Homeदेश-समाजबंगाल में कट मनी: TMC पार्षद के भाई की धुनाई, चप्पलों की माला पहनाई

बंगाल में कट मनी: TMC पार्षद के भाई की धुनाई, चप्पलों की माला पहनाई

ग्रामीणों का कहना है कि कंचन गिरी ने नौकरी दिलवाने के नाम पर उन लोगों से कट मनी के रूप में 1 करोड़ से अधिक रुपए लिए थे। जब लोगों ने नौकरी के बारे में पूछना शुरू किया तो उसने ग्रामीणों से मिलना छोड़ दिया।

पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के एक पार्षद के चचेरे भाई को पूर्वी मिदनापुर के मारिशदा गाँव में भीड़ ने जमकर पीटा और उसके बाद चप्पलों की माला पहना कर घुमाया। ग्रामीणों की मानें तो पार्षद अतनु गिरी के भाई कंचन गिरी ने नौकरी दिलवाने के नाम पर उन लोगों से कट मनी के रूप में 1 करोड़ से अधिक रुपए लिए थे।

घटना का वीडिया बनाकर वायरल करने वाले समूह का दावा है कि अतनु गिरी के भाई ने कम से कम 100 ग्रामीणों से पैसे लिए थे। वहीं, अतनु गिरी का कहना है कि इस घटना के बाद से वह कंचन के संपर्क में नहीं थे।

मीडिया रिपोर्टों की मानें तो एक गाँव वाले ने बताया कि कंचन पिछले 4 सालों में नौकरी दिलाने के नाम उनके गाँव के कई निवासियों से 1 करोड़ से अधिक की वसूली कर चुका है। लेकिन जब कुछ समय बाद जब लोग नौकरियों के बारे में पूछने लगे तो उसने आना बंद कर दिया।

स्थानीय लोगों की मानें तो कंचन पास में ही रहता था, लेकिन उनसे मिलता नहीं था। शनिवार (10 अगस्त 2019) को लोगों ने उसकी कार को रोक लिया और उसे कार से बाहर निकाला।

लोगों ने दावा किया कि इस दौरान उन्होंने कंचन समेत एक ठेकेदार और एक संदिग्ध तृणमूल कार्यकर्ता की पिटाई की और बाद में उन्हें छोड़ दिया। वहीं, टीएमसी पार्षद अतनु ने अपने चचरे भाई के साथ सीधे संपर्क होने से इंकार किया है। अतनु ने मामले के संबंध में कहा, “मुझे इन नौकरी के आश्वासनों के बारे में नहीं पता था। मैं कंचन के संपर्क में नहीं रहता।”

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी, केजरीवाल-मान-सिसोदिया के साथ तस्वीरें: कौन है AAP नेता अशोक ओझा, जो अपनी ही पार्टी के नेताओं को IB के नाम...

अशोक ओझा केवल शहर स्तर का पदाधिकारी नहीं था, बल्कि पार्टी के बड़े नेताओं के साथ सीधा संपर्क रखने वाला और संगठन में पहचान रखने वाला चेहरा था।

जनगणना में मातृभाषा का एक जवाब तय करता है देश का बजट, शिक्षा नीति और राजनीतिक प्रतिनिधित्व: जानिए उर्दू-अरबी से लेकर 19000 भाषाई पहचान...

लोकतंत्र में संख्या बल ही किसी भी भाषाई समूह की माँगों को मजबूती देता है। बहुभाषी भारत में यह जनगणना तय करती है कि आने वाले समय में सरकारी संसाधन और प्रशासनिक विकास किस दिशा में आगे बढ़ेंगे।
- विज्ञापन -