NIA और UAPA एक्ट में संशोधन: अब ‘लोन वुल्फ’ आतंकी भी नहीं बचेंगे

ऐसे लोग किसी आतंकी संगठन में तो शामिल नहीं होते थे लेकिन वो सभी काम करते थे जो एक आतंकी संगठन के माध्यम से किया जा सकता है। ऐसे व्यक्तियों को 'लोन वुल्फ' की संज्ञा दी जाती थी। अब उन पर नकेल कसी जा सकेगी।

केंद्रीय कैबिनेट ने नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। ताज़ा निर्णय के बाद एनआईए के हाथ और मज़बूत हो जाएँगे। आतंकवाद की रोकथाम के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने 2 क़ानूनों में संशोधन को मंज़ूरी प्रदान कर दी है। कैबिनेट ने ग़ैरक़ानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) में संशोधन को मंजूरी दी है, जिससे आतंकवादी गतिविधि से जुड़े व्यक्तियों को भी आतंकी घोषित किया जा सकेगा। इसके अलावा एनआईए क़ानून में भी संशोधन को मंजूरी दे दी गई है। इससे एजेंसी और सशक्त बनेगी। इस संशोधन के बाद से जाँच एजेंसी भारत से बाहर भी अगर भारतीय हितों या नागरिकों को नुक़सान पहुँचता है तो मामला दर्ज कर कार्रवाई कर सकती है।

कोई भी व्यक्ति जो आतंकी गतिविधियों में संलिप्त होगा, उसे आतंकी घोषित कर प्रतिबंधित किया जा सकेगा। दोनों ताज़ा संशोधनों से जुड़े विधेयक को इसी सत्र में पेश किए जाने की उम्मीद है। मौजूदा समय में सिर्फ़ आतंकी गतिविधियों में संलिप्त संगठनों को ही प्रतिबंधित किया जा सकता है। एनआईए को साइबर अपराध और मानव तस्करी से जुड़े मुद्दे भी देने की बात कही जा रही है। 2008 में हुए मुंबई हमलों के बाद गठित एनआईए को अभी तक सिर्फ़ आतंक सम्बंधित गतिविधियों की जाँच का ही अधिकार प्राप्त हैं। व्यक्तिगत रूप से आतंकी गतिविधियाँ संचालित करने वालों को आतंकी घोषित कर प्रतिबंधित करने का भी अब तक प्रावधान नहीं था।

ऐसे लोग किसी आतंकी संगठन में तो शामिल नहीं होते थे लेकिन वो सभी काम करते थे जो एक आतंकी संगठन के माध्यम से किया जा सकता है। ऐसे व्यक्तियों को ‘लोन वुल्फ’ की संज्ञा दी जाती थी। अब उन पर नकेल कसी जा सकेगी। अब अगर किसी व्यक्ति को आतंकी घोषित किया जाता है तो उसके साथ वित्तीय लेनदेन करने वालों पर शिकंजा कसना आसान हो जाएगा। इससे आईएसआईएस और अलकायदा जैसे आतंकी संगठनों से प्रेरित हो कर आतंक का दामन थामने वालों पर कार्रवाई की राह और ज्यादा आसान हो जाएगी। बता दें कि मानव तस्करी और साइबर आतंक ऐसे मामले होते हैं, जिसके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लिंक जुड़े होते हैं।

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नए संशोधन के बाद एनआईए को किसी भी राज्य में सर्च के लिए वहाँ के शीर्ष पुलिस अधिकारी की अनुमति लेने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। हालाँकि, अभी भी एनआईए को ऐसी कार्रवाई के लिए अनुमति की ज़रूरत नहीं पड़ती लेकिन क़ानून व्यवस्था ख़राब होने की स्थिति में ऐसा करना होता है। बता दें कि संयुक्त राष्ट्र का क़ानून भी व्यक्तियों को आतंकी घोषित करने की अनुमति देता है और यह आशा करता है कि सभी देशों का क़ानून इसके अनुरूप हो। इससे आतंकी घोषित किए गए व्यक्ति की यात्रा और आवागमन पर ज़रूरी नियंत्रण रखा जा सकता है या उसे प्रतिबंधित किया जा सकता है।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के गृह मंत्री बनने के बाद जम्मू कश्मीर और राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर अहम निर्णय लिए जाने की पहले से ही उम्मीद थी। हाल ही में जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी कह दिया है कि अगर आतंकी गोली चलाते हैं तो सेना हाथ पर हाथ धरे बैठे नहीं रहेगी। अमित शाह ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था व अन्य मामलों के सम्बन्ध में राज्यपाल के साथ बैठक भी की थी। एनआईए अभी राज्य के अलगावादियों से जुड़े टेरर फंडिंग की जाँच कर रही है, जो अभी निर्णायक मोड़ पर है।

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