पाकिस्तान को एक और झटका: अब नदी-पानी की जानकारी भी साझा नहीं करेगा हिंदुस्तान

यह समझौता हमारी पाकिस्तान के प्रति सद्भावना के भाव-प्रदर्शन के तौर पर चलता था। अब हिंदुस्तान केवल जलबहाव की अति होने और बाढ़ के मामले में पाकिस्तान को कोई सूचना देगा।

370 हटने के बाद से पाकिस्तान के प्रोपेगंडा और जम्मू-कश्मीर पर नाजायज़ हक के खिलाफ हिंदुस्तान का रवैया दिन-ब-दिन सख्त होता जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और विदेश मंत्रालय के दूसरे देशों को मामले से दूर रहने की सख्त हिदायत, पाकिस्तान के राजनयिक-व्यापारिक संबंध खत्म करने पर कोई अपेक्षित प्रतिक्रिया न देने, सिंधु जल-संधि का अपने हिस्से का पानी पाकिस्तान को और न देने के फैसले के बाद अब पाकिस्तान को हिंदुस्तान से नदियों के बहाव-संबंधी हाइड्रोलॉजिकल जानकारी भी नहीं मिलेगी।

भारतीय सिंधु जल आयोग के आयुक्त पीके सक्सेना के हवाले से टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने दावा किया है कि हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच 1989 में पहली बार हुए और सालाना तौर पर नवीनीकृत होने वाले इस बाबत समझौते को हिंदुस्तान ने आगे न बढ़ाने का निश्चय किया है। यह समझौता हमारी पाकिस्तान के प्रति सद्भावना के भाव-प्रदर्शन के तौर पर चलता था। अब हिंदुस्तान केवल जलबहाव की अति होने और बाढ़ के मामले में पाकिस्तान को कोई सूचना देगा।

सिंधु समझौता नहीं तोड़ेंगे

हालाँकि, हिंदुस्तान इस समझौते को आगे न बढ़ा कर बाढ़ के वार्षिक मौसम (1 जुलाई से 10 अक्टूबर) के समय में इस समझौते के अंतर्गत जो जानकारियाँ दी जानी हैं, वह अब और नहीं देगा, लेकिन सक्सेना ने यह साफ़ किया कि इस समझौते का सिंधु जल समझौते पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा; दोनों अलग-अलग हैं। सिंधु जल समझौते के अंतर्गत जो कुछ सूचना जलबहाव की अति होने और बाढ़ के मामले में पाकिस्तान को दी जानी है, हिंदुस्तान केवल उतनी ही बात पाकिस्तान को बताएगा।

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इसके पहले केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बयान दिया था कि हिंदुस्तान अब सिंधु जल समझौते के तहत अपने हिस्से का पानी पाकिस्तान को और नहीं लेने देगा। बुधवार को ANI से बात करते हुए शेखावत ने कहा, “हिंदुस्तान के हिस्से के पानी में से काफी ज्यादा पाकिस्तान को चला जाता है। इनमें से कई नदियाँ रावी, व्यास और सतलज तंत्र की उपनदियाँ हैं, और इनके कैचमेंट एरिया (हौज़, जलग्रहण क्षेत्रों) में से पानी उस तरफ (पाकिस्तान को ) चला जाता है। हम इस पर तेज़ी से काम कर रहे हैं कि कैसे हमारे हिस्से का पानी जो पाकिस्तान में चला जाता है, उसे घुमा कर अपने किसानों, उद्योगों और लोगों के प्रयोग के लिए इस्तेमाल किया जा सके।”

उन्होंने इस योजना की तकनीकी और जलशास्त्रीय (हाइड्रोलॉजिकल) अनुकूलता पर शोध शुरू करने की भी बात कही। उनके अनुसार उन्होंने इस विषय पर अध्ययन जल्दी खत्म करने का निर्देश दिया है, ताकि योजना को अमली जामा पहनाया जा सके

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