जिसे फारसी इतिहासकार ने कहा था रोम से भी सुंदर और समृद्ध, उसे इस्लामी आक्रांताओं ने बना डाला ‘खंडहरों का शहर’: मंदिरों के नगर को बर्बरता से लूटा

विश्व धरोहर हम्पी (फोटो साभार: न्यूज मिनट/ओपेन मैगनजीन)

कर्नाटक का हम्पी (Humpi, Karnataka) को कभी ‘मंदिरों का नगर’ (City of Temple) कहा जाता था, आज इसे ‘खंडहरों का शहर’ (City of Ruins) कहा जाता है। यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची (UNESCO World Heritage Sites) में शामिल इस स्थान को देखकर इसके अतीत के वैभव का अंदाजा लग सकता है।

समय परिवर्तनशील होता है और उसकी अपनी गति होती है। समय ने कुछ ऐसी गति पकड़ी कि यह शहर मुस्लिम आक्रमणकारियों के निशाने पर आ गया और इसे लूटने के बाद शहर का पूरी तरह विध्वंस कर दिया गया। आज हम्पी में भव्य मंदिरों एवं प्रासादों के अवशेष हैं।

हम्पी का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। इसका वर्णन रामायण और पुराणों में ‘पम्पा देवी तीर्थ क्षेत्र’ के रूप में किया गया है। इसे ‘किष्किंधा’ भी कहा गया है। यहाँ ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी के अशोक महान के समय के प्रमाण मिल चुके हैं। 15वीं शताब्दी में यह शहर कर्नाटक के विजयनगर के अंतिम प्रमुख हिंदू साम्राज्य का अभिन्न अंग था।

तुंगभद्रा नदी के तट पर बसा हम्पी आज 1,600 से अधिक जीवंत अवशेषों का साक्षी है, जिनमें दुर्ग, राजमहल, राजप्रासाद, मंदिर, स्तंभ, मंडप, स्मारक, जल संरचनाएँ आदि शामिल हैं। इन खंडहरों में भी भव्यता है, जो गौरवशाली इतिहास के चमकते पृष्ठ हैं।

रोम से भी खूबसूरत और समृद्ध था हम्पी

विजयनगर साम्राज्य पर 1509-29 तक कृष्णदेव राय का शासन था। उस साम्राज्य के अधीन वर्तमान कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के भूभाग आते थे। हम्पी विजयनगर साम्राज्य का प्रमुख केंद्र था। यहाँ रोम से लेकर पुर्तगाल के व्यापारी आते थे। कहा जाता है कि विजयनगर साम्राज्य में हम्पी अपने वैभव के चरमोत्कर्ष पर था और उसे रोम से भी सुंदर शहर कहा जाता था।

15वीं शताब्दी में विजयनगर का दौरा करने वाले फ़ारसी यात्री अब्दुर रज्जाक ने अपने संस्मरणों में हम्पी और विजयनगर का वर्णन किया है। रज्जाक ने लिखा है, “यह देश इतनी आबादी वाला है कि एक इसके बारे में एक विचार व्यक्त करना असंभव है।ठ

वह आगे लिखता है, “राजा के खजाने में कई कक्ष हैं, जिनमें पिघलाए हुए सोने से भरा हुआ है। देश के सभी निवासी, चाहे उच्च हों या नीच, यहाँ तक कि बाज़ार के कारीगर तक अपने गले, हाथ, कलाई, उंगलियों और कानों में आभूषण पहनते हैं।”

अब्दुर रज्जाक ने राजधानी की भव्यता को लेकर कहा था, “विजयनगर के समान दुनिया में कोई शहर नहीं है। यह ऐसा है कि आँख की पुतली ने कभी इस तरह की जगह नहीं देखी और ना ही बुद्धि के कान को कभी यह सूचित गया है कि पूरी दुनिया में इसके बराबर भी कुछ मौजूद है।”

हम्पी का विध्वंस

कृष्णदेव राय की मृत्यु के बाद विजयनगर साम्राज्य के शासक आलिया राम राय बने। आलिया राम राय के शासनकाल में सन 1565 में बीदर, बीजापुर, गोलकुंडा, अहमदनगर और बरार के मुस्लिम शासकों की संयुक्त सेनाओं ने विजयनगर पर आक्रमण कर दिया।

ये पाँचों राज्य कभी दिल्ली सल्तनत मुहम्मद बिन तुगलक के अधीन थे, लेकिन बाद में खुद को स्वतंत्र घोषित कर दिया था। विजयनगर साम्राज्य और दक्कन सल्तनत की सेनाओं के बीच भयानक लड़ाई हुई, जिसे ‘तालिकोटा की लड़ाई’ के नाम से जाना जाता है।

युद्ध के दौरान राम राय के दो मुस्लिम सेनापतियों ने अचानक पक्ष बदल लिया और वे मुस्लिम हमलावरों से जा मिले। इन दोनों ने राम राय को पकड़ लिया और युद्ध के मैदान में ही उनका सिर काट कर हत्या कर दी गई। इसके बाद विजयनगर की सेना में भगदड़ मच गई और हार हुई।

हार के बाद सल्तनत की सेना ने हम्पी को खूब लूटा और इसे खंडहर में बदल दिया। अपनी पुस्तक ‘द फॉरगॉटेन एम्पायरट‘ में रॉबर्ट सेवेल ने लिखा है, “आग और तलवार के साथ वे (मुस्लिम) विनाश को अंजाम दे रहे थे। शायद दुनिया के इतिहास में ऐसा कहर कभी नहीं ढाया गया। इस तरह एक समृद्ध शहर का लूटने के बाद नष्ट कर दिया गया और वहाँ के लोगों का बर्बर तरीके से नरसंहार कर दिया गया।”

शहर के प्रमुख ऐतिहासिक केंद्र

हम्पी में लगभग 1600 हिंदू, बौद्ध और जैन मंदिर थे। ये वास्तुकला के उत्कृष्ट नमूना थे। इसकी झलक आज भी इनके अवशेषों में मिलती है। ग्रेनाइट के पत्थरों को काटकर दिए गए रूप शिल्पकला की अद्भुत समृद्धता का बखान करती हैं यहाँ की मूर्तियाँ। इनमें कुछ मंदिर बेहद महत्वपूर्ण हैं।

विट्ठल मंदिर: शहर के सबसे भव्य एव प्रभावशाली मंदिरों में से एक विठ्ठल मंदिर है। इसे 16वीं शताब्दी में बनाया गया था। उसकी बनावट अद्भुत और समृद्ध वास्तुकला के सौंदर्य को उजागर करता है।इसके आगे एक विशाल प्रांगण एवं मंदिर का केंद्र है। इसे हम्पी रथ भी कहा जाता है।

विरुपाक्ष मंदिर: विरुपाक्ष मंदिर भगवना विष्णु को समर्पित है। इसे राजा कृष्णदेव राय ने 1509 में अपने अभिषेक के दौरान बनवाया था। हेमकुटा पहाड़ियों के नीचे बसे हम्पी में अनेक छोटे-छोटे मंदिर हैं।

इसके पूर्व में पत्थर का एक विशाल नंदी है और दक्षिण में भगवान गणेश की प्रतिमा है। यहाँ अर्ध सिंह और अर्ध मनुष्य की देह धारण किए नरसिंह की 6.7 मीटर ऊँची मूर्ति है। इन्हें उग्र नरसिंह भी कहा जाता है।

लक्ष्मी नरसिम्हा मंदिर, विशाल शिवलिंग, मूपवित्र केंद्र, अच्युत राय के मंदिर, ससिवेकलु गणेश, महानवमी, ग्रनारीस, हरिहर पैलेस, रिवरसाइड खंडहर, जज्जल मंडप, पुरंदरदास मंडप, तालरिगट्टा गेट सहित सैकड़ों दर्शनीय स्थल हैं।

सुधीर गहलोत: इतिहास प्रेमी