गर्लफ्रेंड का सिर दीवार पर मारने वाला मुनीर अकरम UN में PAK का नया डिप्लोमेट

संयुक्त राष्ट्र में इससे पहले जब मुनीर स्थायी प्रतिनिधि होते थे तो अपने काम से ज्यादा गर्लफ्रेंड के साथ मारपीट को लेकर सुर्खियों में रहे थे। कश्मीरियों को भड़काने के लिए भी वे कुख्यात रहे हैं।

मुनीर अकरम को पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में अपना नया स्थायी प्रतिनिधि बनाया है। वे मलीहा लोधी की जगह लेंगे। अकरम की नियुक्ति की जानकारी पाकिस्तान सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर दी गई है। लोधी ने भी ट्वीट कर इसकी पुष्टि की है। उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हुए अकरम को शुभकामनाएँ दी है। हालाँकि, मलीहा का कहना है कि उन्होंने खुद इस जिम्मेदारी को छोड़ने का मन बना लिया था, लेकिन सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि यह फैसला दबाव में लिया गया है।

मुनीर का कई घोटालों और विवादों से नाता रहा है। 2003 में परवेज मुशर्रफ ने भी उन्हें यूएन में स्थायी प्रतिनिधि बनाया था। उस वक्त वे मरिजाना मिहिक नामक अपनी 35 वर्षीय गर्लफ्रेंड पर हमला कर विवादों में आ गए थे। गर्लफ्रेंड ने आधी रात में अमेरिकी पुलिस को कॉल कर बुला लिया था। बाद में आसिफ अली जरदारी जब राष्ट्रपति बने तो मुनीर को इस पद से हटा दिया गया।

आजतक की खबर के मुताबिक मुनीर अकरम की ये तैनाती काफी विवादों में रही थी। साल 2003 में पाकिस्तान को दो साल के लिए सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता मिली थी। ऐसे वक्त में मुनीर यूएन की गंभीर चर्चाओं का हिस्सा बनने की बजाए अपने से 22 साल छोटी यूरोपियन मूल की एक लड़की के साथ अफेयर में मशगूल थे। इस लड़की ने बाद में मुनीर पर मारपीट करने और उसका सिर दीवार पर मारने का आरोप लगाया था।

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हालाँकि, राजनयिक संरक्षण होने के कारण उस वक्त मुनीर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। लेकिन, इस घटना से वैश्विक पटल पर पाकिस्तान की बहुत थू-थू हुई। बाद में पुलिस ने पाक सरकार से माँग की कि मुनीर का राजनयिक संरक्षण खत्म किया जाए ताकि ये मामला कोर्ट के बाहर सुलझ सके।

बाद में जरदारी ने उन्हें यूएन से बाहर का रास्ता दिखाया। कहा जाता है कि जरदारी अपनी पत्नी और पाकिस्तान की पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या का मामला वे यूएन तक ले जाना चाहते थे। लेकिन मुनीर इससे सहमत नहीं थे।

उल्लेखनीय है कि मुनीर कश्मीर को लेकर भड़ास निकालने के लिए कुख्यात रहे हैं। वे अक्सर कश्मीरियों को हथियार उठाने के लिए भड़काते रहते हैं। हाल ही में उन्होंने आर्टिकल 370 हटने पर अपने एक लेख में कहा था कि हुर्रियत की बजाए हिज्बुल जैसे संगठनों को कश्मीर में लड़ाई शुरू करनी चाहिए। यूएन में उनकी तैनाती की एक बड़ी वजह यही है।

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