आतंकी मसूद अजहर मामले में चीन बैकफुट पर, तकनीकी रोक हटाने को तैयार, घोषित हो सकता है वैश्विक आतंकी

मसूद अजहर (फाइल फोटो)

पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को 1 मई को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया जा सकता है। खबरों के मुताबिक, मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने की राह में रोड़े अटका रहा चीन संयुक्त राष्ट्र समिति में 1 मई को अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने में लगाई गई तकनीकी रोक हटा लेगा। अगर मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित कर दिया जाता है, तो ये मोदी सरकार की एक बड़ी कूटनीतिक जीत होगी, क्योंकि भारत काफी लंबे समय से खासकर, 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद से इसके लिए जोर दे रहा है , मगर चीन लगातार अपनी वीटो का इस्तेमाल कर रोड़ा अटका रहा है।

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एक वरिष्ठ अधिकारी ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि अगर मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किया जाता है, तो यह उसके लिए मौत की चेतावनी होगी। पुलवामा हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका, फ्रांस और यूके के नेतृत्व में मसूद को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने की माँग की गई थी, लेकिन चीन ने उसका बचाव किया था। उन्होंने बताया कि अमेरिका, ब्रिटेन और फ्राँस द्वारा 13 मार्च को रखे गए प्रस्ताव पर चीन के तकनीकी पकड़ हटाने की उम्मीद है। वहीं सभी सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्यों ने इस कदम को पहले ही मंजूरी दे दी है।

वहीं, पाकिस्तान भी मसूद अजहर को ब्लैक लिस्ट करने के लिए तैयार है, मगर इसके लिए उसने एक शर्त भी रख दी है कि इसका आधार पुलवामा हमला नहीं होना चाहिए। रविवार (अप्रैल 28, 2019) को एक पाकिस्तानी टीवी शो में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने कहा, “हमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) द्वारा मसूद अजहर को वैश्विक आतंकियों की सूची में डालने से कोई दिक्कत नहीं है, बशर्ते इसका आधार पुलवामा हमला न हो।” फैसल ने कहा, “पहले भारत को इस बात का सुबूत देना होगा कि पुलवामा हमले से मसूद अजहर का कोई संबंध है। इसके बाद ही हम उसको प्रतिबंधित करने के बारे में बात कर सकते हैं। पुलवामा हमला एक अलग मुद्दा है। हम कई बार कह चुके हैं कि भारत कश्मीर में स्थानीय विरोध को कुचलने की कोशिश कर रहा है।”

हालाँकि, 50 वर्षीय अजहर जानलेवा बीमारी से ग्रसित है, लेकिन फिर भी वो अपने भाई अतहर इब्राहिम और रऊफ असगर की मदद से भारत के खिलाफ हमलों में सक्रिय भूमिका निभाता है। गौरतलब है कि 14 फरवरी को पुलवामा में हुए सीआरपीएफ के काफिले पर हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली थी। इससे पहले 2016 में पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले का भी जिम्मेदार भी यही आतंकी संगठन  है।

ऑपइंडिया स्टाफ़: कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया