बच्चा-बच्चा जनता है कि भारत से लड़ना हमारी फ़ौज के बस की नहीं: Pak सैन्य वैज्ञानिक

"पाकिस्तान में एक प्रकार का दुःख है, दर्द है, लेकिन एक निराशा का भाव भी है कि कुछ नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि पाकिस्तानी फौज किस तरह की प्रतिक्रिया देती है?"

पाकिस्तानी सेना अभी कश्मीर मसले पर भारत से युद्ध लड़ने की स्थिति में नहीं है। सुस्त होती अर्थव्यवस्था और बढ़ती महँगाई का आम आदमी के जीवन पर त्रासद असर पड़ा है।“- ये शब्द किसी भारतीय नेता या अधिकारी के नहीं हैं। ये बयान है पाकिस्तान की सैन्य वैज्ञानिक आयशा सिद्दीका के। ‘Military Inc.: Inside Pakistan’s Military Economy’ नामक पुस्तक की लेखिका आयशा ने ये बातें कहीं। वह पाकिस्तान के सैन्य मामलों की जानकर मानी जाती हैं और कई अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों में पढ़ा चुकी हैं।

आयशा ने बताया कि वह पाक अधिकृत कश्मीर में रह रहे अपने एक मित्र से बात कर रही थीं। उन्होंने अपने मित्र से पूछा कि आखिर पाकिस्तान की सेना लड़ाई क्यों नहीं कर रही? आयशा के मित्र ने प्रत्युत्तर में कहा कि पाकिस्तानी सेना भी जानती है कि अगर भारत से लड़ाई हुई तो पाक की बुरी हार होगी। आयशा के अनुसार, पाकिस्तान का हर व्यक्ति जनता है कि भारत से युद्ध करने का यह सही समय नहीं है।

पाकिस्तानी नौसेना के नेवल रीसर्च के डायरेक्टर (पहली महिला जो इस पद पर पहुँची थीं) के रूप में कार्य कर चुकीं आयेशा सिद्दीका के अनुसार, यह पहली बार है जब पाकिस्तान का बच्चा-बच्चा जानता है कि युद्ध लड़ना संभव नहीं है। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान में एक प्रकार का दुःख है, दर्द है, लेकिन एक निराशा का भाव भी है कि कुछ नहीं किया जा सकता। अब देखना यह है कि पाकिस्तानी फौज किस तरह की प्रतिक्रिया देती है?

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विभिन्न विषयों पर कई अख़बारों में लेख लिख चुकीं आयशा ने बताया कि 72 वर्षों से पाक फौज का ध्यान सिर्फ़ और सिर्फ़ जम्मू कश्मीर पर था। उन्होंने कहा कि एक दिन पाकिस्तानी फौज नींद से जागी और उसे पता चला कि कुछ भी नहीं बचा है। हालाँकि, आयशा का यह भी मानना है कि पाक फौज के भीतर एक गुट ऐसा है जो काफ़ी गुस्से में है और वह ज़रूर ऊँगली उठाएगा।

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में हार के बाद पाकिस्तान बौखलाया हुआ है और देश के सजग नागरिकों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। ऐसा इसीलिए, क्योंकि सजग नागरिक कश्मीर पर पाकिस्तान सरकार की असफलता पर सवाल उठाएँगे। फिलहाल लंदन की एक यूनिवर्सिटी में रिसर्च एसोसिएट के तौर पर काम कर रहीं आयशा ने पाकिस्तान द्वारा निर्दोष पश्तूनों पर अत्याचार करने और आतंक को काबू में करने में असफल रहने का आरोप लगाया।

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