जब मुसलमान कहीं कमजोर हो जाते हैं, तो जिहाद अनिवार्य हो जाता है: मौलवी ने किया जिहाद का ऐलान

“जब मुसलमान कहीं भी कमजोर हो जाते हैं, तो जिहाद उनके लिए अनिवार्य हो जाता है। भारत के इस फैसले से हमारे कश्मीरी भाई, बहन और माताएँ प्रभावित हुईं हैं। अगर आपके पास (भारत के खिलाफ) लड़ने की हिम्मत नहीं है, तो आप हारते रहेंगे।”

एक ओर जहाँ पाकिस्तान आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर मुद्दे को लेकर सभी मोर्चों पर लड़खड़ा रहा है। कोई देश इस मुद्दे पर उसका साथ देने के लिए तैयार नहीं है। वहीं इस्लामाबाद अभी भी भारत के खिलाफ जिहाद का खुलेआम आह्वान कर अपना प्रोपेगेंडा फैलाने में लगा हुआ है।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें गुलाम कश्मीर (PoK) में एक मौलवी भीड़ को संबोधित करते हुआ दिख रहा है। वह भीड़ से जम्मू कश्मीर पर भारत के फैसले के मद्देनजर जिहाद और धर्म युद्ध का आह्वान करने की बात कर रहा है। वह कहता है, “जब मुसलमान कहीं भी कमजोर हो जाते हैं, तो जिहाद उनके लिए अनिवार्य हो जाता है। भारत के इस फैसले से हमारे कश्मीरी भाई, बहन और माताएँ प्रभावित हुईं हैं। अगर आपके पास (भारत के खिलाफ) लड़ने की हिम्मत नहीं है, तो आप हारते रहेंगे।”

मौलवी ने पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल क़मर जावेद बाजवा को जिहाद की सेना की ड्यूटी को पूरा नहीं करने की बात कही। जब मौलवी लोगों को संबोधित कर रहा था तो भीड़ ‘भारत का एक ही इलाज अल-जिहाद, अल-जिहाद, अल-जिहाद’ के नारे लगा रही थी। भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने का आह्वान यहींं पर समाप्त नहीं होता है। हाल ही में, खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री महमूद खान ने कहा कि अगर कश्मीर के लिए औपचारिक रूप से जिहाद की घोषणा कर दी जाए तो वह सबसे आगे रहकर इसका नेतृत्व करेंगे। 

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भारत बार-बार पाकिस्तान से कहता रहा है कि वह अपनी जमीन पर पनप रहे और सक्रिय आतंकवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई करें। वहीं, जम्मू-कश्मीर पर भारत सरकार के फैसले से बौखलाए पाकिस्तान ने लाख कोशिश की कि इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बनाया जाए। लेकिन, उसे हर जगह से हार का ही सामना करना पड़ा। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने स्पष्ट कर दिया है कि कश्मीर मुद्दा भारत का आंतरिक मामला है। इसके बाद से इस्लामाबाद को भारी झटका लगा है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश ने कहा, “हम जानते हैं कि पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद का इस्तेमाल करता है। ये उसकी नीति रही है। हर बार हमने उन्हें अपनी चिंताओं से अवगत कराया है। यह उनके लिए (पाकिस्तान) महत्वपूर्ण है कि वे एक सामान्य पड़ोसी की तरह व्यवहार करना शुरू करें।”

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