पाक नेता रहमान मालिक ने पुराने वीडियो से J&K का माहौल बिगाड़ना चाहा, पुलिस ने फेल किया एजेंडा

जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक यह वीडियो 2018 का है, जब सुरक्षा बलों और जिहादियों के बीच चल रही फायरिंग की चपेट में आकर एक घर में आग लग गई थी, और 6 सिविलियन्स की जान चली गई थी।

जम्मू-कश्मीर मामले में पाकिस्तान फ्रस्ट्रेशन का शिकार हो रहा है। न ही उसका मुस्लिम ब्रदरहुड ‘उम्मा’ मदद के लिए आ रहा है, न ही अमेरिका या और कोई पश्चिमी देश- यहाँ तक कि चीन ने भी गच्चा दे दिया है। हिंदुस्तान से सीधी लड़ाई तो उसके औकात से ही बाहर की चीज़ है। इसीलिए अब पाकिस्तान फेक न्यूज़ फैला कर हिंदुस्तान के भीतर ही अस्थिरता लाने की कोशिश कर रहा है।

इसी कोशिश में पाकिस्तान के अंदरूनी मामलों के पूर्व मंत्री रहमान मलिक ने एक पुराने वीडियो के ज़रिए भारतीय सेना के खिलाफ प्रोपेगंडाबाज़ी करने की कोशिश की।

इस वीडियो में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और संयुक्त राष्ट्र को टैग कर रहमान दावा कर रहे हैं कि भारतीय सुरक्षा बल जम्मू-कश्मीर के गाँवों पर हमला करने के लिए गनशिप हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कथित ‘बहादुर कश्मीरियों’ की संचार ब्लैकआउट के दौरान भी वीडियो बना-बना कर भेजने के लिए तारीफ़ की है

राज्य पुलिस: ‘फेक न्यूज़; हमने ट्विटर को कर दिया है इत्तला’

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जम्मू-कश्मीर पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल ने रहमान मलिक के प्रोपेगंडा गुब्बारे में पिन चुभोते हुए खुलासा किया कि जो वीडियो वह बाँट रहे हैं, वह एक बम धमाके का पुराना वीडियो है, जिसे रहमान अभी का बता रहे हैं। साथ ही राज्य पुलिस ने ट्विटर को भी रहमान मलिक के उनके प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से फेक न्यूज़ फ़ैलाने की इत्तला दे दी है।

जम्मू-कश्मीर पुलिस के मुताबिक यह वीडियो 2018 का है, जब सुरक्षा बलों और जिहादियों के बीच चल रही फायरिंग की चपेट में आकर एक घर में आग लग गई थी, और 6 सिविलियन्स की जान चली गई थी। कुलगाम के उपर्युक्त घर में पड़े ज़िंदा बम में आग लगने से विस्फ़ोट हो गया था

जब यह घटना हुई थी, उसी समय पुलिस ने लोगों को सर्च ऑपरेशन खत्म होने तक उस जगह से दूर रहने की हिदायत दी थी। लेकिन सिविलियन्स ने उनकी बात नहीं सुनी थी, और इलाके में घुस आए थे। लिहाजा जब आग से बम में धमाका हुआ तो कुछ लोग उसकी चपेट में आ गए थे।

कल भी झूठ फैलाने की हुई थी कोशिश

कल भी पाकिस्तानी पत्रकार-कम-प्रोपेगंडाबाज़ वजाहत एस खान ने ट्विटर पर झूठा प्रोपेगंडा फैलाने की कोशिश की थी कि कश्मीर पुलिस के मुसलमान कर्मी ने CRPF जवानों की गोली मारकर हत्या कर दी है। इस प्रोपेगंडा के खिलाफ न केवल कश्मीर के पूर्व डीजीपी ने मीडिया से बात करते हुए इसे झूठा बताया, बल्कि CRPF के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से भी इसका खंडन किया गया है।

यह पाकिस्तान और उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI की साइबर युद्धनीति का हिस्सा है, जिससे हिंदुस्तान में, और खासकर सुरक्षा बलों में, तनाव भड़का कर शांति भंग किया जा सके।

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