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कश्मीर में शेहला रशीद बनना चाहती थीं नेता, मगर लोकतंत्र की दुहाई दे भाग गईं

शेहला ने इस साल की शुरुआत में पूर्व आईएएस और जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट के नेता शाह फैसल की पार्टी ज्वाइन की थी। लेकिन, अनुच्छेद 370 के प्रावधान निरस्त होने के बाद से उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

समय-समय पर कश्मीर की आज़ादी के लिए आवाज़ उठाने वाली जेएनयू की शेहला रशीद ने चुनावी राजनीति से आजादी का ऐलान कर दिया है। शेहला हाल में कश्मीर को लेकर सनसनीखेज दावें कर सुर्खियों में आई थीं। उन्होंने कहा था कि आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद सेना लोगों को प्रताड़ित कर रही है। इस मामले को लेकर उनके खिलाफ राजद्रोह का मुकदमा किया गया था।

अब उन्होंने कश्मीर की चुनावी राजनीति से अलग रहने का ऐलान किया है। उन्होंने यह घोषणा ऐसे वक्त में की है जब जम्मू-कश्मीर में बीडीसी यानी ब्लॉक डेवलपमेंट कौंसिल के चुनाव होने हैं। राजनीति से तौबा करने का दोष भी उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर ही मढ़ा है। उन्होंने कहा है कि कश्मीर में जो कुछ हो रहा है उसे वह बर्दाश्त नहीं कर पा रही, इसलिए चुनावी राजनीति से दूर करने का फैसला किया है। ट्वीट कर उन्होंने बकायदा इसकी जानकारी दी है।

शेहला ने इस साल की शुरुआत में पूर्व आईएएस और जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (जेकेपीएम) के नेता शाह फैसल की पार्टी भी ज्वाइन की थी। लेकिन, केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 को निरस्त कर दिया। इसके बाद से आतंकवाद की दुकान बंद होने के गम में देशभर के वामपंथी गिरोह तमाम तरीकों से छाती कूटकर कर अपना गुस्सा ज़ाहिर कर रहे हैं। मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर राज्य को दो नए केंद्र शासित जम्मू/कश्मीर और लद्दाख प्रान्त में बाँट दिया है। इनमे से एक (लद्दाख) को पूर्ण केंद्र शासित प्रदेश होगा, जबकि दूसरा (जम्मू-कश्मीर) में विधानसभा के साथ केंद्र शासित प्रदेश होगा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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