टॉम वडक्कन ही नहीं, मोदी का बढ़ता कद देख कॉन्ग्रेस के 8 नेताओं ने थामा BJP का हाथ

केरल से लेकर गुजरात और महाराष्ट्र से लेकर बंगाल तक के नेता अपनी-अपनी पार्टी छोड़कर बीजेपी जॉइन कर रहे हैं।

2019 में लोकसभा चुनाव को देखते हुए विपक्षी नेता जितना नरेंद्र मोदी पर भर-भरके बयानबाजी कर रहे हैं, मोदी सरकार उतनी ही मजबूत होती जा रही है। चुनाव की तारीखें पास होने के साथ ही भाजपा की नीतियों और प्रधानमंत्री के उचित नेतृत्व को पहचानते हुए कॉन्ग्रेस पार्टी के कई नेता पहले ही बीजेपी में शामिल हो चुके हैं और अब सोनिया गांधी के करीबी टॉम वडक्कन ने भी पार्टी को छोड़ते हुए बीजेपी का दामन थाम लिया है।

गुरुवार (मार्च 14, 2019) को कॉन्ग्रेस पार्टी की नीतियों से परेशान होकर केरल में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता टॉम वडक्कन बीजेपी में शामिल हो गए हैं। कॉन्ग्रेस प्रवक्ता रह चुके टॉम वडक्कन सोनिया गांधी के क़रीबी भी माने जाते थे। लेकिन, बीजेपी में शामिल होने के साथ ही उन्होंने कॉन्ग्रेस पर जमकर हमला बोला है। उनका कहना है कि पहले कॉन्ग्रेस ने सर्जिकल स्ट्राइक का सबूत मांगा जिससे वो काफी आहत हुए थे। 20 साल पार्टी को सेवा प्रदान करने के बाद उन्होंने कहा कि पार्टी में “यूज एंड थ्रो” की नीति है। इसलिए उनके पास कोई और विकल्प नहीं था।

केवल टॉम वडक्कन ही नहीं बल्कि कई नेता इन दिनों अपनी पार्टियाँ छोड़कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं। उम्मीद है इससे उन लोगों के सुरों पर सवालिया निशान लगेगा जो मोदी को तानाशाह बताकर उनकी तुलना हिटलर से करते हैं। वैसे तो चुनावी हवा में बहकर बहुत से नेता बीजेपी में शामिल हुए हैं। लेकिन इस सूची में कॉन्ग्रेस नेताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। टॉम की ही तरह आज तृणमूल कॉन्ग्रेस विधायक अर्जुन सिंह ने भी भाजपा के साथ आगे बढ़ने का फैसला किया।

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हाल ही में कॉन्ग्रेस पार्टी को छोड़ने वालों में कर्नाटक के पूर्व विधायक उमेश जाधव का नाम भी शामिल है।

इनके साथ ही महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल के बेटे सुजय भी मंगलवार (मार्च 12, 2019) को पिता के ख़िलाफ़ जाते हुए बीजेपी में शामिल हुए।

ऐसे ही कुछ दिन पहले कॉन्ग्रेस के 3 विधायकों ने गुजरात में इस्तीफ़ा दिया था। इन में जामनगर के विधायक वल्लभ धारविया ने विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र त्रिवेदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। पार्टी के पूर्व सहयोगी परषोत्तम सबारिया भी भाजपा में शामिल हो गए हैं। बता दें कि गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 के बाद से अब तक कॉन्ग्रेस के 5 विधायक बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। 8 मार्च को माणवदर से कॉन्ग्रेस विधायक जवाहर चावड़ा ने भी विधानसभा से इस्तीफा देकर बीजेपी जॉइन कर लिया था।

एक ओर कॉन्ग्रेस के लिए बेहद हैरान करने वाली बात होगी कि जिस भाजपा पार्टी को वह दिन-रात हराने की कोशिशों में जुटी हुई है, उसे कॉन्ग्रेस के ही नेता मजबूत बना रहे हैं। वहीं दूसरी ओर भाजपा के लिए यह सफलता के संकेत हैं कि उसे हर ओर से समर्थन प्राप्त हो रहा है। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में और अमित शाह की नीतियों से भाजपा का जादू 2019 के लोकसभा चुनावों में भी उतना ही बोल रहा है, जितना कि 2014 में था।

2014 के मुकाबले 2019 में भाजपा की नीतियों और शक्तियों का अंदाजा आप ऑपइंडिया के इस आर्टिकल में विस्तृत ढंग से पढ़ सकते हैं – सहयोगी दलों को साथ रखने की कला जानते हैं मोदी-शाह, कॉन्ग्रेस की एकता बस मंचों तक ही सीमित

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नितिन गडकरी
गडकरी का यह बयान शिवसेना विधायक दल में बगावत की खबरों के बीच आया है। हालॉंकि शिवसेना का कहना है कि एनसीपी और कॉन्ग्रेस के साथ मिलकर सरकार चलाने के लिए उसने कॉमन मिनिमम प्रोग्राम का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है।

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