राजनैतिक मुद्दे

हर सियासी मुद्दे का वह पहलू जिस पर ख़बरों से आगे चर्चा है ज़रूरी

बंधू प्रकाश, कमलेश तिवारी

वाह रे लिबरल! बंगाल पुलिस की कहानी अकाट्य, गुजरात-यूपी की पुलिस ग़लत

गुजरात पुलिस और योगी की पुलिस को शक की नज़र से देखने वाले यह भी कह सकते हैं कि सबूत मैन्युफैक्चर्ड है। ऐसे लोगों के लिए राँची के काँके में बिरसा मुंडा के नाम पर एक अस्पताल है। वहाँ अच्छी व्यवस्था है।
भगवान राम, लक्षमण, सीता, हनुमान और भरत-शत्रुघ्न

राम मंदिर: हक हिन्दुओं का होना चाहिए, ‘सेक्युलरासुर’ सरकार का नहीं

सत्ता के परिवर्तन और समय के चक्र से कभी-न-कभी कॉन्ग्रेस, माकपा, हिन्दू कारसेवकों पर गोली चलवाने वाले 'मुल्ला मुलायम' की सपा जैसे लोग वापिस आ ही जाएँगे। उस समय अगर राम मंदिर सरकारी नियंत्रण में रहे तो क्या होगा, ये कभी सोचा है?
प्रधानमंत्री मोदी

मोदी की हर बात को स्टंट बताने वाला लिब्रांडू गिरोह कल को अपनी ही विष्ठा खा सकता है अगर…

इतनी दुर्भावना ले कर ज़िंदा ही क्यों हैं ऐसे लोग? इतनी घृणा ले कर हर दिन कैसे बिता रहे हैं लोग? क्या ये आश्चर्य की बात नहीं है कि आपको समुद्र तट साफ भी चाहिए, और कोई इसे एक जन-अभियान बनाना चाहता है तो आपको दर्द होने लगता है?
जेपी नारायण, इंदिरा गाँधी

जेपी जन्मदिन पर: उनकी अव्यवहारिक क्रांति के चेले आज भी प्रयोग के मूड में रहते हैं

जेपी ने अव्यवहारिक राजनीति की, वे ऐसी मसीहाई भूमिका में आ गए थे, जो अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई और अपने ही लोगों के खिलाफ लड़ाई को एक ही तराजू में तौल रहे थे। उन्हें उम्र के उस अंतिम पड़ाव में जरा भी भान नहीं हुआ कि जो लोग उनकी पालकी उठा रहे हैं, उनकी मंशा क्या है?
जय प्रकाश नारायण

जेपी आंदोलन का जहर तो बिहार के हिस्से आया, लेकिन रत्न कहाँ गए?

इसी आन्दोलन से निकले सुशील कुमार मोदी की सत्तर के दशक में पटना के जलजमाव पर अनशन की तस्वीरें नजर आती हैं। अब वो उप मुख्यमंत्री हैं और पटना के जलजमाव से पिछले ही वर्ष की तरह इस वर्ष भी उनका आवास डूबा रहा।
शेहला रशीद

सुश्री शेहला जी, राजनीति तो आपने घंटा नहीं छोड़ी है और किसी को फर्क भी घंटा नहीं पड़ता

जेएनयू में हजार वोट पाकर विद्यार्थी संघ का वाइस प्रेसिडेंट बनना किसी को यह अधिकार दे देता है कि वो लोकतान्त्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर सके? इनके हिसाब से वो मुट्ठी भर आतंकी कश्मीर घाटी के लाखों लोगों का भविष्य तय करेंगे क्योंकि उनको 'आजादी' चाहिए।
बिहार परिवहन व्यवस्था

अभी लाखों बिहारी फिर से अपने गाँव-घर जाने को परेशान होंगे

मेरे गर्वीले बिहारियों! मिजोरम या असम जैसे पहाड़ी आतंकवाद ग्रस्त राज्यों से तुलना कर बिहार को महान ठहराकर आप जैसे लोगों ने ही नीतीश तक को शिथिल बना दिया है। किसी नेता को यह उम्मीद ही नहीं है कि कोई उनसे सवाल भी पूछ सकता है ,क्योंकि हम सभी ने शूकरवृत्ति में ही मोक्ष मान लिया है।
बिहार बाढ़

‘अगर हथिया ही सब कुछ है तो इतने बड़े-बड़े हाथी जो हम लोगों ने पाल रखे हैं वो क्यों हैं’

भूकंप, बाढ़ और जल-जमाव जैसी आपदाएँ झेलने के बाद बिहारवासी कम से कम ये सीख लेंगे कि आपदा की स्थिति में किसी और के बदले अपने आप पर भरोसा करना होगा क्योंकि जिनके भरोसे बैठे हैं उस सरकार, राजनैतिक दल, एनजीओ वगैरह में से तो कोई आता नहीं!
दलित-मुस्लिम एकता

जय भीम-जय मीम की विश्वासघात और पश्चाताप की कहानी: पाक का छला, हिंदुस्तान में गुमनाम मौत मरा

जोगेंद्र नाथ मंडल ने जिस तर्ज पर इतिहास रचा उसका हश्र जानना जरूरी है। जोगेंद्र नाथ तो नेता थे, परिस्थितियाँ विपरीत हुईं तो गुमनामी में ही सही वापस भारत आ गए, लेकिन उनका क्या जो उनके आह्वान पर मात्र एक वोट बनकर पाकिस्तानी हुए।
नीतीश कुमार

क्या मर गया है बिहारियों का स्वाभिमान? क्या नीतीश कुमार को घेर कर नहीं पूछ सकते सवाल?

दुर्भाग्य यह है कि बिहार में शायद कुछ भी सही नहीं है। इसलिए हमें बुद्ध और चाणक्य की शरण में जाना पड़ता है। लेकिन अशोक स्तम्भ और गरुड़ध्वज की छाया क्षीण हो चुकी है। नितीश और लालू जैसे नेता यह बताते हैं कि हम चुनने में भी गलती करते हैं, और उसके बाद काम करवाने के लिए प्रयास भी नहीं करते।
नीतीश कुमार

6 फीट पानी में तो इंसान डूब जाता है, आपका अहंकार क्यों नहीं डूबता…

मौसम विभाग ने भारी बारिश को लेकर 72 घंटे पहले चेताया था। बैठक भी हुई थी। मंत्री-अफसर सब जुटे थे। नाश्ते में काजू भी रहा होगा मगर उस बैठक का नतीजा क्या हुआ? बारिश होती रही और ढीठ सिस्टम मुॅंह ताकता रहा।
कपिल मिश्रा,अरविन्द केजरीवाल

रोहिंग्या प्रेमी केजरीवाल को यूपी-बिहार के लोगों से नफरत क्यों: BJP नेता कपिल मिश्रा का लेख

आज केजरीवाल को यूपी-बिहार, बंगाल और राजस्थान से आए लोगो से नफरत है। इसके उलट उन्हें बांग्लादेश और म्यांमार से आए घुसपैठियों से मोहब्बत है। देशद्रोही, नक्सली और टुकड़े-टुकड़े गैंग की राजनीति करने वाले केजरीवाल अपने वोट बैंक को एक साफ सन्देश दे रहे हैं- "दिल्ली में NRC लागू नहीं होने दूँगा और टुकड़े-टुकड़े गैंग को बचाऊँगा।"

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