Sunday, September 19, 2021
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पहले बुलाया और जहाँ से चले थे, बसों में ठूँस फिर वहीं पहुँचाया: केजरीवाल के धोखे से बिलख-बिलख कर रोए प्रवासी मजदूर

जब इन्हें पता चला कि गाँव भेजने का आश्वासन दिलाकर लाने के बाद फिर से वहीं भेजा जा रहा है, जहाँ से पैदल चलकर वो इतनी दूर आए, तो बहुतों को रोना आ गया। कई लोग बिलख-बिलख कर रोते हुए बोले कि केजरीवाल ने उन्हें दिलासा तो गाँव भेजने का दिया था, लेकिन फिर से वहीं लाकर पटक दिया।

हजारों लोगों के लिए घर पहुँचने की आस बना आनंद विहार का इलाका अब सुनसान हो गया है। पुलिस ने पूरे इलाके से लोगों को हटा दिया है। अब वहाँ पर केवल सूनी सड़कें, खाली बस स्टेशन ही दिखाई पड़ रहा है। असल में इलाके को खाली कराने की तैयारी रविवार की दोपहर 12 बजे के आसपास ही शुरू हो गई थी। वहाँ पर प्रशासन का पूरा अमला पहुँच गया था और लाउडस्पीकर से लोगों को इलाका खाली करने के निर्देश दिए जा रहे थे। खाली कराने की दोपहर बाद शुरू हुई प्रक्रिया तीन बजे तक पूरी कर ली गई और पूरा इलाका सुनसान हो गया

बता दें कि भारत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का एक संघ है, जहाँ शक्ति केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच बँटी होती है। राज्य और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों का काम होता है कि वह केंद्र सरकार के साथ मिलकर राज्य की जनता के लिए काम करे। जब किसी प्रकार की आपदा-विपदा आती है तो यह जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। लेकिन अभी कोरोना के समय में दिल्ली की हालत कुछ और ही है। दिल्ली में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐसी तबाही मचाई, जिसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। केजरीवाल ने न सिर्फ उत्तर प्रदेश बल्कि बिहार के लोगों की भी जान खतरे में डाल दी है।

दिल्ली सरकार ने बस अड्डे पर लोगों को इकट्ठा करने के बाद फिर से उन्हें वहीं पर पहुँचा दिया, जहाँ से ये काफी जद्दोजहद करके यहाँ पर आए थे। कई लोग दिल्ली के दूरदराज के इलाकों से वहाँ पर पैदल पहुँचे थे, तो वहीं सैकड़ों लोग फरीदाबाद, गुरुग्राम, मानेसर, बल्लभगढ़ से आनंद विहार तक पहुँचे थे। केजरीवाल सरकार ने इन गरीब मजदूरों को पहले तो यहाँ पर इकट्ठा किया और फिर उन्हें बिना ये बताए कि वो उन्हें कहाँ ले जा रहे हैं, बस के अंदर बैठाकर दिल्ली-एनसीआर के ही अलग-अलग इलाकों में ले जाकर छोड़ दिया। जब उन लोगों को ये पता चला कि गाँव भेजने का आश्वासन दिलाकर यहाँ लाने के बाद उन्हें फिर से वहीं भेजा जा रहा है, जहाँ से पैदल चलकर वो इतनी दूर आए, उनको रोना आ गया। कई लोग तो बिलख-बिलख कर रो पड़े कि केजरीवाल ने उन्हें दिलासा तो गाँव भेजने का दिलाया था, लेकिन फिर से उसे वहीं पर लाकर पटक दिया।

दरअसल अरविंद केजरीवाल ने कोरोना जैसी विपदा के समय में भी अपनी गंदी राजनीति नहीं छोड़ी और दिल्ली में रह रहे उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों के मन में ऐसी भय और घर जाने का लालच दिया कि देखते ही देखते UP और दिल्ली के बॉर्डर पर हजारों की तादाद में अपने घर जाने वाले जमा हो गए।

देश में लॉकडाउन लगा हुआ है और दिल्ली ने तो केंद्र सरकार से भी पहले लॉकडाउन लगा दिया था लेकिन फिर भी ऐसा माहौल बनाया गया, जिससे दिल्ली में काम करने वाले सभी, गरीब से लेकर पढ़ने वाले तक घर जाने की चाहत में आ गए। बताया गया कि दिल्ली में इन लोगों के बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए गए और केजरीवाल सरकार के अधिकारियों ने उनसे कहा कि बॉर्डर पर उनको घर ले जाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई है। यूपी सरकार ने बयान जारी कर कहा है कि इन लोगों के दिल्ली सरकार ने बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए। लॉकडाउन के दौरान उन्हें भोजन, दूध नहीं मिला जिस कारण भूखे लोग सड़कों पर उतरे।

यहाँ तक कि दिल्ली सरकार के अधिकारी बक़ायदा एनाउंसमेंट कर अफ़वाह फैलाते रहे कि यूपी बॉर्डर पर बसें खड़ी हैं, जो उन्हें यूपी और बिहार ले जाएँगी। इसके बाद बहुत सारे लोगों को मदद के नाम पर डीटीसी की बसों से बॉर्डर तक पहुँचाकर छोड़ दिया गया। दिल्ली से गाजियाबाद तक बच्चों को गोद में लिए व सामान सिर पर लादे लोगों की कतारें लगी रहीं। माहौल ऐसा हो चुका था कि अगर एक भी कोरोना पॉजिटिव व्यक्ति होता तो यह महामारी देश के 2 सबसे बड़े आबादी वाले राज्य में तबाही मचा सकते थे। कई दावे किए गए थे जिसमें यह कहा गया था कि दिल्ली में केजरीवाल सरकार ने कोरोना वायरस की स्थिति सँभालने के लिए बढ़िया काम किया है। लेकिन ऐसा क्या हुआ कि इतने सारे प्रवासी एक साथ दिल्ली छोड़कर जाने को मजबूर हुए?

बड़ी संख्या में पलायन की खबरें 24 मार्च से ही आने शुरू हुए, तब से लेकर अगले 4 दिनों तक किसी भी तरह के का कोई कदम वापस जाने वालों के लिए नहीं उठाया गया। इसके उलट अफवाह फैलाई गई कि उन्हें घर छोड़ने वाली बसें उनका इंतजार कर रही हैं। जब उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने स्थिति को और बिगड़ने नहीं दिया और भीड़ को देखते हुए तुरंत बसों को लगाया तब केजरीवाल यह कहते फिर रहे हैं कि वो दिल्ली छोड़कर न जाएँ और यह भी दावा कर रहे है कि दिल्ली में पूरे इंतजाम कर लिए गए हैं।

जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को यह खबर मिली तो उन्होंने 1000 बसें लगाकर सभी प्रवासियों को गंतव्य तक पहुँचाने की व्यवस्था की। शुक्रवार व शनिवार रात भर बसों से लोगों को उनके जिले पहुँचाया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद इसकी मॉनिटरिंग करते रहे। रात में ही मजदूरों और बच्चों के लिए भोजन का इंतजाम भी कराया गया। साथ ही दिल्ली से आने वाले लोगों की स्क्रीनिंग भी की गई और यह सुनिश्चित किया गया कि जो स्वस्थ होगा, उसे निगरानी में घरों को भेजा जाएगा। जिसमें कोरोना के लक्षण पाए जाते हैं, उन्हें जिलों के वार्डों में क्वारंटाइन किया जाएगा।

बावजूद इसके केजरीवाल के मंत्री योगी सरकार के बारे में अफवाह फैलाते रहे। आम आदमी पार्टी के विधायक राघव चड्डा ने तो यह आरोप लगा दिया कि दिल्ली से जाने वाले लोगों को योगी जी पुलिस से पिटवा रहे हैं। हालाँकि जब लोगों ने खरी-खोटी सुनाना शुरू किया तो ट्वीट डिलीट कर भाग गए। उनके खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज कर लिया गया है। अरविंद केजरीवाल के इस दोहरी राजनीति के लिए लोगों ने ट्विटर पर जमकर कोसा और खरी-खोटी भी सुनाई।

जिस दिल्ली को इन प्रवासियों की ऐसे आपदा के समय मदद करनी चाहिए, वैसे समय में केजरीवाल ने उल्टा DTC बसें लगा कर UP बार्डर पार पहुँचा दिया और उन्हें वापस जाने पर मजबूर कर दिया। यह सभी को पता है कि कोरोना के समय में कहीं भी आना जाना किसी खतरे से खाली नहीं है लेकिन फिर भी इस तरह से राजनीति कर अरविंद केजरीवाल ने फिर से अपना रंग दिखा दिया है। इस तरह से अरविंद केजरीवाल ने अपनी गंदी राजनीति को चमकाने के लिए लाखों लोगों की जिंदगी के साथ खेलकर उसे दाँव पर लगा दिया। उल्लेखनीय है कि अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान पूर्वांचल के लोगों को लक्ष्य बनाकर इन्हीं दो मुद्दों, बिजली-पानी पर ही विशाल बढ़त के साथ जीत हासिल की थी।

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