दिल्ली की एक महिला ने आवारा कुत्तों के हमले के बाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन ऑफ दिल्ली (MCD) के खिलाफ हाईकोर्ट में मुआवजे की माँग की है। इस मामले ने एक बार फिर राजधानी में बढ़ते स्ट्रे डॉग खतरे और प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला मालवीय नगर के खिरकी विलेज रोड का है, जहाँ 7 मार्च 2025 की रात 9 बजे बैंक की असिस्टेंट ब्रांच मैनेजर प्रियंका राय पर आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया था। कोर्ट के दस्तावेजों के अनुसार, प्रियंका के पैरों पर 42 जगह काटने के निशान हैं, जिनमें एक तीसरे दर्जे का गहरा घाव भी शामिल है, जिससे उन्हें गंभीर चोट और मानसिक आघात पहुँचा।
प्रियंका ने कोर्ट में दाखिल याचिका में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के 2023 के आदेश का हवाला देते हुए कुल 20 लाख रुपए मुआवजे की माँग की है। इसमें 12 लाख रुपए घाव के क्षेत्रफल के लिए, 4.2 लाख दाँतों के निशानों के लिए और 3.8 लाख मानसिक पीड़ा के लिए माँगे गए हैं। कोर्ट ने MCD को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है और अगली सुनवाई मार्च 2026 में होगी।
इस बीच, सुप्रीम कोर्ट में भी देशभर में बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर सुनवाई चल रही है। यह मामला छह साल की बच्ची छवि की मौत के बाद शुरू हुआ, जो कुत्ते के काटने के बाद रेबीज़ से मर गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने MCD को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया था, लेकिन तथाकथित ‘डॉग लवर’ लॉबी के विरोध के बाद आदेश में संशोधन कर नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को वापस छोड़ने की अनुमति दी गई।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने डॉग बाइट पीड़ितों को बिना शुल्क मामले में हस्तक्षेप की अनुमति दी है। अगली सुनवाई 7 नवंबर 2025 को होगी। इस बीच, MCD की टीम पर भी दिल्ली में हमला हुआ जब वे नसबंदी के लिए कुत्तों को पकड़ने पहुँचे।
डॉग लवर समूहों ने न केवल कर्मचारियों को धमकाया बल्कि सार्वजनिक स्थानों पर कुत्तों को खिलाने पर कोर्ट के आदेश की अवहेलना भी की। RTI से मिली जानकारी के अनुसार, 2025 में अब तक 26 लाख से अधिक डॉग बाइट केस सामने आ चुके हैं, जबकि 2024 में यह संख्या 37 लाख से अधिक थी। रिपोर्ट्स के अनुसार एबीसी नियमों (2001 व संशोधित 2023) ने आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने में विफलता दिखाई है।
(ये रिपोर्ट विस्तार से अंग्रेजी भाषा में लिखी गई है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

