Wednesday, September 22, 2021
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‘फर्जी जाति प्रमाण-पत्र से बने RAS अधिकारी’: राजस्थान के शिक्षा मंत्री के ‘प्रतिभावान रिश्तेदारों’ को लेकर नया दावा

राजस्थान कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और अशोक गहलोत सरकार में शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा RAS इंटरव्यू में अपने रिश्तेदारों को एक जैसे नंबर मिलने के कारण चर्चा में हैं।

राजस्थान कॉन्ग्रेस अध्यक्ष और अशोक गहलोत सरकार में शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा के रिश्तेदारों को राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के इंटरव्यू में एक समान नंबर मिलने का मामला अभी शांत नहीं हुआ था कि उन पर एक नया आरोप लगाया जा रहा है। जयपुर निवासी वकील गोवर्धन सिंह एवं अन्य ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के चेयरमैन को पत्र लिखकर कहा है कि डोटासरा के रिश्तेदारों ने RAS में चयनित होने के लिए OBC के फर्जी प्रमाण-पत्र का उपयोग किया है।

गोवर्धन एवं अन्य ने RPSC के चेयरमैन डॉ. भूपेन्द्र यादव एवं 7 अन्य सदस्यों को पत्र लिखा है। इसमें बताया गया है कि डोटासरा के समधी चुरू के जिला शिक्षा अधिकारी रमेश चंद्र पूनिया को सेवा में 32 वर्ष 3 माह की अवधि पूरी होने के बाद प्रधानाध्यापक पद पर प्रमोशन मिल गया था। ऐसे में उनकी संतान OBC क्रीमीलेयर में आएगी और उन्हें OBC आरक्षण का लाभ नहीं मिल सकता। गोवर्धन समेत अन्य ने आरोप लगाया है कि फिर भी रमेश चंद्र ने अपनी तीनों संतानों प्रतिभा, गौरव और प्रभा का OBC का प्रमाण-पत्र बनवा लिया। प्रतिभा डोटासरा की बहू हैं। वह RAS 2016 में ही चयनित हो गई थीं। उनके भाई गौरव और बहन प्रभा RAS 2018 में चयनित हुए हैं।

गोवर्धन एवं अन्य ने RPSC चेयरमैन डॉ. भूपेन्द्र यादव एवं 7 अन्य सदस्यों को भेजे गए पत्र में कहा है कि RPSC प्रशासन फर्जी प्रमा- पत्र मामले में सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराए अन्यथा RPSC चेयरमैन एवं अन्य सदस्यों एवं डोटासरा के रिश्तेदारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। सूचना-पत्र में बताया गया है कि फर्जी प्रमाण पत्र के मामले में आईपीसी की धारा 420, 409, 406, 467, 468, 471, 166, 167 और 120-B के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए।

हालाँकि डोटासरा के समधी रमेश चंद्र पूनिया ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का पूरी तरह से खंडन किया है। उन्होंने कहा कि बच्चों का OBC प्रमाण-पत्र बनवाने के लिए उन्होंने वेतन संबंधी एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रशासन को उपलब्ध कराए जिसके बाद तय योग्यता के आधार पर ही उनके बच्चों का प्रमाण-पत्र जारी किया गया है।

ज्ञात हो कि पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब RAS 2018 के इंटरव्यू में डोटासरा की बहू के भाई-बहन को RAS इंटरव्यू में 80-80 नंबर मिले, जबकि दोनों ही लिखित परीक्षा में 50 फीसदी अंक भी प्राप्त नहीं कर सके। इसके अलावा RAS 2016 में चयनित डोटासरा की बहू प्रतिभा को भी इंटरव्यू में 80 नंबर ही मिले थे। वहीं डोटासरा के बेटे अविनाश को उस साल इंटरव्यू में 85 नंबर मिले थी। हालाँकि दोनों ही परीक्षाओं के टॉपर्स की बात करें तो RAS 2016 के टॉपर भवानी सिंह को इंटरव्यू में मात्र 70 नंबर, जबकि RAS 2018 की टॉपर मुक्ता राव को 77 नंबर मिले। RAS 2016 लिखित परीक्षा में अविनाश 50 फीसदी हासिल करने में नाकाम रहे थे तो प्रतिभा को 800 की लिखित परीक्षा में 402 नंबर मिले थे।

मीडिया खबरों के मुताबिक RAS के परिणाम सामने आने के बाद शिक्षा मंत्री डोटासरा पर पद के दुरुपयोग का आरोप भारतीय जनता पार्टी लगा रही है। भाजपा का कहना है कि शिक्षा मंत्री ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए रिश्तेदारों को अफसर बनवाने का काम किया है। लेकिन डोटासरा रिश्तेदारों को ‘प्रतिभावान’ बता इन सवालों को खारिज कर चुके हैं।

गौरतलब है कि डोटासरा के रिश्तेदारों को RAS के इंटरव्यू में एक समान नंबर मिलने के मामले के अलावा भी इंटरव्यू प्रक्रिया पहले से ही सवालों के घेरे में है। साक्षात्कार के दौरान ही 23 लाख रु. घूस लेकर अच्छे नंबर दिलाने के मामले में कनिष्ठ लेखाकार को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसमें राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की सदस्य राजकुमारी गुर्जर के पति का भी नाम सामने आया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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