आर्थिक अपराध शाखा ने दावा किया है कि सौम्या चौरसिया ने 17 साल में 2.51 करोड़ रुपए वेतन पाए। लेकिन उन्होंने 49.69 करोड़ की संपत्ति अर्जित की। ये उनके आय से 1872 फीसदी ज्यादा है। EOW ने यह मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धाराओं 13(1)(बी) और 13(2) के तहत दर्ज किया है।
चार्जशीट में ये भी दावा किया गया है कि कई संपत्तियाँ सौम्या चौरसिया ने अपने रिश्तेदारों के नाम पर खरीदी। हालाँकि सौम्या ने एजेंसी को इसका कोई हिसाब या जवाब नहीं दिया। हालाँकि एजेंसी ने संपत्तियों को अटैच कर लिया है। ये संपत्ति पति सौरभ मोदी, माँ शांति देवी, बहन के ससुर मनसुख पटेल और फुफेरे भाई अनुराग चौरसिया के नाम पर है।
ईओडब्लू के मुताबिक, सौम्या के रिश्तेदारों के नाम पर 54 से अधिक संपत्तियाँ हैं, जिसकी कीमत करीब 49 करोड़ है। इनमें से ईडी ने 39 करोड़ रुपए की 29 संपत्तियाँ कुर्क की और ईओडब्लू ने 8.5 करोड़ रुपए की 16 संपत्तियाँ जब्त की हैं।
छत्तीसगढ़ में हुए 540 करोड़ रुपए के कोयला घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग, करप्शन और 47 करोड़ के डीएमएफ घोटाले को लेकर सौम्या के खिलाफ ईडी और ईओडब्लू ने केस दर्ज किया है। इनको लेकर सौम्या करीब ढ़ाई साल तक जेल में रही। वह कुछ दिनों पहले ही बाहर आईं हैं और बेंगलुरु में रह रही हैं।
सौम्या चौरसिया 2008 बैच की राज्य प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं। उनकी पहली नियुक्ति डिप्टी कलेक्टर के रूप में बिलासपुर में हुई थी। 2019 में उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के कार्यालय में उप सचिव नियुक्त किया गया। इसके बाद उनकी प्रशासन पर पकड़ जबरदस्त हो गई।

