बालाकोट के बाद वो लड़ाई जो भारतीय नौसेना ने लड़ी: कहानी गायब पाकिस्तानी सबमरीन की

भारतीय नौसेना के आक्रामक रुख से डरे पाकिस्तान ने अपनी नौसेना को मकरन तट तक ही सीमित रखा। उसे खुले समुद्र में निकलने की हिम्मत ही नहीं हुई। ये वो 'लड़ाई' थी, जो दुनिया की नज़रों से परे चली।

बालाकोट में भारतीय वायुसेना द्वारा एयर स्ट्राइक किए जाने के बाद कई ऐसी घटनाएँ हुईं, जो आमजनों की नज़र से तो दूर रहीं लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में इन घटनाओं ने भारत की रणनीति पर असर डाला। पुलवामा हमले के तुरंत बाद भारत ने अपनी नौसेना को उस दौरान चल रही एक एक्सरसाइज से हटा लिया और इसे पाकिस्तान नियंत्रित जलक्षेत्र के आसपास लगा दिया। इसमें न्यूक्लियर कन्वेंशनल सबमरीन्स भी शामिल थे। भारतीय नौसेना के इस आक्रामक एक्शन से पाकिस्तान को ऐसा लगा था कि भारत पानी के रास्ते कोई कार्रवाई कर पुलवामा में वीरगति को प्राप्त 40 जवानों का बदला ले सकता है।

भारत ने पाकिस्तान की सेना के क्रियाकलापों पर कड़ी नज़र रखी थी लेकिन फिर भी हमारी वायुसेना ने पाया कि पाकिस्तान का सबसे एडवांस सबमरीन पीएनएस साद अचानक से गायब हो गया। पीएनएस साद अगोस्टा क्लास सबमरीन है। दरअसल, ऐसा पाकिस्तान ने जानबूझ कर किया था। पाक ने ‘Air Independent Propulsion’ तकनीक का प्रयोग कर के ऐसा किया था। इस तकनीक का प्रयोग कर के कोई एडवांस सबमरीन किसी नॉर्मल सबमरीन के मुक़ाबले काफ़ी ज्यादा देर तक पानी के भीतर रह सकता है। इसके बाद भारतीय नौसेना पाकिस्तान द्वारा किसी भी प्रकार की कार्रवाई की संभावना को लेकर ख़ुद को तैयार कर रही थी।

एएनआई में अजीत के दूबे के लेख के अनुसार, कराची में जिस आखिरी लोकेशन से पीएनएस साद गायब हुआ था, वहाँ से उसे गुजरात के तटीय स्थल तक पहुँचने में 3 दिन लगते और अगर वो मुंबई स्थित वेस्टर्न फ्लीट के मुख्यालय तक पहुँचने की चेष्टा करता तो उसे 5 दिन लगते। अगर सच में ऐसा होता तो यह देश की सुरक्षा के लिए ख़तरा हो सकता है, इसीलिए नौसेना ने सभी तैयारियाँ शुरू कर दी थीं। एंटी-सबमरीन वारफेयर स्पैशलिस्ट वॉरशिप्स और एयरक्राफ्ट्स को तैनात कर दिया गया था, ताकि गायब पाकिस्तानी पीएनएस साद की स्थिति का पता लगाया जा सके।

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जहाँ-जहाँ उसके जाने की आशंका थी, वहाँ-वहाँ नौसेना ने नज़र रखनी शरू कर दी। अगर उसने भारतीय जलक्षेत्र में प्रवेश किया (ऐसा सोच कर) तो उसे बाहर लाने के लिए हरसंभव कार्रवाई की गई। गुजरात और महाराष्ट्र के तटीय क्षेत्रों पर ख़ास निगरानी रखी गई। स्कॉर्पीन क्लास सबमरीन आईएनएस कलवरी को भी इस कार्य के लिए लगाया गया और नौसेना ने हर वो कोशिशें की, जिससे पाकिस्तान को एहसास हो जाए की भारतीय जलक्षेत्र में उसने कोई भी गड़बड़ी की तो उसे उसका खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा। पीएनएस साद को खोजने के लिए सैटेलाइट्स का भी प्रयोग किया गया और जब कुछ दिन बीत गए तब नौसेना को लगा कि इसे पाकिस्तान द्वारा जानबूझ कर छिपाया गया है।

21 दिनों के बाद भारतीय नौसेना ने पीएनएस साद को पाकिस्तान के पश्चिमी क्षेत्र में लोकेट किया। इसे पाकिस्तान ने इसीलिए छिपाया था, ताकि बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद उत्पन्न हुई युद्ध वाली परिस्थितियों में सही समय पर इसका प्रयोग किया जा सके। जैसे ही तनाव बढ़ा, भारत ने उत्तरी अरब सागर में 60 वॉरशिप तैनात कर दिए थे, जिसमें एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रमादित्य भी शामिल था। भारतीय नौसेना के आक्रामक रुख से डरे पाकिस्तान ने अपनी नौसेना को मकरन तट तक ही सीमित रखा। उसे खुले समुद्र में निकलने की हिम्मत ही नहीं हुई। ये वो ‘लड़ाई’ थी, जो दुनिया की नज़रों से परे चली।

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