तमिलनाडु में गणपति का होगा विसर्जन, हाई कोर्ट ने दी इजाजत; मुंबई के 3 जैन मंदिरों को खोलने का SC का आदेश

इस साल अकेले ही करना होगा गणेश विसर्जन (साभार: न्यूज़ 18)

तमिलनाडु में गणेश प्रतिमा का विसर्जन होगा। लोग अपने घरों के बाहर प्रतिमा स्थापित भी कर पाएँगे। शर्तों के साथ मद्रास हाई कोर्ट ने इसकी इजाजत दे दी है। इससे पहले तमिलनाडु सरकार ने कोरोना का हवाला देते हुए सार्वजनिक स्थानों पर गणेश प्रतिमा की स्थापना और विसर्जन करने पर रोक लगा दी थी।

हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी तरह की शोभा यात्रा निकालने और सामूहिक विसर्जन पर प्रतिबंध जारी रहेगा। विसर्जन के दौरान महामारी से संबंधित हर तरह के दिशा-निर्देशों का पालन भी करना होगा।

तमिलनाडु सरकार के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दो सदस्यीय पीठ ने कहा कि धार्मिक उत्सव मनाए जाने जरूरी हैं और किसी भी समुदाय को इससे रोका नहीं जा सकता।

इससे पहले राज्य सरकार का पक्ष रखते हुए एडवोकेट जनरल विजय नारायण ने कहा कि राहत देने से अव्यवस्था होगी। नियम और क़ानूनी की अनदेखी होगी। ऐसे मौकों पर काफी भीड़ इकट्ठा होती है और उसे नियंत्रित करना मुश्किल होगा। इन दलीलों को नकारते हुए पीठ ने कहा कि विसर्जन धार्मिक उत्सव है और लोगों को इससे दूर नहीं किया जा सकता है। लेकिन इस बार विसर्जन में भीड़ नहीं होगी बल्कि एक ही व्यक्ति को विसर्जन करने की अनुमति होगी।     

तमिलनाडु राज्य सरकार ने कोविड 19 महामारी के चलते लोगों को अपने घरों में ही गणेश चतुर्थी मनाने की बात कही थी। सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक़ सार्वजनिक स्थानों पर गणेश भगवान की प्रतिमा की स्थापना करने पर रोक लगाई गई थी। इसके अलावा किसी भी तरह की शोभा यात्रा निकालने पर प्रतिबंध लगाया था।

इसके अलावा सर्वोच्च न्यायालय ने आज ही (शुक्रवार 21 अगस्त 2020) 3 जैन मंदिरों को खोलने और पर्युषण पूजा की सशर्त अनुमति दी थी। ये मंदिर आगामी दो दिनों के लिए खोले जाएँगे। इस दौरान कोरोना महामारी संबंधी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करना होगा। सुनवाई के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे ने कहा कि हम दादर, बायकुला और चेंबूर स्थित जैन मंदिर खोलने और पर्युषण पूजा की अनुमति दे रहे हैं।    

साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है किसी अन्य मंदिर को खोले जाने या उसमें पूजा की अनुमति नहीं दी जा रही है। इस फैसले को किसी अन्य धार्मिक आयोजन के अनुमति माँगने का आधार भी नहीं बनाया जाएगा। मुख्य न्यायाधीश बोबदे ने कहा कि गणेश चतुर्थी उत्सव पर अंतिम निर्णय स्टेट डिज़ास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी का होगा। अगर याचिकाकर्ता कोरोना महामारी संबंधी नियमों का ईमानदारी से पालन करते हैं तो तो दादर, बायकुला और चेंबूर में पूजा की अनुमति देना ख़तरनाक नहीं होगा।    

अंत में सर्वोच्च न्यायालय ने कहा फ़िलहाल यह आदेश किसी और मामले में लागू करने की मंशा नहीं है। खासकर ऐसे धार्मिक समारोह जिनमें विशाल जनसमूह और मंडली शामिल हैं। जिस पर मंदिर प्रबंधन का नियंत्रण नहीं है। यहाँ हमारा सीधा मतलब मुंबई में और अन्य स्थानों पर गणेश उत्सव के दौरान होने वाली पूजा का ख़ास तौर पर उल्लेख कर रहे हैं।    

ऑपइंडिया स्टाफ़: कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया