Sunday, September 8, 2024
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स्वतंत्र भारत का पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक दिलाने वाले बलबीर सिंह सीनियर का निधन

जिस 'गुलाम' भारत के खिलाफ अंग्रेजी टीम ने खेलने से किया था इनकार, उसी को फाइनल में 4-0 से हरा कर स्वतंत्र भारत का पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक जीता था। इन 4 गोल में से 2 गोल अकेले बलबीर सिंह सीनियर ने किया था।

भारतीय हॉकी टीम को तीन गोल्ड मेडल जिताने वाले हॉकी के दिग्गज बलबीर सिंह सीनियर का चंडीगढ़ में सोमवार (25 मई, 2020) सुबह निधन हो गया। वे 95 वर्ष के थे। बलबीर पिछले दो साल से फेफड़े की बीमारी से जूझ रहे थे।

बलबीर सिंह ने 1948 में लंदन ओलंपिक में अर्जेंटीना के खिलाफ डेब्यू किया था। उन्होंने ग्रेट ब्रिटेन के खिलाफ फाइनल मैच में दो गोल किए थे, जिसमें स्वतंत्र भारत का पहला ओलंपिक स्वर्ण पदक दर्ज किया गया था। साथ ही 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में भारत को स्वर्ण पदक जीतने में अहम भूमिका निभाई थी।

उन्हें 1956 मेलबर्न ओलंपिक में भारत का कप्तान नियुक्त किया गया था, जहाँ उन्होंने उद्घाटन समारोह में भारत का झंडा बुलंद किया था। 1957 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया, यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय हॉकी खिलाड़ी थे।

नई दिल्ली में आयोजित 1982 के एशियाई खेलों में मशाल भी बलबीर सिंह ने जलाई थी। देश के महानतम एथलीटों में से एक बलबीर सीनियर अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति द्वारा चुने गए आधुनिक ओलिंपिक इतिहास के 16 महानतम ओलंपियनों में शामिल थे। हेलसिंकी ओलिंपिक में नेदरलैंड्स के खिलाफ 6-1 से मिली जीत में उन्होंने पाँच गोल किए थे और यह रिकॉर्ड अभी भी बरकरार है।

इस महीने की शुरुआत में कार्डियक अरेस्ट से पीड़ित होने के बाद उन्हें मोहाली के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उनका इलाज चल रहा था। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें ब्रोन्कियल निमोनिया और तेज बुखार के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जिसके बाद वह 12 मई से वेंटिलेटर पर थे। इसका असर उनके विभिन्न अंगों पर भी पड़ रहा था। उन्होंने सुबह 6:17 बजे अंतिम साँस ली।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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