‘किसान’ आंदोलन से ₹27000 करोड़ का नुकसान: दिल्ली और आस-पास के राज्यों में 80000 ट्रकों की आवाजाही प्रभावित

किसान आंदोलन की वजह से दिल्ली को जोड़ने वाली सड़कें बंद (साभार: India West)

दिल्ली और इसके आस पास चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के चलते बीते एक महीने से ज़्यादा समय में दिल्ली तथा उससे सटे राज्यों उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब एवं राजस्थान को लगभग 27,000 करोड़ रुपए के व्यापार का नुकसान हुआ है। ट्रेडर्स बॉडी ने इसकी  जानकारी दी है। 

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने कहा कि नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमा पर किसान एक महीने से अधिक समय से आंदोलन कर रहे हैं। इस वजह से दिल्ली से कई राज्यों को जोड़ने वाली सड़कें बंद हैं। 

ट्रेडर्स बॉडी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और उसके राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि पंजाब और हरियाणा से दिल्ली आने वाले माल की आपूर्ति पर काफी फर्क पड़ा है। इन दोनों राज्यों से विभिन्न वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए काम किया जा रहा है। इसके लिए अन्य राज्यों से दिल्ली में सामान लेकर आने वाले वाहनों को राजमार्ग को छोड़कर अन्य वैकल्पिक मार्गों से काफी लंबा चक्कर लगा कर दिल्ली आना पड़ रहा है।

सीएआईटी प्रमुख ने मीडिया को बताया कि पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और देश के अन्य राज्यों से दिल्ली आने वाले सामानों की आपूर्ति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में प्रतिदिन लगभग 50 हजार ट्रक देश भर के विभिन्न राज्यों से सामान लेकर आते हैं। लगभग 30 हजार ट्रक प्रतिदिन दिल्ली से बाहर अन्य राज्यों के लिए सामान लेकर जाते हैं। 

किसान आंदोलन के चलते न केवल दिल्ली सामान आने पर बल्कि दिल्ली से पूरे देश में सामानों के जाने पर भी काफी प्रभाव पड़ा है। ऐसे में जितनी जल्दी सरकार और किसान नेताओं के बीच चर्चा के जरिए समाधान निकल जाए, उतना अच्छा होगा।

इस बीच, संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा है कि अगर सरकार ने 4 जनवरी को अगले दौर की वार्ता के दौरान उनकी माँगों को पूरा नहीं किया तो वे अपना आंदोलन तेज करेंगे। किसान आंदोलन के वरिष्ठ नेता दर्शन पाल ने भी कहा कि पेट्रोल पंप और उनके द्वारा संचालित शॉपिंग मॉल सहित कुछ औद्योगिक समूहों की वस्तुओं और सेवाओं का बहिष्कार जारी रहेगा। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि आंदोलन के हिस्से के रूप में प्रमुख राजमार्गों पर टोल प्लाजा को निशाना बनाया जाएगा।

किसान आंदोलन की आगे की रणनीति के बारे में बात करते हुए क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल ने कहा था, “23 जनवरी को हम विभिन्न राज्यों में राज्यपालों के घरों की ओर मार्च निकालेंगे और अगर सरकार के साथ बैठक में कोई ठोस हल नहीं निकला तो आने वाली 26 जनवरी को दिल्ली में ‘ट्रैक्टर किसान परेड’ आयोजित की जाएगी।”

किसानों और केंद्रीय सरकार के बीच आज होगी 7वीं वार्ता

प्रदर्शनकारी किसान और केंद्र सरकार सोमवार (जनवरी 4, 2020) को सातवें दौर की वार्ता करेंगे। गतिरोध खत्म करने के लिए अब तक 6 दौर की वार्ता विफल रही है। छठे दौर की बैठक के बाद केंद्र सरकार और नए किसान कानूनों के खिलाफ प्रदर्शनकारी किसानों के बीच चार माँगों में से दो पर सहमति बनी थी। हालाँकि, किसानों ने दावा किया है कि वे तब तक विरोध प्रदर्शन को समाप्त नहीं करेंगे जब तक कि उनकी अन्य दो माँगें पूरी नहीं होतीं। वो दो माँगें हैं- नए कृषि कानूनों को रद्द करना और एमएसपी पर कानून बनाना।

ऑपइंडिया स्टाफ़: कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया