Sunday, September 26, 2021
Homeदेश-समाजमहाराष्ट्र के धुले से लेकर यूपी के कानपुर तक, किसान ऐसे कर रहे हैं...

महाराष्ट्र के धुले से लेकर यूपी के कानपुर तक, किसान ऐसे कर रहे हैं कृषि बिलों का समर्थन

“हम सरकार के इस विधेयक का स्वागत करते हैं। लेकिन सरकार को किसानों के बारे में और सोचने की ज़रूरत है। सरकार का प्रयास होना चाहिए कि खरीद की प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका ख़त्म हो जाए। सरकार को आने वाले समय में यह भी सुनिश्चित करना होगा कि किसान आत्महत्या जैसे कदम न उठाए।”

कृषि सुधार बिलों पर कॉन्ग्रेस इकोसिस्टम का प्रोपेगेंडा छिपा नहीं है। किसानों के नाम पर सड़क से संसद तक हंगामा करने की कोशिशों के बीच इस बिल करे अलग-अलग हिस्सों के कृषकों का समर्थन मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के कानपुर से लेकर महाराष्ट्र के धुले तक, किसानों का स्पष्ट तौर पर कहना है कि वे सरकार के इस कदम का स्वागत करते हैं। 

उत्तर प्रदेश स्थित कानपुर के एक किसान ने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए इस मुद्दे पर अपना विचार रखा। उन्होंने कहा, “हम सरकार के इस विधेयक का स्वागत करते हैं। लेकिन सरकार को किसानों के बारे में और सोचने की ज़रूरत है। बेशक सरकार का यह कदम किसानों के हित के लिए ही उठाया गया है और हम इसके लिए सरकार का समर्थन करते हैं। सरकार का प्रयास होना चाहिए कि खरीद की प्रक्रिया में बिचौलियों की भूमिका ख़त्म हो जाए। इसके अलावा सरकार को आने वाले समय में यह भी सुनिश्चित करना होगा कि किसान आत्महत्या जैसे कदम न उठाए।”

इसके बाद किसान ने कहा, “फ़िलहाल जिस तरह के हालात हैं उसमें आधे से ज़्यादा मुनाफ़ा बिचौलियों को होता है। हम उम्मीद करते हैं कि कृषि सुधार विधेयक की मदद से इसे रोकने में मदद मिलेगी। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि अगर ऐसी गतिविधियों पर रोक नहीं लगती है तो आने वाले पीढ़ियाँ इस पेशे में आगे नहीं बढ़ेंगी। इसके लिए यह बेहद ज़रूरी है कि सरकार के बनाए गए नियमों का सख्ती से पालन हो। हमारा सरकार से एक और निवेदन है कि किसानों को कम से कम उनकी लागत का भुगतान किया जाए।” 

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के अलावा महाराष्ट्र के धुले जिले में भी किसानों ने इस विधेयक का स्वागत किया। उनका कहना है कि हम सरकार के इस विधेयक को स्वीकार करते हैं, लेकिन सरकार को कई बातें सुनिश्चित करनी होंगी। जिसमें सबसे अहम है कि किसानों की आत्महत्या का आँकड़ा कम से कम किया जाए। यह पूरी तरह सरकार की ज़िम्मेदारी है कि अन्नदाता को ज़्यादा से ज़्यादा मुनाफ़ा हो और उन्हें सशक्त बनाया जाए।    

रविवार (सितंबर 20, 2020) को कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सरलीकरण) विधेयक-2020, कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को उच्च सदन ने ध्वनिमत से पारित कर दिया था

विधेयक पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृषि सुधार संबंधी विधेयकों को ‘ऐतिहासिक’ करार दिया था। उन्होंने कहा था, “भारत के कृषि इतिहास में आज एक बड़ा दिन है। संसद में अहम विधेयकों के पारित होने पर मैं अपने परिश्रमी अन्नदाताओं को बधाई देता हूँ। यह न केवल कृषि क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन लाएगा, बल्कि इससे करोड़ों किसान सशक्त होंगे।”

प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा था, “मैं पहले भी कहा चुका हूँ और एक बार फिर कहता हूँ: MSP की व्यवस्था जारी रहेगी। सरकारी खरीद जारी रहेगी। हम यहाँ अपने किसानों की सेवा के लिए हैं। हम अन्नदाताओं की सहायता के लिए हरसंभव प्रयास करेंगे और उनकी आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर जीवन सुनिश्चित करेंगे।”

 

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

मंदिर में ‘सेकेंड हैंड जवानी’ पर डांस, वायरल किया वीडियो: इंस्टाग्राम मॉडल की हरकत से खफा हुए महंत, हिन्दू संगठन भी विरोध में

मध्य प्रदेश के छतरपुर स्थित एक मंदिर में आरती साहू नाम की एक इंस्टाग्राम मॉडल ने 'सेकेंड हैंड जवानी' पर डांस करते हुए वीडियो बनाया, जिससे हिन्दू संगठन नाराज़ हो गए हैं।

PFI के 6 लोग… ₹28 लाख की वसूली… खाली कराना था 60 परिवार, कहाँ से आए 10000? – असम के दरांग में सिपाझार हिंसा...

असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सिपाझार हिंसा के पीछे PFI के होने की बात कही। 6 लोगों ने अतिक्रमणकारियों से 28 लाख रुपए वसूले थे।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
124,375FollowersFollow
410,000SubscribersSubscribe