विषय: फ़ारूक़ अब्दुल्ला

जम्मू-कश्मीर, सुप्रीम कोर्ट

‘अगर अनुच्छेद 370 अस्थायी है तो भारत में जम्मू कश्मीर का विलय भी अस्थायी है’

इस अनुच्छेद की वजह से कश्मीर में आरटीआई भी लागू नहीं है। इसके अलावा शहरी भूमि क़ानून भी वहाँ लागू नहीं होता। जम्मू कश्मीर का अपना अलग ध्वज है और वहाँ के निवासियों के पास दोहरी नागरिकता होती है। यहाँ विधानसभा का कार्यकाल भी 6 वर्षों का होता है।
जम्मू-कश्मीर

‘क़सम अल्लाह की, धारा 370 हटाया तो कोई नहीं उठाएगा तिरंगा, हम होंगे आज़ाद’

घाटी के सारे नेताओं के देशविरोधी बयान।महबूबा मुफ़्ती ने भी धारा 370 को लेकर कहा कि पूरा देश जल उठेगा। फ़ारूक़ के बेटे उमर ने जम्मू कश्मीर के लिए अलग पीएम-राष्ट्रपति की माँग की थी। ग़ुलाम नबी आज़ाद ने जम्मू कश्मीर पुलिस को दुश्मन बताया था।
नायडू, फ़ारूक़

मुस्लिमों के लिए ‘नमाज़ रूम’ का वादा: नायडू ने प्रचार के लिए J&K से फ़ारूक़ अब्दुल्ला को बुलाया

इमामों के प्रशिक्षण के लिए कॉलेज स्थापित किया जाएगा। नमाज़ पढ़ने के लिए नमाज़ रूम बनवाया जाएगा। 'Almaspet Circle' का नाम बदल कर टीपू सुल्तान के नाम पर कर दिया जाएगा। अमीन पीर दरगाह को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।

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