मस्जिदों से मजहबी नारे, औरतों का रेप और दरिया में तैरती लाशें: जो कश्मीर में भोगा उसे बताते अब भी रो पड़ते हैं हिंदू

प्रतीकात्मक चित्र

फिल्म निर्माता विवेक रंजन अग्निहोत्री (Vivek Ranjan Agnihotri) ने फिल्म ‘द कश्मीर फाइल्स’ (The Kashmir Files) के जरिए कश्मीरी पंडितों (Stories Of Kashmiri Pandits) के करीब 30 साल पुराने उन जख्मों और मनहूस पलों को दुनिया के सामने रखा है, जिसमें कट्टरपंथी मुस्लिमों ने उनके साथ बर्बरता की थी। रातों-रात लाखों हिंदुओं को घाटी छोड़कर जाने के लिए विवश होना पड़ा। हिंदू महिलाओं का रेप और उनकी हत्या 1990 में आम बात हो गई थी।

इस फिल्म के बाद पीड़ित लोग एक-एक कर आगे आ रहे हैं और अपने साथ हुए जुल्मों की कहानियाँ दुनिया के सामने रख रहे हैं। दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में कुछ और कश्मीरी पंडितों ने अपने दर्द और बेबसी को बयाँ किया है।

कश्मीरी पंडित (बाएँ से) शीतल कौल, विजय कुमार टिक्कू और फूलां रैना (साभार: दैनिक भास्कर)

पहली घटना

पहली शीतल कौल की है, जो एक कश्मीरी पंडित हैं। भास्कर से बात करते हुए शीतल कौल की आँखों से बार-बार आँसू बहने लगते हैं और वो उसे पोंछकर कहती हैं कि कश्मीर के सोपोर में 19 जनवरी 1990 तक उनका भी दो मंजिला मकान था। सेब के कई बागान, गाएँ, बकरियाँ सब कुछ था। शीतल कहती हैं कि उनका जन्म वहीं हुआ, वहीं पर पलीं-बढ़ीं। हिंदुओं के त्योहारों में मुस्लिम पड़ोसी भी शामिल होते थे।

अचानक एक दिन सब कुछ बदल गया। मस्जिदों ने मजहबी नारे गूँजे और हिंदू लड़कियों के घर से निकलने पर रोक लग गई। इन नफरती घोषणाओं में यह कहा गया कि हम कश्मीर को पाकिस्तान बनाएँगे। हिंदू पुरुषों के बिना, हिंदू महिलाओं के साथ। एक-एक कर लड़कियाँ हिंदू घरों से गायब होने लगीं। अगले दिन उनकी लाशें मिलती थीं, दरिया में फूलकर तैरते हुए। ऐसा लगता था कि मानों चढ़ावे का फूल तैर रहा हो। शीतल फिलहाल दिल्ली के रोहिणी सेक्टर के मंगोलपुर कलां में एक किराए के घर में रहती हैं।

दूसरी घटना

इसी तरह से दूसरे कश्मीरी पंडित विजय कुमार टिक्कू बताते हैं कि 19 जनवरी की रात कश्मीरी पंडितों पर जुल्म शुरू हुए। भाई-बहन घर छोड़कर जा चुके थे। जनवरी की सर्द रात में हिंदुओं को घर से खींचकर सड़क पर बैठा दिया गया। धमकी दी गई भाग जाओ वरना मारे जाओगे। वो कश्मीरी में चीख रहे थे, धर्म बदलो, भाग जाओ या फिर मारे जाओ, लेकिन अपनी औरतों को यहीं छोड़ दो। हमारी औरतों के गैंगरेप कर आरी से उनके शरीर को काटा गया।

तीसरी घटना

70 साल की फूलां रैना ने कंपकपाती आवाज में बताती हैं कि कैसे कश्मीरी पंडितों और औरतों के साथ बर्बरता की गई। वो कहती हैं कि अब बूढ़ी हो गई हैं और अब वहाँ जा भी नहीं सकती हैं।

ऑपइंडिया स्टाफ़: कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया