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20 साल बाद मणिपुर में दिखाई गई हिंदी फिल्म: सर्जिकल स्ट्राइक की कहानी भी देखेंगे लोग, जनजातीय संगठन करा रहा है स्क्रीनिंग

बयान में ये भी कहा गया है, "हम उन राष्ट्र-विरोधी आतंकवादी समूहों से अपनी 'आज़ादी' की ऐलान करेंगे जिन्होंने स्वतंत्रता दिवस के बहिष्कार की घोषणा की है।"

देश में आजादी की 77वीं वर्षगाँठ पर हिंसा प्रभावित देश के पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर से सकारात्मक खबर आई है। यहाँ मंगलवार (15 अगस्त, 2023) की शाम 20 साल बाद कोई हिंदी फिल्म दिखाई जा रही है। ये फिल्म हिंसा से सबसे अधिक प्रभावित चुराचाँदपुर जिले के रेंगकाई ( (लाम्का) एचएसए परिसर में दिखाई जा रही है।

हालाँकि, इसमें फिल्म के नाम का खुलासा नहीं किया गया। हिंदी फिल्म दिखाने का ये फैसला राज्य के आदिवासी छात्रों के संगठन ‘हमार स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एचएसए)’ का है। एचएसए ने सोमवार (14 अगस्त) को आधी रात के बाद स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में हिंदी फिल्म दिखाने का बयान जारी किया। हालाँकि, संगठन ने अपने बयान में कुछ आपत्तिजनक बातें भी कही हैं।

‘आज़ादी’ की ऐलान करेंगे’

नॉर्थईस्ट नाउ न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, एचएएस ने एक बयान में कहा कि संगठन देश के 77वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के उपलक्ष्य में मंगलवार (15 अगस्त) को मणिपुर में सार्वजनिक तौर से एक हिंदी फिल्म प्रदर्शित किया। कुल मिलाकर, चार हिंदी फिल्में प्रदर्शित की जा रही हैं, जिनमें ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ और शाहरुख खान अभिनीत ‘कुछ कुछ होता है’ शामिल हैं।

बयान में ये भी कहा गया है, “हम उन राष्ट्र-विरोधी आतंकवादी समूहों से अपनी ‘आज़ादी’ का ऐलान करेंगे जिन्होंने स्वतंत्रता दिवस के बहिष्कार की घोषणा की है।” एचएसए के बयान में कहा गया है, “हमारा स्टूडेंट्स एसोसिएशन तुइथाफाई जेएचक्यू देश के स्वतंत्रता दिवस को चिह्नित करने के लिए सार्वजनिक तौर से हिंदी फिल्में प्रदर्शित करेगा। यह मैतेई आतंकवादी समूहों और मैतेई समर्थक मणिपुर राज्य सरकार के प्रति हमारी अवज्ञा और विरोध को दर्शाने के लिए है, जिन्होंने दशकों से जनजातीय समाज को अपने अधीन कर रखा है।”

बयान में आगे कहा गया है, “कानून और व्यवस्था बहाल करने में भारतीय सेना की कोशिशों को समर्थन देने के लिए ग्रामीणों को ‘सबक’ सिखाने के लिए 2006 में मैतेई आतंकवादी समूह यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट/कंगलेइपाक कम्युनिस्ट पार्टी के कैडरों ने 20 से अधिक हमार महिलाओं, कुछ नाबालिगों के साथ बलात्कार किया गया था। अब, 2023 में, हम एक प्रमुख समुदाय से आने वाले मुख्यमंत्री के नेतृत्व में मणिपुर राज्य-प्रायोजित हिंसा का सामना कर रहे हैं। स्वतंत्रता और न्याय के लिए हमारी लड़ाई जारी रखने का संकल्प लेने के लिए हमारे साथ शामिल हों। यह उल्लेख किया जा सकता है कि मणिपुर में 20 साल से अधिक वक्त से हिंदी फिल्मों पर प्रतिबंध लगा हुआ है।”

2000 में लगा था हिंदी फिल्में दिखाने पर प्रतिबंध

मणिपुर में सक्रिय विभिन्न उग्रवादी संगठनों ने लोगों को मुख्य भूमि भारत से अलग-थलग करने की कोशिशों में राज्य में एक हिंदी फिल्म की स्क्रीनिंग पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, हिंदी फिल्मों की स्क्रीनिंग पर प्रतिबंध सितंबर 2000 में विद्रोही संगठन रिवोल्यूशनरी पीपुल्स फ्रंट ने लगाया था।

उग्रवादी संगठनों की धमकी के डर से राज्य के सिनेमाघरों में ज्यादातर अंग्रेजी, कोरियाई और मणिपुरी फिल्में दिखाई जाती हैं। मणिपुर की राजधानी इंफाल में 1998 में दिखाई गई आखिरी हिंदी फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ थी। गौरतलब है कि मणिपुर दो दशकों से अधिक समय से उग्रवाद से बुरी तरह प्रभावित है। दो दशकों से अधिक समय में पहली बार, स्वतंत्रता दिवस पर जातीय संघर्ष प्रभावित मणिपुर में एक हिंदी फिल्म दिखाई जा रही है। 

एचएसए का कहना है कि मणिपुर में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की गई आखिरी हिंदी फिल्म 1998 में ‘कुछ कुछ होता है’ थी। राज्य सरकार ने इससे पहले इम्फाल में सीमित दर्शकों के लिए ‘कश्मीर फाइल्स’ और ‘रॉकेटरी’ की स्क्रीनिंग की थी। गौरतलब है कि मणिपुर दो दशकों से अधिक समय से उग्रवाद से बुरी तरह प्रभावित है। दो दशकों से अधिक समय में पहली बार, स्वतंत्रता दिवस पर जातीय संघर्ष प्रभावित मणिपुर में एक हिंदी फिल्म दिखाई जा रही है।

चुराचाँदपुर के एक स्थानीय छात्र अमरजीत सिंह ने नॉर्थईस्ट नाउ को बताया, “मुझे बहुत खुशी है कि आज एक हिंदी फिल्म दिखाई जाएगी। मुझे कभी भी सार्वजनिक रूप से कोई हिंदी फिल्म देखने का सौभाग्य नहीं मिला। मैं अपने मोबाइल फोन पर केवल हिंदी ब्लॉकबस्टर्स देख रहा हूं। यह पहली बार होगा जब मुझे इसे बड़ी स्क्रीन पर देखने का मौका मिलेगा।”

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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