पाकिस्तान में जबरन धर्मांतरण कर 2 हिंदू युवतियों का कराया निकाह, कोर्ट ने माता-पिता से कहा- बच्चियाँ चाहिए तो ₹10 करोड़ दो: USCIRF ने PAK में गैर-मुस्लिमों पर हो रहे उत्पीड़न का किया खुलासा

पाकिस्तान में गैर मुस्लिमों पर अत्याचार बढ़े हैं। USCIRF की रिपोर्ट से पता चलता है कि जबरन धर्मांतरण और ईशनिंदा से जुड़े मामले बढ़े हैं। सिंध और पंजाब में हिन्दुओं और ईसाई युवतियों का अपहरण कर उन्हें जबरन धर्मांतरण कर निकाह कराया जा रहा है। संगठन ने पाकिस्तान से ईशनिंदा कानून को जल्द से जल्द निरस्त करने और धार्मिक अल्पसंख्यकों को सुरक्षा देने की माँग की है।

रबवाह टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में अहमदिया मुस्लिमों के साथ भी सौतेला व्यवहार किया जाता है। पाकिस्तानी कानून उन्हें मुस्लिम मानने से रोकता है। रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में अहमदियों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में काफी इजाफा हुआ है। पंजाब में 10 दिनों के भीतर 3 अहमदी मस्जिदों को ध्वस्त कर दिया गया। करीब 400 लोगों की भीड़ अचानक मस्जिद तक पहुँची और हमला कर दिया। इस दौरान अहमदी मौलाना लईक चीमा की मॉबलिंचिंग की गई। उन पर पहले भी हमले हुए थे।

रिपोर्ट में टारगेट किलिंग की भी जानकारी दी गई है। मार्च 2025 में कराची में दो अहमदी मुस्लिम पर भीड़ ने हमला कर दिया जिसमें एक शेख महमूद की मौत गई जबकि दूसरे को एक अज्ञात बंदूकधारी ने गोली मार दी। अहमदी मुस्लिम लगातार उत्पीड़न के शिकार हो रहे हैं। यहाँ तक कि उनके घरों को नीलाम कर दिया। पंजाब पुलिस ने 42 अहमदियों पर सिर्फ इसलिए केस दर्ज किया, क्योंकि उनके घर मस्जिद के सामने थे। ईद के दौरान कोर्ट ने पुलिस को आदेश दिया था कि अहमदी किसी भी हाल में मस्जिद में नमाज के लिए न जाएँ।

हिन्दुओं और ईसाइयों का जबरन धर्मांतरण

USCIRF की रिपोर्ट में जबरन धर्मांतरण के खतरे को बताया गया है। खास कर सिंध और पंजाब में रहने वाले हिन्दू युवतियों और ईसाई युवतियों को लेकर। इनलोगों का जबरन धर्मांतरण करा कर मुस्लिम व्यक्ति से निकाह करा दिया जा रहा है। इनकी कहीं सुनवाई नहीं हो रही। न तो पुलिस सुनती है और नही कानून।

जून 2025 में 3 हिन्दू लड़कियों और उसके कजन भाईयों को जबरदस्त सिंध में स्थानीय टीचर ने इस्लाम कबूल करने के लिए बाध्य किया। दूसरे मामले में जून में ही दो नाबालिग हिंदू लड़कियों का अपहरण कर उनका धर्म परिवर्तन कराया गया और उनका मुस्लिम व्यक्ति से निकाह करा दिया गया। कोर्ट ने लड़कियों ने माता-पिता से उनकी वापसी के लिए 10 करोड़ रुपए (35,000 डॉलर) का बांड भरने को कहा।

पाकिस्तान की संसद ने मई 2025 में इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र बाल विवाह निरोधक कानून पारित किया था। ये 18 साल से कम उम्र में निकाह को अपराध घोषित करता है। लेकिन यह कानून केवल इस्लामाबाद में ही लागू होता है। इस्लामिक परिषद ने इस कानून की निंदा करते हुए इसे ‘गैर-इस्लामी’ करार दिया।

ईशनिंदा कानून के जरिए गैरमुस्लिमों पर अत्याचार

पाकिस्तान के ईशनिंदा कानून धार्मिक उत्पीड़न का एक आधार बन गया है। इस कानून में मौत सहित कठोर दंड का प्रावधान है। यूएससीआईआरएफ की रिपोर्ट से पता चलता है कि 2024 तक 750 से ज़्यादा लोगों को ईशनिंदा के आरोप में जेल में डाला गया।

जनवरी 2025 में सोशल मीडिया के माध्यम से कथित तौर पर ईशनिंदा वाली सामग्री साझा करने के आरोप में चार लोगों को मौत की सजा दी गई। रिपोर्ट में 2013 में ईशनिंदा के आरोप में गिरफ्तार किए गए विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जुनैद हफीज की दुर्दशा की जानकारी भी दी गई। 2014 से उन्हें जेल में डाल दिया गया और उनकी सुनवाई में भी देरी हुई।