Friday, September 17, 2021
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उज्ज्वला योजना के कारण श्वाँस रोगों में 20% की कमी, LPG से आ रहा बड़ा बदलाव: Research

हानिकारण गैसों की चपेट में आने के कारण इन बच्चों की फेंफड़े व श्वाँस की नली कमज़ोर पाई गई। कुल रोगियों में से 36,476 ऐसे थे, जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम थी। अर्थात, ये सभी किशोर एवं बच्चे थे। जहाँ कुकिंग गैस का प्रयोग होता है, वहाँ नए श्वाँस रोगी नहीं मिले। ऐसी जगहों पर पुराने रोगियों में भी सुधार पाया गया।

जैसा कि सर्वविदित है, उज्ज्वला गैस योजना के आने के बाद से महिलाओं को मिट्टी के चूल्हे पर खाना बनाने से मुक्ति मिली और घर-घर में रसोई गैस पहुँचा। इससे महिलाओं का कामकाज आसान होने के सिवा और भी कई बड़े फायदे हुए हैं, जिन पर लोगों का ध्यान नहीं गया। कई विशेषज्ञों ने विधानसभा व लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में भाजपा की बड़ी जीत का श्रेय भी उज्ज्वला योजना को ही दिया। अब उज्ज्वला के एक ऐसे फायदे के बारे में पता चला है, जो एक रिसर्च के बाद सामने आया है। इसनें स्वास्थ्य में भी योगदान दिया है। जहाँ-जहाँ एलपीजी का प्रयोग होता है, वहाँ श्वाँस रोगियों की संख्या में 20% कमी पाई गई।

एलपीजी गैस का प्रयोग बढ़ने के कारण 2.05 लाख मरीजों की रोग विवरण रिपोर्ट पर ‘इंडियन चेस्ट सोसाइटी (ICS)’ और ‘चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन (CRF)’ ने 2 साल की पड़ताल के बाद यह पाया है कि जिस रसोई में एलपीजी पहुँची है, वहाँ श्वाँस रोग और अन्य बीमारियाँ 20% तक घटी हैं। वर्ष 2016 में 880 शहर व कस्बों में 13,500 डॉक्टरों ने ओपीडी में आए 2.05 लाख रोगियों के मर्ज के आधार पर वर्गीकरण किया था। उसी वर्ष मई में एलपीजी योजना का भी शुभारम्भ हुआ। इसके बाद जहाँ-जहाँ एलपीजी पहुँची, वहाँ बड़ा बदलाव देखने को मिला।

इसके बाद सभी रोगियों का उनके विवरणों के आधार पर क्षेत्रवार विश्लेषण किया गया। क्षेत्रों को इस प्रकार बाँटा गया- एक जहाँ एलपीजी पहुँची थी, और दूसरी जहाँ एलपीजी नहीं पहुँची थी। इसके अलावा एलपीजी के प्रयोग के आधार पर भी विश्लेषण किया गया। इससे पता चला कि जहाँ एलपीजी का प्रयोग कम है, वहाँ श्वाँस रोग से पीड़ित मरीजों की संख्या ढाई गुना ज्यादा निकली। जहाँ एलपीजी नहीं है, वहाँ जलावन के लिए लकड़ी वगैरह का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे, ख़ासकर 5 वर्ष से कम उम्र के, हानिकारक गैसों की चपेट में पाए गए।

हानिकारण गैसों की चपेट में आने के कारण इन बच्चों की फेंफड़े व श्वाँस की नली कमज़ोर पाई गई। कुल रोगियों में से 36,476 ऐसे थे, जिनकी उम्र 18 वर्ष से कम थी। अर्थात, ये सभी किशोर एवं बच्चे थे। जहाँ कुकिंग गैस का प्रयोग होता है, वहाँ नए श्वाँस रोगी नहीं मिले। ऐसी जगहों पर पुराने रोगियों में भी सुधार पाया गया। रिसर्च में एक और भयावह बात मिली। डॉक्टरों ने बताया कि जहाँ एलपीजी गैस का प्रयोग नहीं होता है, वहाँ बच्चों के फेंफड़े काले होते हुए पाए गए। इसका कारण यह भी है कि महिलाएँ जब खाना बनती हैं तो बच्चे भी आसपास ही रहते हैं।

जहाँ एलपीजी का प्रयोग नहीं होता है, वहाँ कौन सी बीमारियाँ कितनी संख्या में पाई गईं:

बीमारीपीड़ितों की संख्याप्रतिशत
श्वाँस सम्बन्धी10375250.6
बुखार7278535.5
पाचन तंत्र सम्बन्धी5132425
संक्रामक लक्षण2560912.5
त्वचा सम्बन्धी185069
एंडोक्राइन डिसआर्डर 13580
6.6

(ध्यान दें: बीमार लोगों का प्रतिशत जोड़ने पर 100 के पार जा रहा है क्योंकि एक व्यक्ति को एक से ज्यादा बीमारी भी हो सकती है।)

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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