दरअसल गणतंत्र दिवस के दिन आईपीएस और एडीजी राजा बाबू सिंह ने इस्लामिया मदीनतुल उलूम के छात्रों को गीता के कर्मयोग और नैतिक मूल्यों की शिक्षा के बारे में बताया और कहा कि इससे सकारात्मक सोच और एक जिम्मेदार नागरिक बनने की भावना पैदा होती है।
एडीजी के सुझाव पर मदरसे के संचालक अमीन उल्लाह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिस किताब से समाज और देश को आगे बढ़ने में मदद मिलती है और सकारात्मक सीख मिलती है, उसे पढ़ने में कोई गुरेज नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले वे गीता पढ़ेंगे और फिर छात्रों को इसकी तालीम देंगे।
एडीजी के सुझाव का स्थानीय बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मदरसे में हिन्दू बच्चे भी पढ़ते हैं और वो कुरान पढ़ सकते हैं तो सभी छात्र गीता क्यों नहीं पढ़ सकते।
इस मामले पर कॉन्ग्रेस नेता अब्बास हफीज का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि मदरसे में तालीम देने का काम मौलाना बखूबी कर रहे हैं, उन्हें ज्ञान देने की जरूरत नहीं है। एडीजी कानून व्यवस्था को दुरुस्त करें, इलाके में लूट और अपराध बढ़ गए हैं। इसे कम करने के बारे में सोचें

