अब साल में 100 दिन परिवार के साथ गुजार सकेंगे सशस्त्र बलों के जवान: गृहमंत्री के निर्देश के बाद कवायद शुरू

गृह मंत्रालय ने बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एनएसजी, एसएसबी, सीआईएसएफ और असम राइफल्स के डीजी को इस सम्बन्ध में पत्र लिख कर इसकी रूपरेखा बनाने का निर्देश दिया है।

देश के गृहमंत्री अमित शाह ने सभी केन्दीय सशस्त्र बलों को परिवार के साथ समय व्यतीत करने के लिए प्रतिवर्ष 100 दिन देने की बात कही है। शाह ने कहा है कि केंद्रीय सशस्त्र बलों के सभी जवानों की तैनाती का विवरण डिजिटल किया जाए और इसके लिए एक ऐप का सहारा लिया जाए। विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय गृहमंत्री के इस मानवीय ऐलान के बाद लाखों सशस्त्र बलों के जवानों को फ़ायदा मिलेगा। असम राइफल्स के जवान भी इसमें शामिल हैं। सभी केंद्रीय सशस्त्र बलों के डायरेक्टर जनरलों को शाह ने ऐसा सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

गृह मंत्रालय के एक प्रेजेंटेशन के दौरान अमित शाह ने ये बातें कहीं। इस दौरान उन्होंने जवानों द्वारा सामना किए जाने वाली कठिन चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी तैनाती घर से काफ़ी दूर होने की वजह से उन्हें अपने परिजनों के साथ समय व्यतीत करने का मौक़ा नहीं मिल पाता। शाह ने इस दौरान सुझाव दिया कि एक वेब एप्लीकेशन की मदद से सभी जवानों की तैनाती का विवरण डिजिटल किया जाए, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि उन्हें प्रतिवर्ष 100 दिन मिल रहे हैं। इन तैनातियों के दौरान वे अपने परिवार के साथ समय बीता सकते हैं।

अमित शाह ने सभी केंद्रीय सशस्त्र बलों के डायरेक्टर जेनेरेल्स को कहा है कि इस कार्य के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन की ज़रूरतों का खाका खींचा जाए और गृह मंत्रालय को इससे अवगत कराया जाए। उन्होंने आज के पेपर फॉर्मेट की जगह डिजिटल पर जोर देते हुए कहा कि ऐसा होने से मुख्यालय को यह देखने में आसानी रहेगी कि जवानों की तैनाती का रोटेशन इस प्रकार से हो रहा है या नहीं, जिससे वे प्रतिवर्ष 100 दिन अपने परिवार के साथ व्यतीत कर सकें। इस सम्बन्ध में गृह मंत्रालय ने 10 अक्टूबर को सभी सशस्त्र बलों के उच्चाधिकारियों को पत्र लिख कर निर्देश दिया है।

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गृह मंत्रालय ने बीएसएफ, सीआरपीएफ, आईटीबीपी, एनएसजी, एसएसबी, सीआईएसएफ और असम राइफल्स के डीजी को इस सम्बन्ध में पत्र लिख कर इसकी रूपरेखा बनाने का निर्देश दिया है। ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की ख़बर के अनुसार, एक सीआरपीएफ के जवान ने बताया कि फिलहाल उन्हें प्रतिवर्ष मुश्किल से 75 दिन अपने परिवार के साथ व्यतीत करने के लिए मिलते हैं। अगर वीकेंड की छुट्टियों को हटा दें तो उन्हें 60 दिन का ‘Earned Leave’ व और 15 दिनों का ‘Casual Leave’ मिलता है।

इसके अलावा जवानों को उनके बच्चे का जन्म होने पर 15 दिन का पैटरनल लीव दिया जाता है। दूसरे बच्चे के जन्म होने पर भी इन छुट्टियों का लाभ उठाया जाता है। अगर अमित शाह के निर्देशों का पालन किया जाता है तो जवानों को अभी के मुक़ाबले अपने परिवार के साथ समय व्यतीत करने के लिए 25% ज्यादा समय मिलेगा। इससे जवानों को होने वाले तनाव को कम करने में भी मदद मिलेगी।

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