रिपोर्ट

दिन की वो ख़बरें जो बनी रहीं चर्चा में

आरफा शेरवानी

मुसलमान बन कर मत करो विरोध-प्रदर्शन, वरना… द वायर की आरफा शेरवानी ने मुस्लिम भीड़ को समझाई रणनीति

"हम अपनी विचारधारा से समझौता नहीं कर रहे बल्कि अपने तरीके और स्ट्रेटेजी बदल रहे हैं। सभी जाति, धर्म के लोग साथ आएँ। घर पर खूब मजहबी नारे पढ़कर आइए, उनसे आपको ताकत मिलती है। लेकिन सिर्फ मुस्लिम बनकर विरोध मत कीजिए, आप लड़ाई हार जाएँगे।"
नागरिकता कानून

पल्स पोलियो की महिला स्टाफ को बंधक बनाकर अभद्रता, शक NRC डेटा कलेक्शन का: आस मो. सहित 4 पर FIR

प्लस पोलियो की टीम को स्थानीय लोगों द्वारा NPR और NRC का डाटा तैयार करने वाली टीम समझकर पहले उनके साथ मारपीट की गई और फिर स्टाफ की एक महिला के साथ अभद्रता भी की गई। यही नहीं, इसके बाद दोनों कर्मचारियों को करीब एक घंटे तक घर में बंधक बनाकर रखा गया।
एएमयू

26 जनवरी पर काला झंडा और ‘वीसी गो बैक’ के नारे: AMU के उपद्रवी छात्रों को पुलिस दौड़ा-दौड़ा कर पकड़ी

छात्रों ने यह नारेबाजी तब शुरू की जब कुलपति ने अपने भाषण के दौरान विश्वविद्यालय परिसर में गत 15 दिसंबर को CAA के खिलाफ प्रदर्शन के मामले में जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में AMU के छात्रों के उग्र प्रदर्शन को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
शरजील इमाम

शरजील इमाम के बिहार कनेक्शन पर छापेमारी, उसके अब्बा को नीतीश की पार्टी ने दिया था टिकट

शरजील इमाम दिवंगत जदयू नेता अकबर इमाम का बेटा है। हालाँकि, अभी उसका पूरा परिवार पटना रह रहा है। शारजील इमाम आईआईटी मुंबई से कंप्यूटर साईंस में ग्रेजुएट है। उसके पिता अकबर इमाम जेडीयू की ओर से विधानसभा चुनाव में उतरे थे, लेकिन उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था।
भाजपा-बंगाल

‘भारत माता की पूजा’ से ममता बनर्जी की पुलिस को दिक्कत! BJP कार्यकर्ताओं को मारा, लिया हिरासत में

पुलिस ने गणतंत्र दिवस के मौके पर प्रत्येक थाने के आगे भारत माता की पूजा करने की भाजपा की योजना में गतिरोध उत्पन्न किया। भाजपा का कहना है कि उन्होंने तय किया था कि 26 जनवरी के दिन वो पार्टी की ओर से शहर के सभी पुलिस थानों के आगे भारत माता की प्रतिमा रखकर पूजा-अर्चना करेंगे। इस संबंध में सभी थानों को चिट्ठी भेजकर...
कश्मीर हिंसा

आज शरजील है, तब मुहम्मद शफी था: उस समय भी हिंदू भेंट चढ़े थे, आज भी निशाना वही हैं

तब भी ऐसा ही मजहबी उन्माद था। इसी तरह के नारे और ऐसी ही साजिशें थी। उस समय इसकी आग में कश्मीर के हिंदू जले थे। आज नहीं चेते तो अगला नंबर आपका हो सकता है।
बापसा

‘देशद्रोही’ शरजील के साथ कौन? JNU की BAPSA, कहा- ब्राह्मणवादी भाजपा मुसलमानों को पकड़ रही

यह देखना हास्यास्पद है कि जब इस CAA-NRC विरोध प्रदर्शन को शुरू करने वाला शाहीन बाग ही शरजील इमाम से पीछा छुड़ाना चाह रहा है, तब यहाँ जेएनयू में अपनी पहचान तलाश रहा BAPSA शरजील के मुसलमान होने और सताए जाने की बात करते हुए इसमें ब्राह्मणवाद निकाल लाया है।
शरजील इमाम, नार्थ-ईस्ट

बुरा फँसा ‘टुकड़े-टुकड़े’ गैंग का नया सरगना: AP क्राइम ब्रांच ने दर्ज किया केस, खुद CM ने बताया

मुख्यमंत्री प्रेमा खांडू ने बयान जारी कर बताया कि क्राइम ब्रांच ईटानगर ने शरजील के ख़िलाफ़ मामल दर्ज किया है। खांडू ने कहा कि इस तरह के भड़काऊ बयान देकर भारत की क्षेत्रीय अखंडता और सम्प्रभुता को खंडित करने का कोई भी प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
लोहरदगा हिंसा

मस्जिद व कॉन्ग्रेस दफ्तर से चले पत्थर: मुस्लिमों ने की गोलीबारी, ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ चीखते हुए टूट पड़ी भीड़

"हिन्दू माता-पिता बच्चों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं क्योंकि मुस्लिम अपने बच्चों को जिहादी बना रहे हैं। दंगाई मुस्लिम भीड़ ने 'पाकिस्तान ज़िंदाबाद' का नारा लगाते हुए न सिर्फ़ ईंट-पत्थर फेंके बल्कि गोली चलाई और पेट्रोल बम भी दागे। मुस्लिम महिलाएँ मिर्ची पाउडर फेंक रही थीं।"
भारतीय मुस्लिम

‘मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं’ – मुसलमान महिला मंत्री की तब की बात… और अब संविधान के रास्ते मजहबी कट्टरता!

सवाल मुस्लिमों की अल्पसंख्यक बने रहने में रूचि को लेकर है। किसी देश में अल्पसंख्यक होना, उस देश की कृपा और मेहरबानी पर आश्रित होने जैसा भाव देता है। बावजूद इसके भारत में अल्पसंख्यक होना एक अवसर माना जाता रहा है। तो क्या अवसरवादिता के लिए...
आफरीन फातिमा

निर्दोष अफजल गुरु को फाँसी किसने दी? राम मंदिर कौन बनवा रहा? – SC के खिलाफ JNU महिला नेता ने उगला जहर

इस वीडियो में आफरीन फातिमा देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था सुप्रीम कोर्ट और सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते हुए देखी जा रही है। वीडियो में आफरीन फातिमा सुप्रीम कोर्ट द्वारा राम मंदिर और अफजल गुरु की फाँसी के फैसलों पर संदेह जताते हुए...
केशवानंद भारती

क्या बदला जा सकता है संविधान? लोकतंत्र की मर्यादा पुनर्स्थापित करने वाला केस

'केशवानंद भारती बनाम केरल सरकार' वाले ऐतिहासिक केस ने संविधान की मर्यादा को पुनर्स्थापित किया। इसे भारतीय न्यायपालिका का सबसे 'लैंडमार्क फ़ैसला' कहा जाता है। एक ऐसा निर्णय, जिसने लोकतंत्र की मर्यादा और संविधान की अक्षुण्णता को बरक़रार रखा।

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