सिर्फ टेलिकॉम ही नहीं, इन सरकारी कंपनियों को भी चुकाना होगा AGR बकाया: SC की फटकार के बाद सब लाइन में

प्राइवेट टेलिकॉम कंपनियों के साथ-साथ सरकारी PSU भी घेरे में!

सुप्रीम कोर्ट ने AGR बकाए (Adjusted Gross Revenue dues) का भुगतान करने के आदेश का अनुपालन न करने पर शुक्रवार (फरवरी 14, 2020) को दूरसंचार कंपनियों को फटकार लगाई। उच्चतम न्यायालय ने दूरसंचार एवं अन्य कंपनियों के निदेशकों, प्रबंध निदेशकों से यह बताने को कहा कि AGR बकाए के भुगतान के आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने को लेकर उनके खिलाफ अवमानना कार्रवाई क्यों नहीं की जाए?

इसके बाद दूरसंचार विभाग ने शुक्रवार की आधी रात को निजी दूरसंचार कंपनियों के लिए समय सीमा तय की और साथ ही कुछ बड़े पब्लिक सेक्टरों को भी सरकार को 4 लाख करोड़ रुपए का भुगतान करने का आदेश दिया है। जानकारी के मुताबिक इन टेलीकॉम कंपनियों ने पिछले चार महीनों से एक पैसा भी नहीं चुकाया था। जिसके बाद कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कंपनी के साथ-साथ उनके निदेशकों को अवमानना नोटिस जारी किया और सुनवाई की अगली तारीख 17 मार्च तय की। इस दौरान बेंच ने कहा, “उस समय तक राशि निश्चित रूप से जमा हो जानी चाहिए, वरना फिर हम आपको दिखाएँगे कि हम कितने कठोर हो सकते हैं।”

सुप्रीम कोर्ट की इस फटकार ने कुछ घंटों के भीतर अपना असर दिखा दिया। पब्लिक टेलीकॉम कंपनियों ने जल्द ही रकम चुकाने की बात कही। एयरटेल, जिसके ऊपर 35,000 करोड़ रुपए का बकाया है, उसने कहा कि वो 20 फरवरी तक 10,000 करोड़ रुपए की राशि का भुगतान कर देगी और बाकी की बकाया राशि कोर्ट की अगली सुनवाई से पहले यानी कि 17 मार्च से पहले कर देगी। इसके साथ ही संभावना जताई जा रही है कि टाटा भी कोर्ट की अगली सुनवाई से पहले बकाया राशि 14,000 करोड़ रुपए चुका देगी। हालाँकि घाटे में चल रही टाटा टेलीसर्विसेज को 13,823 करोड़ रुपए के AGR बकाया के भुगतान के लिए पेरेंट कंपनी टाटा संस पर निर्भर रहना होगा। बता दें कि टाटा ने अपना टेलीकॉम बिजनेस एयरटेल को बेच दिया है।

वहीं वोडाफोन आइडिया पर 53,000 करोड़ रुपए का बकाया है। बताया जा रहा है कि कंपनी के मालिक कुमार मंगलम बिरला ने दूरसंचार मंत्री के सामने इस मुद्दे को उठाया था। मगर अब इस बात में संशय है कि सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद सरकार इसमें कोई दखलअंदाज़ी करेगी या नहीं। 

न्यायालय ने सुनवाई के दौरान कड़ी प्रतिक्रिया जारी करते हुए कहा कि यह दूरसंचार विभाग के ‘डेस्क अधिकारी’ का दुस्साहस है कि उसने न्यायालय के आदेश को काटने की कोशिश की। न्यायालय ने भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया जैसी कंपनियों को सरकार का सांविधिक बकाया 23 जनवरी तक चुकाने का आदेश दिया था। लेकिन डेस्क अधिकारी ने 23 जनवरी को ही उपरोक्त आदेश पारित किया, जिसे लेकर न्यायालय ने शुक्रवार को कड़ी नाराजगी जाहिर की। इसके साथ ही अधिकारी के खिलाफ अवमानना कार्रवाई करने की भी बात कही गई।

सुनवाई के दौरान जस्टिस अरुण मिश्रा ने फटकार लगाते हुए कहा, “क्या यह सर्वोच्च न्यायालय के लिए सम्मान है? एक डेस्क अधिकारी कैसे कह सकता है कि हमारे आदेश के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई? अगर आपके मन में कोर्ट के आदेश के प्रति यही सम्मान है तो फिर बंद कर दीजिए सुप्रीम कोर्ट… देश में कानून का कोई राज नहीं है। इससे तो अच्छा है कि देश ही छोड़ दिया जाए। ऐसा लगता है कि मुझे इस देश में इस तरह काम नहीं करना चाहिए। मैं ये बातें जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूँ। क्या सुप्रीम कोर्ट की कोई वैल्यू नहीं है? ये मनी पावर का परिणाम है। ये इस देश में क्या हो रहा है?”

आगे बेंच ने सॉलिसीटर तुषार मेहता से कहा, “वह (डीओटी अधिकारी) कहते हैं कि अगले आदेश तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाएगी। उसने हमारे आदेश को रद्द कर दिया है। क्या आपने उसे उस आदेश को वापस लेने के लिए कहा है? इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती है और हम इस तरह से कार्य नहीं कर सकते हैं।”

जिसके बाद तुषार मेहता ने अदालत से माफी माँगी और आश्वासन दिया कि आदेश को वापस ले लिया जाएगा और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद शाम में दूरसंचार विभाग ने टेलीकॉम और पब्लिक सेक्टर कंपनियों के दो अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। बता दें कि पब्लिक सेक्टर की जिन कंपनियों पर भारी मात्रा में बकाया है, उनमें गैस ऑथोरिटी ऑफ इंडिया, ऑयल इंडिया, पावरग्रिड कॉर्पोरेशन और दिल्ली मेट्रो शामिल हैं। बता दें कि GAIL के ऊपर 1,72,656 करोड़ रुपए का बकाया है, तो वहीं ऑयल इंडिया के ऊपर 48,489 करोड़ रुपए का बकाया है। इसके साथ ही पॉवरग्रिड कॉर्पोरेशन को 22,063 करोड़ राशि का भुगतान करना होगा।

ऑपइंडिया स्टाफ़: कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया