पश्चिम बंगाल के स्कूलों में 8611 कर्मचारियों की नियुक्ति में हुआ घोटाला: WBSSC ने कलकत्ता हाईकोर्ट में भी माना, OMR शीट में गड़बड़ी कर के हुई थी भर्तियाँ

पश्चिम बंगाल SSC ने कलकत्ता हाईकोर्ट में माना - शिक्षक भर्ती में हुआ घोटाला (फोटो साभार: NDTV/फेसबुक/ममता बनर्जी)

कलकत्ता उच्च न्यायालय में दायर किए गए एक एफिडेविट में शुक्रवार (22 दिसंबर, 2023) को ‘वेस्ट बंगाल स्टेट सर्विस कमीशन (WBSCC)’ ने कबूल किया है कि राज्य सरकार द्वारा संचालित स्कूलों में 8611 कर्मचारियों की नियुक्ति में अनियमितताएँ हुई हैं। संस्था ने माना है कि 2016 में इसके लिए हुई 3 परीक्षाओं में नियमों का उल्लंघन किया गया है। ये परीक्षाएँ कक्षा 9-10 को पढ़ने वाले शिक्षकों, ग्रुप C एवं D के कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए आयोजित की गई थीं।

ये भी सामने आया है कि ग्रुप D के 2823 कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए हुई परीक्षाओं में लगभग 170 लोगों को सीधे नौकरी दे दी गई, उन्हें कोई रिकमेंडेशन लेटर तक इशू नहीं किया गया। साथ ही OMR (ऑप्टिकल मार्किंग रीडर) शीट्स में भी गड़बड़ी की गई थी। वहीं ग्रुप C के लिए 3800 कर्मचारियों की भर्ती की गई थी। इसमें भी गड़बड़ OMR शीट्स का इस्तेमाल किया गया। 77 को बिना किसी रिकमेंडेशन लेटर के ही नौकरी दे दी गई।

वहीं कक्षा 11-12 के विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए 907 लोगों को OMR में गड़बड़ी कर के नियुक्ति दी गई, वहीं 39 लोगों को सीधे ऊँचे रैंक की नौकरी दे दी गई। कक्षा 9-10 के शिक्षकों के लिए 183 लोगों को नौकरियाँ दी गईं। OMR फ्रॉड कर के इस तरह कुल 972 कर्मचारियों को नौकरी दी गई। पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती घोटाला को SSC घोटाले के नाम से भी जाना जाता है, जिसके लिए ‘स्टेट लेवल सेकेलशन टेस्ट (SLST)’ के तहत परीक्षाएँ ली जाती हैं।

2014 में पश्चिम बंगाल SSC ने ही घोषणा की थी कि SLST के जरिए राज्य द्वारा संचालित स्कूलों में भर्तियाँ की जाएँगी। 2016 में हायरिंग की प्रक्रिया शुरू की गई। उस समय पार्था चटर्जी राज्य में उच्च शिक्षा मंत्री हुआ करते थे। हायरिंग की प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर कलकत्ता उच्च न्यायालय में कई याचिकाएँ दायर की गई थीं। कम मार्क्स वाले कई अभ्यर्थियों को ऊँची रैंक दे दी गई। जो मेरिट लिस्ट में नहीं थे, उन्हें भी नियुक्ति पत्र मिल गया।

2016 में ‘स्कूल सर्विस कमीशन (SSC)’ द्वारा राज्य द्वारा संचालित एवं समर्थित स्कूलों में ग्रुप D कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए एक अलग अधिसूचना जारी की गई थी। रिक्रूमेंट 2019 में ही एक्सपायर हो गया था। लेकिन, आरोप है कि WBBSE ने 25 लोगों की नियुक्ति कर दी। सुनवाई के दौरान पता चला कि 25 नहीं बल्कि 500 लोगों की नियुक्ति उस पैनल ने कर दी जो एक्सपायर हो चुका था। CBI ने पश्चिम बंगाल के शिक्षा मंत्री परेश अधिकारी और उनकी बेटी अंकिता के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

ऑपइंडिया स्टाफ़: कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया