‘लिबरलों’ की ट्रोलिंग से Vistara ने किया ट्वीट डिलीट, मेजर जनरल के अभिनंदन का किया था ‘गुनाह’

एक युद्ध नायक का इतना सा सम्मान भी वाम-चरमपंथी ‘लिबरल’ धड़े के लिए असह्य हो गया, और उन्होंने बुरी तरह ट्रोल कर विस्तारा को अपमानित करना शुरू कर दिया। दुर्भावनापूर्ण ट्रोलिंग के चलते विस्तारा को...

पत्रकारिता का समुदाय विशेष, जो अपने-आप को ‘लिबरल’ कहता है, की दुर्भावनापूर्ण ट्रोलिंग के चलते विस्तारा एयरलाइन्स ने अपना वह ट्वीट हटा दिया है, जिसमें उन्होंने भारत के युद्ध नायक मेजर जनरल जीडी बख्शी का अभिनन्दन किया था। मेजर जनरल बख्शी विस्तारा के हवाई जहाज से यात्रा कर रहे थे और एयरलाइन्स ने उनका स्वागत करते हुए एक ट्वीट किया था, जिसमें उनकी देश सेवा के लिए उन्हें धन्यवाद किया गया था।

नहीं आया पत्रकारिता के समुदाय विशेष को रास, जमकर की ट्रोलिंग

एक युद्ध नायक का इतना सा सम्मान भी वाम-चरमपंथी ‘लिबरल’ धड़े के लिए असह्य हो गया, और उन्होंने बुरी तरह ट्रोल कर विस्तारा को अपमानित करना शुरू कर दिया। खुद को ‘समाज का पथ-प्रदर्शक’ कहने वाले पत्रकार आम ट्रोलों की आलोचना तो दूर की बात, एक सुर में गाते नजर आए। हर समय मॉब-लिंचिंग का खटराग छेड़ने वाले देश के ही सैनिक की मॉब-लिंचिंग में शामिल होने कूद पड़े।

हटाया विस्तारा ने ट्वीट  

अंततः लगातार ट्रोलिंग और बहिष्कार की धमकी इतने ‘बड़े’ और ‘ताकतवर’ पत्रकारों द्वारा दिए जाने के बाद विस्तारा ने यह ट्वीट हटा दिया।

विस्तारा के ट्वीट की लिंक पर जाने पर यह आ रहा है
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कुछ देर पहले ही ऑप इंडिया ने “Vistara एयरलाइन्स ने भूतपूर्व मेजर जनरल का किया सम्मान, ‘लिबरल’ ट्रॉल्स को लगी मिर्ची” शीर्षक से खबर चलाई थी। उस खबर में विस्तारा के ट्वीट को एम्बेड किया गया था। नीचे आप उस ट्वीट को देख सकते हैं।

क्यों नहीं पसंद करता है जीडी बख्शी को पत्रकारिता का समुदाय विशेष?

पत्रकारिता के समुदाय विशेष का पसंदीदा देश है पाकिस्तान- और उसके खिलाफ मेजर जनरल बख्शी दो-दो युद्धों (1971 व 1999) में भाग ले चुके हैं। यही नहीं, कारगिल के युद्ध में उनके सैन्य नेतृत्व का अभिनन्दन करते हुए उन्हें विशिष्ट सेवा पदक से भी नवाजा गया था। उनके बड़े भाई भी 1965 के युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए थे।

इसके अलावा सेवानिवृत्त होने के बाद भी मेजर जनरल बख्शी पाकिस्तान और आतंकवाद के साथ कठोरतम बर्ताव करने के पक्षधर हैं। वह खुलकर खुद को राष्ट्रवादी भी कहते हैं- यह भी इस ‘समुदाय विशेष’ के लिए असह्य है।

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