Monday, August 2, 2021
Homeदेश-समाजचीन की अलीबाबा और जैक मा को गुरुग्राम की अदालत का समन: फेक न्यूज...

चीन की अलीबाबा और जैक मा को गुरुग्राम की अदालत का समन: फेक न्यूज फैलाने से जुड़ा है मामला

कोर्ट ने ये कार्रवाई यूसी न्यूज़ में काम करने वाले एक पूर्व कर्मचारी की शिकायत पर की है। पूर्व कर्मचारी का कहना है कि कंपनी की सेंसरशिप और फेक न्यूज फैलाने के खिलाफ बोलने पर उसे नौकरी से निकाल दिया गया था।

दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम की एक अदालत ने चीन की कंपनी अलीबाबा और उसके फाउंडर जैक मा को समन भेजा है। कोर्ट ने ये कार्रवाई यूसी न्यूज़ में काम करने वाले एक पूर्व कर्मचारी की शिकायत पर की है। पूर्व कर्मचारी का कहना है कि कंपनी की सेंसरशिप और फेक न्यूज फैलाने के खिलाफ बोलने पर उसे नौकरी से निकाल दिया गया था।

कर्मचारी ने आरोप लगाया था कि कंपनी ऐसे कंटेंट को सेंसर करती थी, जो चीन के खिलाफ हो। साथ ही वो फेक न्यूज़ फैलाने का भी काम करती है।

यह मामला तब सामने आया जब भारत सरकार ने 59 चीनी ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसमें यूसी ब्राउजर और यूसी न्यूज भी शामिल थे।

भारत ने ऐप पर बैन लगाने के बाद सभी प्रभावित कंपनियों से लिखित रूप से जवाब माँगा था, जिसमें उन्होंने कंटेंट सेंसर किया था या किसी विदेशी सरकार के लिए काम किया था।

20 जुलाई की इस कोर्ट की फाइलिंग के अनुसार अलीबाबा की यूसी वेब के एक पूर्व कर्मचारी पुष्पेंद्र सिंह परमार ने आरोप लगाया कि कंपनी चीन के खिलाफ सभी कंटेंट को सेंसर करती थी और इसके यूसी ब्राउजर और यूसी न्यूज ऐप फेक न्यूज चलाते थे, जिससे सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो।

इस मामले को लेकर गुरुग्राम डिस्ट्रिक्ट कोर्ट की सिविल जज सोनिया शेओकांड ने अलीबाबा, जैक मा और करीब दर्जन भर लोगों के खिलाफ समन जारी किया है। कोर्ट ने इन सभी से 29 जुलाई को खुद पेश होकर या फिर वकील के जरिए समन का जवाब देने को कहा है। वहीं समन में कंपनी और उनके अधिकारियों को 30 दिन के अंदर लिखित जबाव भी दाखिल करने को कहा गया है।

उधर, यूसी इंडिया ने एक बयान में कहा है कि भारतीय बाजार और स्थानीय कर्मचारियों के कल्याण के लिए कंपनी की प्रतिबद्धता अटूट है और उसकी नीतियाँ स्थानीय नियमों के अनुरूप हैं। हालांकि, कंपनी ने ताजा मामले को कोई भी टिप्पणी नहीं की है। बता दें अलीबाबा के प्रतिनिधियों ने चीनी कंपनी या जैक मा की ओर से टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है।

पुष्पेंद्र सिंह परमार यूसी वेब के गुरुग्राम ऑफिस में अक्टूबर 2017 तक एसोसिएट डायरेक्टर के पद पर काम कर चुके हैं। परमार ने कंपनी से क्षतिपूर्ति के रूप में 2,68,000 डॉलर की रकम माँगी है।

भारत सरकार की ओर से बैन लगाए जाने के बाद यूसी वेब लगातार वापसी का प्रयास कर रहा था। लेकिन ताजा आरोपों के बाद कंपनी के वापसी के प्रयासों को झटका लग सकता है। वहीं अब यूसी वेब ने भारत में कुछ कर्मचारियों को कंपनी से निकलना भी शुरू कर दिया है।

एनालिटिक्स फर्म सेंसर्स टॉवर के आँकड़ों के मुताबिक, बैन से पहले 2017 और 2018 के दौरान यूसी ब्राउजर के भारत में 689 मिलियन डाउनलोड थे, जबकि यूसी न्यूज के 79.8 मिलियन डाउनलोड थे।

कोर्ट में लगाए गए आरोप

गौतलब है कि पुष्पेंद्र सिंह परमार ने 200 पेज की याचिका में यूसी न्यूज की कुछ पोस्ट की क्लिप भी लगाई है। इन क्लिप में दिखाई गई खबरों को परमार ने फर्जी बताया था।

यूसी वेब द्वारा अपने प्लेटफॉर्म पर सेंसर शब्दों का इस्तेमाल किया गया। जैसे कि 2017 के एक हिंदी पोस्ट का शीर्षक है ‘आज मध्यरात्रि से 2,000 रुपए के नोट बैन हो जाएँगे।’ वहीं, 2018 के एक पोस्ट की हेडलाइन में कहा गया है कि ‘अभी-अभी भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध शुरू हो गया है।’ कंपनी चीन विरोधी कंटेंट को सेंसर करने के लिए “India-China border” और “Sino-India war” जैसे की-वर्ड का इस्तेमाल करती थी।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले भारत सरकार ने टिकटॉक समेत 59 चायनीज मोबाइल ऐप को प्रतिबंधित कर दिया था। सरकार ने इन ऐप को लोगों की गोपनीयता के कारण आसुरक्षित बताया था।

भारत के आईटी मंत्रालय ने भी इन एप्स को भारत की संप्रभुता, अखंडता, प्रतिरक्षा, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बताया था। उन्होंने कहा था कि एंड्रायड और iOS प्लेटफॉर्म्स पर ये सारे एप्स डेटा चुराते हैं और विदेशों में स्थित सर्वर पर भेज देते हैं।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘किताब खरीद घोटाला, 1 दिन में 36 संदिग्ध नियुक्तियाँ’: MGCUB कुलपति की रेस में नया नाम, शिक्षा मंत्रालय तक पहुँची शिकायत

MGCUB कुलपति की रेस में शामिल प्रोफेसर शील सिंधु पांडे विक्रम विश्वविद्यालय में कुलपति थे। वहाँ पर वो किताब खरीद घोटाले के आरोपित रहे हैं।

‘दविंदर सिंह के विरुद्ध जाँच की जरूरत नहीं…मोदी सरकार क्या छिपा रही’: सोशल मीडिया में किए जा रहे दावों में कितनी सच्चाई

केंद्र सरकार के ख़िलाफ़ कई कॉन्ग्रेसियों, पत्रकारों, बुद्धिजीवियों ने सोशल मीडिया पर दावा किया। लेकिन इनमें से किसी ने एक बार भी नहीं सोचा कि अनुच्छेद 311 क्या है।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
112,620FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe