कला-साहित्य

कला और साहित्य की बातें

ममता सरकार ने जनतंत्र के साधनों पर कब्ज़ा कर लिया है: टीना बिस्वास

एशियन रिव्यू ऑफ बुक्स ने इस पुस्तक के लिए लिखा है, ’’राजनीतिक प्रवंचना के प्रशंसक इस व्यंग्यपूर्ण कथा को सराहेंगे, जो पश्चिम बंगाल के शासक वर्गों में फैले कपटाचरण, मीडियाई जोड़तोड़ और हत्याओं के किस्से बयां करती है।’’
नर्तकी नटराज

राष्ट्रवादी से लेकर पेरियारवादी तक हैं नर्तकी नटराज की कला के प्रेरणा स्रोत: वो ‘इंसान’ जिसने इतिहास रचा

पद्मश्री विभूषित नर्तकी नटराज नहीं चाहतीं कि उनकी कला को सहानुभूति के आधार पर सराहा जाए। उनका कहना है, “मैं आभारी हूँ कि मेरे गुण उन बाकी सभी चीज़ों के मुकाबले उभर कर निकल पाए, जिन्हें लोग गुणों के स्थान पर तलाश रहे थे।”
सबरीमाला मंदिर

सबरीमाला: कहानी एक धर्मयुद्ध की

सबरीमाला में जबरदस्ती घुस कर प्रतिभा को क्या मिला? एक कहानी जिसमें आपके सारे सवालों का जवाब मिल जाएगा।
गंजहों की गोष्ठी

सहज भाषा में पठनीय व्यंग्यबाणों से लैस है ‘गंजहों की गोष्ठी’

85 पृष्ठों की पुस्तक "गंजहों की गोष्ठी" में कुल 20 व्यंग्यबाण (लेख) हैं। हर लेख एक मनके के समान है जो अद्वितीय है

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