EU की संसद में CAA के खिलाफ प्रस्ताव लाने में POK मूल के शफ्फाक मोहम्मद का हाथ, भारत ने जताई आपत्ति

यूरोपीय संघ की संसद में CAA के खिलाफ प्रस्ताव लाने की रिपोर्टों पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा था कि यह हमारा आंतरिक मामला है। इस कानून को संसद के दोनों सदनों में बहस के बाद उचित प्रक्रिया और लोकतांत्रिक तरीके से लागू किया गया है।

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध भारत में कई स्थानों पर हो रहा है, लेकिन अब दूसरे देश भी इसमें दखल देने की कोशिश करने लगे हैं। यूरोपीय संघ की संसद में CAA के खिलाफ प्रस्ताव पेश हुआ है। इस पर 29 जनवरी को बहस होगी और 30 जनवरी को वोटिंग भी होगी।

जानकारी के मुताबिक इसके पीछे यूके के सांसद शफ्फाक मोहम्मद का दिमाग है, जो कि मूल रूप से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) का रहने वाला है। बता दें कि POK में मीरपुर का निवासी शफ्फाक मोहम्मद 2019 से यूरोपियन पार्लियामेंट का सदस्य है। उसे शेफिल्ड सिटी काउंसिल के काउंसिलर के तौर पर ‘राजनीतिक सेवा’ के लिए 2015 में मेंबर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एंपायर का खिताब दिया गया था। यूरोपियन पार्लियामेंट में कुल 751 सांसद हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से 154 सांसदों ने प्रस्ताव का समर्थन किया है। हालाँकि, यूरोपियन पार्लियामेंट के प्रस्ताव यूरोपियन कमिशन के लिए बाध्यकारी नहीं होते हैं।

इससे पहले यूरोपीय संघ की संसद में CAA के खिलाफ प्रस्ताव लाने की रिपोर्टों पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए कहा था कि यह हमारा आंतरिक मामला है। इस कानून को संसद के दोनों सदनों में बहस के बाद उचित प्रक्रिया और लोकतांत्रिक तरीके से लागू किया गया है। इसलिए यूरोपीय संघ की संसद को ऐसे कोई कदम नहीं उठाने चाहिए, जो लोकतांत्रिक रूप से चुने गए सांसदों के अधिकारों एवं प्रभुत्व पर सवाल खड़े करे। हम उम्मीद करते हैं कि CAA को लेकर आगे बढ़ने से पहले एक बार फिर विचार करेंगे और हमसे संपर्क करेंगे, ताकि उन्हें तथ्यों की पूर्ण और सटीक जानकारी मिल सके।

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भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच अगला सम्मेलन जल्द ही ब्रसल्स में होने वाला है। भारत-पाकिस्तान मामलों एवं यूके की राजनीति के जानकार शफ्फाक मोहम्मद के पीछे पाकिस्तान सरकार का हाथ होने से भी इनकार नहीं कर रहे हैं। यूरोपीय संसद के 154 सांसदों ने प्रस्ताव में कहा है कि CAA के कारण दुनिया में नागरिकता का सबसे बड़ा संकट पैदा हो जाएगा और बड़े पैमाने पर लोगों को इसका दंश झेलना पड़ेगा।

वहीं भारत सरकार का कहना है कि नया कानून किसी की नागरिकता छीनता नहीं है, बल्कि इसे पड़ोसी देशों में उत्पीड़न का शिकार हुए अल्पसंख्यकों की रक्षा करने और उन्हें नागरिकता देने के लिए लाया गया है।

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