भारत की बात

भारतीय दर्शन, परम्परा और सभ्यता से जुड़ी बातें और विचार

तिरंगा

26 जनवरी 1990: संविधान की रोशनी में डूब गया इस्लामिक आतंकवाद, भारत को जीतना ही था

19 जनवरी 1990 की भयावह घटनाएँ बस शुरुआत थी। अंतिम प्रहार 26 जनवरी को होना था, जो उस साल जुमे के दिन थी। 10 लाख लोग जुटते। आजादी के नारे लगते। गोलियॉं चलती। तिरंगा जलता और इस्लामिक झंडा लहराता। लेकिन...
नेताजी सुभाष चंद्र बोस

नेहरू से पहले ही बोस बन गए थे प्रधानमंत्री, सिंगापुर की सरकारी वेबसाइट पर है पूरा ब्यौरा

उस सरकार को कई देशों की मान्यता प्राप्त थी। बैंक था, सेना थी। महिलाओं की भागीदारी थी। अफ़सोस कि भारत की उस सरकार को भुला दिया गया, जिसकी देश ने 2018 में 75वीं वर्षगाँठ मनाई। नेताजी ने देश-विदेश में घूम कर भारतीय समुदाय के भीतर आज़ादी का मन्त्र फूँका।
सुभाष चंद्र बोस

जब कॉन्ग्रेस की भरी सभा में हुआ बीमार सुभाष चंद्र बोस का अपमान, नेहरू-गाँधी ने छोड़ दिया था साथ

नेताजी को 1580 वोट, गाँधी के पट्टाभि को 1377 मत... फिर भी बीमार बोस जब स्ट्रेचर पर कॉन्ग्रेस के त्रिपुर सेशन में पहुँचे, तब 2 लाख लोगों के सामने उनके राजनैतिक जीवन को सबसे बड़ा झटका लगा। अध्यक्ष चुने जाने के बाद भी उन्हें इस्तीफ़ा देना पड़ा।
जवाहर लाल नेहरू, नाथू सिंह राठौड़

अंग्रेज को आर्मी चीफ बनाना चाहते थे नेहरू, लेफ्टिनेंट जनरल राठौड़ ने नहीं करने दी मनमानी

बैठक में सबने नेहरू की हाँ में हाँ मिलाई लेकिन एक सैन्य अधिकारी ऐसे भी थे जो नेहरू की राय से इत्तिफ़ाक़ नहीं रखते थे। वो शख्स थे- लेफ्टिनेंट जनरल नाथू सिंह राठौड़। उन्होंने कहा- "मैं कुछ कहना चाहता हूँ" और...
गुजरात, मकर संक्रांति, पतंग

‘काय पो छे’ हो या ‘भक काटे’: पतंग उड़ाने का असली मजा तो गुजरात में है

दादियाँ दादा जी को अपने समय की पतंगबाजी याद दिलाती हैं और दादा ताव में आकर खड़े हो जाते हैं दादी को ये दिखाने कि मैं अभी बूढ़ा नहीं हुआ हूँ। अब भी ये लड़के मेरी पतंग के आगे नहीं टिक सकते और पतंग कटते ही, 'सालो चाइनीज़ माँझो वापरे छे' कहकर वापस आकर बैठ जाते हैं।
विवेकानंद

जब विवेकानंद ने कहा- संन्यासी हूँ तो क्या हृदय की कोमलता का भी त्याग कर दूँ

स्वामी विवेकानंद का जीवन बहुत लंबा न होने के बावजूद, सौभाग्य से विभिन्न समय पर लिखे गए पत्रों, संस्मरणों, लेखों और हँसी-ठिठोली से हम वंचित नहीं हुए हैं। खास बात ये है कि उनके लिखे कई पत्र, संस्मरण आज उनके न रहने के लगभग एक शताब्दी के बाद भी कई नए रहस्य उद्घाटित कर रहे हैं।
तानाजी, अजय देवगन

सिंह चला गया लेकिन ‘माँ’ को सिंहगढ़ दे गया: बेटे की शादी छोड़ छत्रपति के लिए युद्ध करने वाले तानाजी

गाय और भेंड़ का माँस खाने वाला उदयभान। उसके 12 ताक़तवर बेटे। उसका सेनापति हिल्लाल। 1800 पठान। अरबों की सेना। इन सबके बावजूद तानाजी ने माँ को किया वादा निभाने के लिए अपनी जान न्योछावर कर दी। कहानी मराठा योद्धा और छत्रपति शिवाजी के विश्वस्त मित्र की।
वाजपेयी राम का मंदिर

NRC, CAA का बवाल देख वाजपेयी कहते- छल और छद्म परास्त होंगे, हम और सुर्खरू होंगे

आज NRC और CAA पर जिस तरह भ्रम का माहौल बनाने की कोशिश हो रही। समुदाय विशेष को उकसाया जा रहा। ऐसा ही कभी अयोध्या में राम मंदिर को लेकर कॉन्ग्रेसियों और वामपंथियों ने किया था। तब संसद में वाजपेयी ने कहा था...
राजेंद्र लाहिरी (29 जून, 1901-17 दिसंबर, 1927)

दक्षिणेश्वर समूह: इतिहास में गुम आज़ादी का एक पन्ना, क्रांति का एक नायक जिसने आज मौत को गले लगाया

फॉंसी से कुछ घंटे पहले वो वर्जिश कर रहे थे। जेल के एक अधिकारी ने पूछा- अब इसकी क्या जरूरत? जवाब मिला- हिन्दू हूॅं। पुनर्जन्म में विश्वास रखता हूॅं। अगले जन्म में भारत मॉं की सेवा के लिए और तंदरुस्त होकर लौटना चाहता हूॅं।

भारतस्य महाख्यानम् – अनन्तत्वस्य परमसंरक्षणम्

मम मतानुसारम् अस्माकं भारतीयानां महाख्यानस्य त्रयः भागाः। प्रथमं नाम भारतमेव ईश्वरस्य अनन्तत्वदर्शनस्य परमसंरक्षकम्। द्वितीयं नाम विश्वगुरुत्वेन अस्माभिः ईश्वरस्य अनन्तत्वं लोके पाठनीयम्। तृतीयं नाम वयं सम्राज्ञः भरतस्य वंशजाः प्रजाः च।
राजेंद्र प्रसाद, नेहरू, पटेल

डॉ राजेंद्र प्रसाद को राष्ट्रपति बनने से रोकने के लिए नेहरू ने बोला झूठ तो पटेल ने कहा- शादी नक्की

"अगर दूल्हा भाग न जाए तो शादी नक्की"- सरदार पटेल की इस एक लाइन ने डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद की राह में रोड़े अटकाने वाले नेहरू के अरमानों पर पानी फेर दिया। नेहरू ने डॉक्टर प्रसाद को रोकने के लिए झूठ तक बोला लेकिन उनकी पोल खुल गई।
वॉर हीरो, दक्षिण कोरिया

2 लाख का इलाज, 2300 फ़ील्ड ऑपरेशन: भारतीय सेना के रंगराज को मिलेगा ‘वॉर हीरो’ का सबसे बड़ा युद्ध सम्मान

कोरियाई युद्ध में मारे गए सैनिकों की याद में दक्षिण कोरिया ने राजधानी सिओल में वॉर मेमोरियल बनाया है। उस वॉर मेमोरियल में 'भारत' के नाम से अलग स्मारक बनाया गया है जहाँ तिरंगा झंडा बड़ी शान से लहराता रहता है।

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