तुलना दूसरे विश्व युद्ध के पहले 1930 के दशक में नाज़ी जर्मनी के तुष्टिकरण से की। क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान ने आरोप लगाया कि कश्मीर में ‘ethnic cleansing’ (जातीय हत्याकाण्ड) के ज़रिए जनसांख्यिकीय बदलाव करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने ट्वीट किया, “क्या दुनिया ऐसे ही देखती रहेगी जैसे म्यूनिख में हिटलर को देखती रही थी?”

इमरान खान ने राग ‘लिबरल नैरेटिव’ में गाना यहीं बंद नहीं किया। उन्होंने ‘डरा हुआ मुसलमान’ वाले आलाप को भी छेड़ते हुए RSS पर निशाना साधा। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने लिखा, “हिंदुस्तान के ‘कब्ज़े’ वाले कश्मीर में कर्फ्यू, कार्रवाई और आने वाला सामूहिक हत्याकांड नाज़ी विचारधारा से प्रेरित संघ की विचारधारा के हिसाब से ही हो रहे हैं /मुझे डर है कि नाज़ी आर्यन श्रेष्ठतावाद जैसी हिन्दू श्रेष्ठतावाद की विचारधारा कश्मीर में ही नहीं रुक जाएगी; इसके चलते पूरे हिंदुस्तान में मुसलमानों का दमन होगा, और अंत में पाकिस्तान निशाने पर होगा।”

कोई जवाब नहीं दे रहा

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इमरान खान ने कसम खाई थी कि वे राष्ट्राध्यक्षों के बीच पैरवी करेंगे और अपनी शिकायत संयुक्त राष्ट्र ले जाएँगे, लेकिन किसी भी देश ने उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया है। यहाँ तक कि इस्लामी देश ईरान के प्रधानमंत्री हसन रूहानी ने भी, गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, केवल इतना ही कहा कि कश्मीरियों को अपने कानूनी हक इस्तेमाल करने देना चाहिए ताकि वे शांतिपूर्वक रह सकें।

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"रिव्यू पिटिशन पर जो भी फ़ैसला होगा, वो चाहे हमारे हक़ में आए या न आए, हमको वो फ़ैसला भी क़बूल है। लेकिन, यह भी एक हक़ीक़त है कि क़यामत तक बाबरी मस्जिद जहाँ थी, वहीं रहेगी। चाहे वहाँ पर कुछ भी बन जाए। वो मस्जिद थी, मस्जिद है... मस्जिद ही रहेगी।"

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