AN-32 में मारे गए सैनिकों के पार्थिव शरीर लाने गई 12-सदस्यीय टीम खुद फँसी, राशन हो रहा खत्म

"सबसे बड़ी समस्या तेजी से घटता राशन है। 12 जून को हेलीकॉप्टर से उतरते समय बचाव दल के पास 15-20 दिनों का राशन था। इस बारिश में एयरलिफ्टिंग असम्भव है। अगर बारिश शनिवार-रविवार तक नहीं रुकी तो मामला बिगड़ सकता है।"

AN-32 हादसे में मारे गए सैनिकों के पार्थिव शरीर लाने गया 12-सदस्यीय बचाव दल खुद ही अपनी ज़िंदगी के लिए इस समय संघर्ष कर रहा है। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने जानकारी दी है कि वे खराब मौसम में एक पहाड़ी पर फँस गए हैं, जहाँ से उन्हें न तो वायु सेना हेलीकॉप्टरों की मदद से एयरलिफ्ट कर सकती है और न ही वह खुद बारिश के कारण खतरनाक हो गए रास्ते पर पूरे दिन भर की जोखिम-भरी ट्रेकिंग कर के निकटतम गाँव तक पहुँच सकते हैं।

हालात ये हैं कि उनके पास राशन भी समाप्त होने वाली है और अपनी पोजीशन पर बने रहने पर उन्हें पहाड़ों की बारिश वाली ठंड, कीड़े-मकौड़ों और जहरीले साँपों का खतरा है। यह दल 3 जून को हुए AN-32 विमान हादसे में मारे गए वायु सैनिकों के पार्थिव शरीर लाने गया हुआ था।

दो शिकारी और एक पर्वतारोही हैं दल में शामिल

बचाव दल में नौ वायु सैनिकों के अलावा एक एवरेस्ट का पर्वतारोही और दो स्थानीय शिकारी भी शामिल हैं। रक्षा मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने शुक्रवार (जून 29, 2019) को बताया कि अरुणाचल प्रदेश के सियांग जनपद में 15 दिन पहले पहुँचे बचाव दल को एयरलिफ्ट करने के लिए सभी कोशिशें जारी हैं। हेलीकॉप्टरों को पास ही के आलो स्थित एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड (एएलजी) पर लगातार स्टैंड-बाई पर रखा जा रहा है और ऑपरेशन की मॉनिटरिंग पश्चिमी सियांग से की जा रही है। दल के पास केवल एक सैटलाइट फ़ोन चालू हालत में है।

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जिले के सूचना और जनसम्पर्क अधिकारी गिजुम ताली ने रक्षा मंत्रालय की बात की पुष्टि करते हुए यह भी जोड़ा है कि जो फोन चालू है, उसमें भी नेटवर्क बहुत ज्यादा नहीं आ रहा है। उन्हें नेटवर्क के लिए अधिक ऊँचे और खुले स्थान पर जाना पड़ता है, इस वजह से सम्पर्क तभी किया जा रहा है जब अति आवश्यक हो। इस समय बचाव दल परी आदि पहाड़ी की 12,000 फीट से ज्यादा की ऊँचाई की चोटी पर टेंट लगाए हुए है। बारिश की वजह से पहाड़ी से नीचे उतरना खतरनाक हो सकता है क्योंकि ज़मीन ज्यादा फिसलन भरी हो गई है। गिजुम ताली ने यह भी बताया कि उन्हें शनिवार या रविवार को मौसम में सुधार होने की उम्मीद के आशय वाली रिपोर्टें मिली हैं। मौसम साफ़ होते ही अविलम्ब बचाव-अभियान चालू हो जाएगा।

घटता राशन, करनी पड़ सकती है जानलेवा ट्रेकिंग

अधिकारी गिजुम ताली के अनुसार, हालाँकि सबसे बड़ी समस्या तेजी से घटता राशन है। 12 जून को हेलीकॉप्टर से क्रैश साइट पर उतरते समय बचाव दल के पास 15-20 दिनों का राशन था। लेकिन इस बारिश में पूर्व-निर्धारित हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्टिंग करना असम्भव है। अगर बारिश आज-कल (शनिवार-रविवार) में नहीं रुकी तो मामला बिगड़ सकता है। ताली ने बताया कि अगर बारिश नहीं रुकी और राशन खत्म हो गया और बचाव दल को कई पहाड़ों की ट्रेकिंग करते हुए नीचे निकटतम गाँव गाते तक जाने का जोखिम उठाना पड़ सकता है। यह एक पूरे दिन भर का रास्ता है। ताली ने जोड़ा कि एक अच्छी बात यह है कि दल में शामिल दोनों शिकारी स्थानीय मौसम और भौगोलिक स्थिति से वाकिफ होने के अलावा दक्ष ट्रेकिंग गाइड भी हैं।

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