‘BBC में लोग मुसलमान को नाराज करने से डरते हैं, मुस्लिम समुदाय के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता’

लॉर्ड इंद्रजीत सिंह ने कहा, “गुरु तेग बहादुर के मेरे कार्यक्रम में कुछ भी नहीं था, जो मुसलमानों को नाराज करता। लेकिन BBC में एक दबाव है, लोग यहाँ 'मुस्लिम समुदाय को नाराज करने से डरते हैं'।"

BBC मतलब ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन। यहीं काम करते थे अनुभवी सिख होस्ट लॉर्ड इंद्रजीत सिंह। अब नहीं करते हैं, मतलब यहाँ की नौकरी उन्होंने छोड़ दी है। कारण – इंद्रजीत सिंह ने बीबीसी रेडियो के पूर्वग्रह और असहिष्णुता का विरोध करते हुए 35 साल पुराना संबंध तोड़ दिया है। इंद्रजात सिंह बीबीसी रेडियो 4 के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘थॉट फॉर द डे’ को प्रजेंट करते थे। उन्हें ब्रिटेन में सिख समुदाय की आवाज माना जाता है। उन्होंने इसे छोड़ने के पीछे मीडिया संस्थान (मतलब BBC) की मुस्लिम समुदाय के प्रति अत्यधिक संवेदनशीलता बताई। लेकिन क्यों और कैसे – आइए जानते हैं पूरी कहानी।

हुआ यह कि लॉर्ड इंद्रजीत सिंह ने सिख गुरु तेग बहादुर पर एक कार्यक्रम किया था। BBC ने उनके इस कार्यक्रम को सेंसर कर दिया। क्यों किया? क्योंकि… उनके कार्यक्रम की बातें ‘मुसलमानों को नाराज कर सकती थी’। न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में लॉर्ड सिंह ने कहा कि यहाँ एक दबाव है और लोग मुस्लिम समुदाय को नाराज करने से डरते हैं। गुरु तेग बहादुर पर मेरे कार्यक्रम को प्रसारित करने के लिए शो के प्रोड्यूसर ने हामी भी भरी थी लेकिन किसी सीनियर प्रोड्यूसर ने ‘मुसलमान नाराज हो जाएँगे’ के डर से इसे सेंसर कर दिया।

इंद्रजीत सिंह ने कहा, “इसमें कुछ भी नहीं था, जो मुसलमानों को नाराज करता। क्योंकि यह एक उदाहरण है कि कैसे सभी मनुष्यों का एक दूसरे के प्रति असहिष्णुता का इतिहास रहा है। हमें इससे सीखना चाहिए लेकिन इतिहास से सीखने के बजाय हम इसे दफनाने की कोशिश कर रहे हैं।”

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लॉर्ड सिंह ने कहा कि गुरु तेग बहादुर से संबंधित घटना, एक तथ्यात्मक ऐतिहासिक घटना है। यह ऐसे व्यक्ति की शहादत को याद करती है, जो अपने जीवन को हिंदू समुदाय के विश्वास की रक्षा करने के लिए सदा तत्पर रहे। यह हर धर्म के सभी लोगों द्वारा याद किया जाना चाहिए। लेकिन उन्हें (बीबीसी के सीनियर प्रोड्यूसर) कुछ मुस्लिम चरमपंथियों के खफा होने का ख्याली डर था।

साढ़े तीन दशकों से टुडे कार्यक्रम की प्रसिद्ध आवाज रहे लॉर्ड इंद्रजीत सिंह ने कहा कि बीबीसी ने उन्हें उस गुरु तेग बहादुर पर चर्चा करने से रोकने की कोशिश की, जिन्होंने 17वीं शताब्दी के भारत में हिंदुओं के इस्लाम में जबरन धर्म परिवर्तन (मुगलों के द्वारा) के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। वह कहते हैं कि धर्म को सेंसर करने का यह प्रयास गलत है, जो फर्जी के राजनीतिक रूप से पाक-साफ बने रहने की विचारधारा से उपजा है। यह सिर्फ कोरी कल्पना है कि हमें ऐसा कुछ नहीं कहना चाहिए, जिससे किसी की भावनाएँ आहत हो जाएँ।

लॉर्ड इंद्रजीत ने गुरु तेग बहादुर के शो को सेंसर करने के खिलाफ BBC के सीनियर अधिकारियों से भी बात की। उन्हें इस मुद्दे पर भरोसा भी दिया गया। लेकिन यह भरोसा सिर्फ भरोसा मात्र ही था। जब कोई बात बनते नहीं दिखी तो, उन्होंने BBC की नौकरी को बाय-बाय कर दिया।

उल्लेखनीय है कि गुरु तेग बहादुर सिख धर्म के दस सिख गुरुओं में से नौवें थे। उन्होंने न केवल कश्मीरी पंडितों को इस्लाम में धर्म परिवर्तन के लिए रोका, बल्कि दिल्ली में मुगल बादशाह औरंगजेब द्वारा सार्वजनिक रूप से खुद के धर्म परिवर्तन करने से भी इनकार कर दिया। जिसके बाद युद्ध छिड़ गया और युद्ध छेड़ने के लिए उनकी निंदा की गई और कहा गया कि केवल इस्लाम ही उन्हें बचा सकता है। फिर भी इस्लाम अपनाने के बजाय उन्होंने मौत को चुना और मुगलों द्वारा सरेआम उनका गला काटा गया। दिल्ली में जहाँ उनकी हत्या की गई, वहाँ उनकी याद में गुरुद्वारा सिस गंज साहिब है। गुरुद्वारा रकाब गंज साहिब वो जगह है, जहाँ उनका दाह संस्कार किया गया।

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