Wednesday, July 28, 2021
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मेरे भाई को थाने में मार डाला, बीवी का गैंगरेप किया, नाखून उखाड़ दिए: राजस्थान पुलिस पर गंभीर आरोप

"6-7 जुलाई की रात को पुलिस ने मेरे भाई पर खूब अत्याचार किए और उसकी हत्या कर दी। मेरी पत्नी जो इस अत्याचार की गवाह थी, उसके साथ पुलिस ने गैंगरेप किया। उन्होंने उसके नाखून उखाड़ दिए। उसकी आँखों और उंगलियों को चोट पहुँचाई।”

राजस्थान के चुरु जिले में दलित युवक की पुलिस हिरासत में हुई संदिग्ध मौत के मामले में नया खुलासा हुआ है। मृतक की 35 वर्षीय भाभी और परिजनों ने आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मियों पर सामूहिक बलात्कार का आरोप लगाया है। परिजनों ने दोनों ही मामले में सीबीआई से जाँच करवाने की माँग की है। पीड़िता एसएमएस अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड में भर्ती है, जहाँ उसका इलाज चल रहा है।

परिवारवालों का कहना है कि पुलिस ने महिला के साथ गैंगरेप किया और चोरी के एक मामले में अवैध रूप से तकरीबन 8 दिनों तक उसे हिरासत में रखा। इसके साथ ही पीड़िता ने ये भी आरोप लगाया कि पुलिसवालों ने जबरन कुछ कागजातों पर अँगूठा लगवाया, इसके अलावा बलात्कार और देवर की हत्या वाली बात किसी को नहीं बताने की धमकी भी दी।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक 6 जुलाई को महिला के देवर को गिरफ्तार किया गया और उसी रात उसकी पुलिस कस्टडी में मौत हो गई। एक अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा इस मामले की न्यायिक जाँच की जा रही है। महिला के पति ने शनिवार (13 जुलाई, 2019) को जयपुर में पत्रकारों को बताया,

“30 जून को चोरी के एक केस में पुलिस मेरे 22 वर्षीय भाई को पकड़ कर ले गई। 3 जुलाई को पुलिस उसे वापस घर ले आई मगर उसी दिन फिर से उठाकर ले गई। पुलिस मेरी पत्नी को भी साथ ले गए। बाद में 6-7 जुलाई की रात पुलिस ने मेरे भाई पर खूब अत्याचार किए और उसकी हत्या कर दी। मेरी पत्नी जो इस अत्याचार की गवाह थी, उसके साथ पुलिस ने गैंगरेप किया। उन्होंने उसके नाखून उखाड़ दिए। उसकी आँखों और उंगलियों को चोट पहुँचाई।”

महिला के पति ने यह भी बताया कि उसके भाई की हत्या के बाद भी पुलिस ने जबरन उसकी पत्नी को 10 जुलाई तक पुलिस हिरासत मे रखा।

महिला के परिवार द्वारा गंभीर आरोप लगाए जाने के बाद कार्मिक विभाग ने शुक्रवार देर रात एक आदेश जारी किया। जिसके बाद चुरु के एसपी राजेंद्र कुमार शर्मा को हटा दिया गया। इसके अलावा संबंधित पुलिस सर्कल के अधिकारी को भी निलंबित कर दिया गया। इससे पहले दलित की पुलिस हिरासत में मौत के बाद एसपी ने उस पुलिस स्टेशन के एसएचओ, एक हेड कांस्टेबल और 6 कांस्टेबल को निलंबित कर दिया था।

पीड़ित महिला के एक अन्य देवर ने बताया कि 6 जुलाई को जब पुलिस उसके भाई को गाँव से ले जा रही थी, तब उसने कहा था कि वो आखिरी बार अपने परिवार को देख रहा था और 8 दिन तक हिरासत में रहने के बाद जब उसकी भाभी घर वापस आई, तो उनकी हालत बेहद खराब थी। जिसके बाद 11 जुलाई को महिला को जयपुर के अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद उसके परिवार ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर इस मामले में कार्रवाई की माँग की।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (अपराध), बीएल सोनी ने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए बताया कि पीड़ित महिला का बयान दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा, “हमने दावों के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और मामले की जाँच क्राइम ब्राँच को सौंप दी है।” इस मामले में जहाँ एक ओर महिला के परिवार वाले दावा कर रहे हैं कि पुलिस हिरासत में मरने वाले व्यक्ति को 30 जून को गिरफ्तार किया गया था, वहीं दूसरी तरफ पुलिस का कहना है कि उसे 3 जुलाई को हिरासत में लिया गया था, फिर छोड़ दिया गया। इसके बाद उसे दोबारा 6 जुलाई को गिरफ्तार किया गया।

अपर पुलिस अधीक्षक प्रकाश कुमार शर्मा ने बताया,

“3 जुलाई को पुलिस के पास सूचना आई की गाँव में एक संदिग्ध चोर को पकड़ा गया है। पुलिस जब घटनास्थल पर पहुँची तो देखा कि गाँव वालों ने चोर की बुरी तरह पिटाई की थी। फिर उसे पुलिस थाने लाया गया, जहाँ पता चला कि पिछले साल चोरी के एक मामले में की गई एफआईआर में उसका नाम शामिल था। हालाँकि इस मामले में कोई चार्जशीट फाइल नहीं की गई थी।”

प्रकाश कुमार शर्मा ने कहा कि स्थानीय पुलिस के मुताबिक उसे 6 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। थाने के पुलिसकर्मियों ने बताया कि रात को तकरीबन 1:45 बजे उस युवक की तबियत बिगड़ी थी, जिसके बाद उसे अस्पताल ले जाया गया। वहाँ रात को 2:15 बजे उसकी मौत हो गई। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, उसकी मौत हृदय गति रुक जाने से हुई थी। हालाँकि, व्यक्ति की मौत से जुड़े सभी तथ्यों की न्यायिक जाँच की जा रही है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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