Homeदेश-समाजअसमिया गायक भूपेन हजारिका के अलावा इन 2 हस्तियों को मिलेगा आज भारत का...

असमिया गायक भूपेन हजारिका के अलावा इन 2 हस्तियों को मिलेगा आज भारत का सर्वोच्च सम्मान

नानाजी देशमुख के बारे में बताया जाता है कि 1977 में जनता पार्टी की सरकार में जब मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने नानाजी देशमुख को उद्योग मंत्री का पद स्वीकारने का न्यौता दिया लेकिन नानाजी ने इस प्रस्ताव को विनम्रता से नकार दिया।

कवि, गीतकार, गायक, अभिनेता, लेखक, पत्रकार, फिल्मकार के रूप में खुद की छवि स्थापित करने वाले भूपेन हजारिका को आज देश का सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न दिया जाना है। इसके अलावा भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और सामाजिक कार्यकर्ता नानाजी देशमुख को भी आज राष्ट्रपति द्वारा भारत रत्न सम्मान दिया जाना है।

एक ओर जहाँ असमिया गायक भूपेन हजारिका को यह भारत रत्न मरणोपरांत उनकी असाधारण प्रतिभा के कारण दिया जा रहा है तो वहीं राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को ये रत्न राजनीति में लंबी पारी के लिए दिया जा रहा है। उधर, नानाजी देशमुख को ये सम्मान देश की बड़े स्तर पर समाज सेवा करने के लिए दिया जाएगा।

इन तीनों नामों ने भारत को अपने-अपने क्षेत्र में एक नए आयाम दिए। भूपेन दा ने जैसे असम की समृद्ध लोक धरोहर को अपने गानों के माध्यम से सुंदरतापूर्वक व्याख्यायित करके दुनिया के सामने पेश किया वह अविस्मरणीय है। जबकि कोलकाता के डिप्टी अकाउंटेंट जनरल कार्यालय में बतौर क्लर्क अपना करियर शुरू करने वाले प्रणव मुखर्जी अपनी मेहनत और बुद्धिमत्ता के बल पर राजनीति से जुड़े और जिस तरह से उन्होंने इस क्षेत्र में काम किया, उसने न केवल उन्हें सराहना के लायक बनाया बल्कि देश के सर्वोच्च पद पर आसीन भी करवाया।

नानाजी देशमुख के बारे में बताया जाता है कि 1977 में जनता पार्टी की सरकार में जब मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने नानाजी देशमुख को उद्योग मंत्री का पद स्वीकारने का न्यौता दिया लेकिन नानाजी ने इस प्रस्ताव को विनम्रता से नकार दिया। इसके साल भर बाद ही उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया और रचनात्मक कार्यों में जुट गए।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

कुएँ में कूदने की जगह नहीं बची तो रोने लगीं हिंदू महिलाएँ: जानिए- 1947 में रावलपिंडी के तोहा खालसा में 90 हिंदू-सिख महिलाओं ने...

जानिए 1947 के रावलपिंडी दंगों में तोहा खालसा की 93 हिंदू महिलाओं के कुएँ में एक साथ कूदकर जान देने की दर्दनाक कहानी।

क्या आंतरिक मतभेद को चुनावी हेरफेर का सबूत मानना सही है?

चुनाव आयोग की 14 आपत्तियों, SIR और वोटर डेटा विवाद के बीच जानिए, क्या आंतरिक मतभेद चुनावी हेरफेर का प्रमाण हैं?
- विज्ञापन -