मस्जिद बनाने के लिए तोड़ा गया था राम मंदिर – रामलला विराजमान के वकील ने पेश किए सबूत

राम मंदिर पर नवंबर तक आ सकता है फैसला

सर्वोच्च न्यायालय में अयोध्या विवाद को लेकर लगातार सुनवाई जारी है। आज मंगलवार (अगस्त 20, 2019) को लगातार 8वें दिन इस मामले की सुनवाई हुई। रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने मामले के पक्ष में बात रखते हुए दलीलें दी। उन्होंने कहा कि विवादित जमीन पर मस्जिद बनाने के लिए मंदिर ढहाया गया था।

उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की खुदाई में मिली चीजों का हवाला देते हुए दावा किया कि मंदिर वहीं था जहाँ मस्जिद बनाया गया। रामलला विराजमान की ओर से वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने इस दौरान कहा कि एएसआई की रिपोर्ट में मगरमच्छ और कछुए का जिक्र किया गया है, जो मुस्लिम संस्कृति का हिस्सा नहीं हैं।

उन्होंने एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर कई अन्य पुरातात्विक सबूतों को न्यायालय के सामने पेश करते हुए कहा कि विवादित स्थल पहले एक हिंदू मंदिर था।

रामलला के वकील ने 12वीं सदी के शिलालेख का हवाला दिया और कहा कि साकेत मंडल के राजा गोविन्द चंद्र ने ग्यारहवी शताब्दी मे अयोध्या मे विष्णु हरि का सुन्दर मंदिर बनवाया था जिसकी पुष्टि वहाँ से मिले एक शिलालेख से होती है जिसमें इसका पूरा वर्णन है।

वैद्यनाथ के मुताबिक खुदाई से मिले अवशेष और वैज्ञानिक पड़ताल के बाद एएसआई की रिपोर्ट और मौक़े से मिले सबूतों के बाद कोई शंका या गुंजाइश नहीं रह जाती कि वहाँ पहले मंदिर था और 11 शताब्दी में वहाँ मस्जिद का निर्माण हुआ।

गौरतलब है कि सोमवार को पाँच जस्‍टिस वाले बेंच में से एक न्यायधीश जस्‍टिस बोबडे के अस्‍वस्‍थ होने के कारण कोर्ट सुनवाई नहीं हो पाई थी। जबकि बीते कुछ दिनों से कोर्ट इस मामले मे रोज़ाना सुनवाई कर रहा है।

इस मामले की सुनवाई चीफ जस्‍टिस रंजन गोगोई की अध्‍यक्षता में पाँच जस्‍टिस की बेंच कर रही है। चीफ जस्‍टिस गोगोई के अलावा, जस्‍टिस बोबडे, जस्‍टिस डी वाइ चंद्रचूड़, अशोक भूषण और एस एस नजीर मामले की सुनवाई कर रहे हैं।

ऑपइंडिया स्टाफ़: कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया